जोधपुर। बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के बहुप्रतीक्षित चुनाव की करीब तीन महीने तक चली मतगणना प्रक्रिया गुरुवार को पूरी हो गई।
अब सभी की निगाहें शुक्रवार दोपहर 12 बजे पर टिकी हैं, जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्च-स्तरीय निर्वाचन समिति और निर्वाचन अधिकारी आधिकारिक रूप से परिणाम घोषित करेंगे।
परिणामों की घोषणा के बाद निर्वाचन प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी और विजेताओं के नामों की गजट अधिसूचना भी जारी की जाएगी।
गुरुवार को हुई अंतिम चरण की मतगणना में बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के पूर्व उपाध्यक्ष कपिल प्रकाश माथुर अंतिम निर्वाचित प्रत्याशी बने।
प्रथम वरीयता मतों की गणना के बाद प्रत्येक प्रत्याशी के निर्वाचन के लिए 2614.21 मतों का कोटा निर्धारित किया गया था।

नीरज गुर्जर से शुरूआत
सबसे पहले राजस्थान सरकार के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता नीरज गुर्जर ने निर्धारित कोटा हासिल कर जीत सुनिश्चित की।
इसके बाद वर्ष 2018 से लगातार बार काउंसिल में अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हरेंद्र सिंह सिनसिनवार ने भी आवश्यक मत प्राप्त किए।
इसके बाद क्रमशः रतन सिंह राव (उदयपुर), अतिरिक्त महाधिवक्ता भुवनेश शर्मा, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सह-अध्यक्ष सुरेश चंद्र श्रीमाली, प्रशांत शर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष योगेंद्र सिंह शक्तावत, राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन जोधपुर के अध्यक्ष रणजीत जोशी, पूर्व अध्यक्ष रामप्रसाद सिंगारिया, पूर्व अध्यक्ष कुलदीप कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह राठौड़, पूर्व अध्यक्ष सैयद शाहिद हसन, पूर्व अध्यक्ष रतनाराम ठोलिया, देवीलाल रावला, पूर्व अध्यक्ष राजेश पंवार, सतीश खांडल, रजनीश गुप्ता तथा कपिल प्रकाश माथुर ने भी निर्धारित मतों का कोटा हासिल कर अपना निर्वाचन सुनिश्चित किया।
महिलाओं की पांच सीटों पर भी तस्वीर लगभग साफ
महिला वर्ग की पांच आरक्षित सीटों पर भी चुनावी तस्वीर लगभग स्पष्ट मानी जा रही है।
उपलब्ध मतगणना के आधार पर अंजली कौशिक, आरजू खान, हेमा तिवारी, शशिबाला जैन और अनामिका सांदू का निर्वाचन तय माना जा रहा है।
हालांकि, इन सभी नामों की आधिकारिक पुष्टि शुक्रवार दोपहर 12 बजे निर्वाचन अधिकारी द्वारा परिणाम घोषित किए जाने के बाद ही होगी।
बार काउंसिल चुनाव के परिणामों का अधिवक्ताओं को लंबे समय से इंतजार था। तीन महीने तक चली विस्तृत मतगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब शुक्रवार को होने वाली आधिकारिक घोषणा के साथ नई बार काउंसिल का गठन भी अंतिम रूप ले लेगा।
गजट नोटिफिकेशन के लिए लिखेंगे पत्र
रिटर्निंग अधिकारी डॉ. सचिन आचार्य के अनुसार शुक्रवार को मतगणना पूर्ण होने के बाद के बाद अब सभी सदस्यों के नाम की सूचना सरकार को भेजी जाएगी और सरकार इसे गजट नोटिफिकेशन के जरिए घोषित करेगी।
गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही विधिवत रूप से राजस्थान बार काउंसिल के सदस्यों का निर्वाचन माना जाएगा।
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6 माह में पूर्ण हुई चुनाव प्रक्रिया
राजस्थान बार काउंसिल के 25 में से 23 सदस्यों के चुनाव के लिए 20 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी किया गया था।
इसके बाद नामांकन से लेकर वोटिंग और मतगणना में कुल 6 माह का समय लगा है।
वहीं केवल मतगणना में ही कुल 3 माह 3 दिन का समय लगा है।

