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14 माह की मासूम से दुष्कर्म के आरोपी को आजीवन प्राकृतिक उम्रकैद, जयपुर POCSO कोर्ट ने मात्र 8 माह में सुनाया फैसला

जयपुर, 9 अक्टूबर 2025: प्रिया चौहान

जयपुर की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने 14 माह की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को प्राकृतिक जीवनकाल तक के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

अदालत ने कहा कि यह अपराध न केवल पीड़िता बल्कि पूरे समाज की आत्मा को झकझोर देने वाला है।

यह मामला जयपुर के ट्रांसपोर्ट नगर थाना क्षेत्र का है। घटना 5 फरवरी 2025 को हुई थी, जब आरोपी हसीमुद्दीन, निवासी उत्तर प्रदेश, ने अपने ही रिश्ते की फूफी की डेढ़ वर्षीया बच्ची को बहाने से अपने घर ले जाकर दुष्कर्म किया.

घटना के बाद बच्ची की हालत गंभीर हो गई थी, जिसके बाद परिजनों ने ट्रांसपोर्ट नगर थाने में मामला दर्ज कराया.

पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।जयपुर की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने 14 माह की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को कड़ी सजा सुनाई है.

8 माह में आया फैसला

जयपुर महानगर प्रथम की पॉक्सो कोर्ट संख्या-1 की न्यायाधीश मीना अवस्थी ने इस मामले में मात्र 8 माह के भीतर सुनवाई पूरी कर खुली अदालत में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में त्वरित न्याय समाज में विश्वास को मजबूत करता है और अपराधियों के लिए यह एक सख्त संदेश है।

अभियोजन पक्ष की दलीलें

अभियोजन पक्ष ने मामले में 19 गवाहों की गवाही और 40 साक्ष्य प्रस्तुत किए। मेडिकल जांच और डीएनए रिपोर्ट से यह सिद्ध हुआ कि मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म आरोपी ने ही किया था।

राज्य सरकार की ओर से मामले में नियुक्त किए गए विशिष्ठ लोक अभियोजक सुरेन्द्रसिंह राजावत और लीगल एड डिफेंस काउंसिल की एडवोकेट अक्षिता शर्मा ने पैरवी की.

सरकार ने आरोपी की दलीलों का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में कामयाब रहा हैं.

घटना के बाद मासूम की मेडीकल जांच और डीएन रिपोर्ट से यह पाया गया कि बच्ची के साथ आरोपी ने दुष्कर्म किया था.

सभी गवाह और साक्ष्य भी इस घटना के क्रमवार घटनाक्रम को साबित करते हैं.

अभियोजन पक्ष ने कहा कि मासूम बच्ची जो बोल भी नहीं सकती, उसके साथ आरोपी ने रिश्तेदार होते हुए भी एक घिनौना कार्य किया हैं.

अभियोजन ने अदालत में कहा —

“एक ऐसी मासूम बच्ची जो बोल भी नहीं सकती, उसके साथ आरोपी ने रिश्तेदार होते हुए भी अमानवीय कृत्य किया है। यह अपराध न केवल बच्ची बल्कि समाज की चेतना को झकझोर देता है।”

बचाव पक्ष की दलीलें

आरोपी के अधिवक्ता ने मामले को झूठा बताते हुए कहा कि सभी गवाह परिस्थितिजन्य हैं। उनका कहना था कि घटना के समय पीड़िता अपने दादा के पास थी, न कि आरोपी के पास.

उन्होंने यह भी दावा किया कि पीड़िता की दादी, जो आरोपी की सास हैं, उनके पास आरोपी के डेढ़ लाख रुपये थे और पैसा न लौटाने के लिए यह झूठा आरोप लगाया गया है।

हालांकि अदालत ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है।

अदालत की टिप्पणी और फैसला

जज मीना अवस्थी ने अपने फैसले में कहा —

“14 माह की मासूम के साथ जो घटना हुई, उसकी पीड़ा की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ऐसे अपराधों में नरमी बरतना न्याय के हित में नहीं है। समाज को विचलित करने वाले इस कृत्य पर कठोर दंड आवश्यक है।”

अदालत ने पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई, जो समान रूप से साथ चलेंगी
आरोपी को प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा के साथ ₹1 लाख 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

पीड़िता के लिए प्रतिकर राशि

अदालत ने मासूम पीड़िता के उपचार और आगे की देखभाल के लिए पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत ₹8 लाख रुपये अंतिम प्रतिकर राशि के रूप में देने का आदेश दिया है।

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