प्रेफरेंशियल वोटिंग ने बढ़ाया मतगणना का समय
रिटर्निंग अधिकारी डॉ. सचिन आचार्य के अनुसार इस बार मतगणना प्रक्रिया सामान्य चुनावों की तुलना में बेहद जटिल रही।
चुनाव में प्रेफरेंशियल सिस्टम से मतदान हुआ और मैदान में 234 प्रत्याशी थे। बड़े आकार के मतपत्रों पर प्राथमिकता के आधार पर दिए गए मतों की गणना, मतों का स्थानांतरण और प्रत्येक चरण का सत्यापन करने में लंबा समय लगा।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान केवल एक बार मतगणना कर परिणाम घोषित करने के बजाय बार-बार भौतिक सत्यापन और टैली का मिलान किया गया।
इसका उद्देश्य मानवीय त्रुटि की संभावना को न्यूनतम करना और परिणाम की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना था।
सीसीटीवी और लाइव स्ट्रीमिंग से बनी पारदर्शिता
मतगणना प्रक्रिया में तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल किया गया। मुख्य मतगणना हॉल में चार सीसीटीवी कैमरे और टेबल के ऊपर दो कैमरे लगाए गए थे। इसके अलावा हाई डेफिनिशन कैमरे के माध्यम से पूरी मतगणना को YouTube पर लाइव स्ट्रीम किया गया।
इस व्यवस्था के चलते उम्मीदवार और मतदाता अपने घरों और कार्यालयों से भी मतगणना प्रक्रिया को लगातार देख सके। चुनाव अधिकारियों के अनुसार लाइव प्रसारण का सबसे बड़ा फायदा यह रहा कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रही तथा उम्मीदवारों और मतदाताओं का भरोसा मजबूत हुआ।

हर मतपत्र का दोहरा सत्यापन
मतगणना के दौरान प्रत्येक मतपत्र की जाँच बेहद सावधानी से की गई। मतपत्र पर दर्ज प्राथमिकता क्रम को देखने के लिए एक साथ तीन लोगों की निगरानी व्यवस्था रखी गई। इसके बाद अस्थायी टैली तैयार की जाती थी और संबंधित मतपत्रों का दोबारा भौतिक सत्यापन किया जाता था।
एक प्रत्याशी की एक काउंटिंग पूरी होने के बाद अंतिम टैली तैयार करने में कई बार एक घंटे या उससे अधिक समय लगा। चुनाव प्रबंधन के अनुसार इसी अतिरिक्त सावधानी का परिणाम रहा कि मानवीय त्रुटि की संभावना बेहद कम हो गई।
पहली चरण की जिला-वार मतगणना पूरी होने के बाद भी चार से पांच दिन तक दोबारा भौतिक सत्यापन कराया गया। यह प्रक्रिया उम्मीदवारों और उनके एजेंटों की मौजूदगी में सीसीटीवी की निगरानी में पूरी की गई।
पहली बार चुनाव में मतदान करने वाले युवा अधिवक्ता लक्ष्य सिंह उदावत, मेहली मेहता
वर्षा पालीवाल, उदित माथुर, माधव व्यास के लिए यह मतगणना किसी आश्चर्य से कम नहीं हैं..
258 मतदान केंद्र, 65 हजार से अधिक मतदाता
राजस्थान बार काउंसिल का चुनाव प्रबंधन भी अपने आप में बड़ी चुनौती रहा। पूरे राजस्थान में 258 मतदान केंद्रों पर मतदान कराया गया और 65 हजार से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
राज्य के भौगोलिक विस्तार को देखते हुए प्रत्येक मतदान केंद्र पर सहायक मतदान अधिकारियों की नियुक्ति, चुनाव सामग्री पहुंचाना, मतदान कराना और इसके बाद मतपेटियों को सुरक्षित वापस लाना बड़ी प्रशासनिक कवायद रही।
सीलबंद मतपेटियों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। कई स्थानों पर मतपेटियों को डबल लॉक व्यवस्था के तहत न्यायालय परिसरों में सुरक्षित रखा गया, ताकि पूरी प्रक्रिया के दौरान उनकी सुरक्षा और गोपनीयता बनी रहे।
चुनावी टीम और प्रशासनिक सहयोग को सराहा
राजस्थान बार काउंसिल के रिटर्निंग ऑफिसर डॉ. सचिन आचार्य ने गुरुवार को चुनावी टीम का आभार जताया।
अंतिम परिणाम से पहले उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में जुटी टीम के सदस्यों से मुलाकात की और उनके योगदान की सराहना की।
उन्होंने राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा संबंधित अधिकारियों के सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया।
चुनाव प्रक्रिया में पुलिस, जिला न्यायपालिका और प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए मानव संसाधन और लॉजिस्टिक सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।
शुक्रवार को खत्म इंतजार
करीब तीन महीने से अधिक समय तक चली इस मतगणना के बाद अब राजस्थान के अधिवक्ता समुदाय को अपने 23 नए प्रतिनिधियों के आधिकारिक ऐलान का बेसब्री से इंतजार है।