जयपुर। राजस्थान बार काउंसिल के 22 अप्रैल को होने वाले चुनाव इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक और बेहद खास माने जा रहे हैं।
प्रदेशभर के 84,237 से अधिक अधिवक्ता अपने 23 सदस्यों का चुनाव करने जा रहे हैं।
अधिवक्ताओं के इस सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनाव की जिम्मेदारी जिस व्यक्ति को सौंपी गई है, वह स्वयं विधि जगत का सम्मानित, अनुभवी और निष्पक्ष चेहरा हैं-सीनियर एडवोकेट डॉ. सचिन आचार्य।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सुपरवाइजरी कमेटी और हाई पावर मॉनिटरिंग कमेटी ने इस महत्वपूर्ण चुनाव के संचालन के लिए जिस नाम पर भरोसा जताया, वह डॉ. सचिन आचार्य हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर उन्हें ही यह जिम्मेदारी क्यों दी गई? इसका जवाब उनके अनुभव, प्रशासनिक क्षमता, तकनीकी दृष्टि, निष्पक्ष छवि और अधिवक्ता समाज में सम्मानित स्थान में छिपा है।
5 लाख रुपये फीस लेने से किया इनकार
सबसे अहम बात यह है कि राजस्थान बार काउंसिल चुनाव संपन्न कराने के लिए बीसीआर और बीसीआई की ओर से डॉ. सचिन आचार्य के लिए 5 लाख रुपये फीस तय की गई थी, लेकिन उन्होंने यह राशि लेने से साफ इनकार कर दिया।
डॉ. आचार्य ने मॉनिटरिंग कमेटी और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ हुई बैठक में यह राशि युवा अधिवक्ताओं के हित में उपयोग करने के लिएर इसे राजस्थान बार काउंसिल को लौटा दिया ।
उनके इस फैसले की हाई पावर कमेटी, मॉनिटरिंग कमेटी और अधिवक्ता समुदाय ने खुलकर सराहना की है।
उल्लेखनीय है कि बार काउंसिल के सदस्य रहते हुए भी उन्होंने कभी टीए, डीए या अन्य भुगतान नहीं लिया।

तकनीक और कानून का अनूठा संगम
डॉ. सचिन आचार्य ने वर्ष 1996 में जोधपुर की जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद उन्होंने विधि विषय में पीएचडी की। उनका शोध विषय डोमेन नेम, कॉपीराइट और पेटेंट कानून था, जो उस दौर में बेहद आधुनिक और अनूठा विषय माना जाता था।
तकनीक को कानून से जोड़ने की उनकी सोच ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
यही कारण है कि राजस्थान बार काउंसिल को देश की पहली डिजिटल बार काउंसिल बनाने का श्रेय भी उनकी पहल को दिया जाता है।
युवा अधिवक्ताओं के लिए व्यवस्था
डॉ. आचार्य का मानना था कि राजस्थान के दूरदराज क्षेत्रों में कार्यरत अधिवक्ताओं को भी सुविधाएं आसानी से मिलनी चाहिए।
डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेशभर के युवा वकील घर बैठे पंजीकरण, जानकारी और अन्य कार्य कर पा रहे हैं।
बताया जाता है कि वर्ष 2018 से 2026 के बीच देश में सर्वाधिक युवा अधिवक्ताओं का पंजीकरण राजस्थान बार काउंसिल में हुआ, जिसमें व्यवस्थाओं को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बार भवनों के विकास में योगदान
राजस्थान बार काउंसिल के नए भवन का मामला हो या जयपुर और जोधपुर में अधिवक्ता भवनों की स्थापना एवं संचालन-डॉ. सचिन आचार्य ने हर स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
तीन दशक का वकालती अनुभव
1996 में राजस्थान बार काउंसिल में पंजीकरण के बाद उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ से वकालत शुरू की।
करीब तीन दशक की सक्रिय प्रैक्टिस के दौरान वे हजारों मामलों में पैरवी कर चुके हैं।
बताया जाता है कि डॉ. आचार्य के नाम प्रदेश में सर्वाधिक प्रो बोनो (निःशुल्क) मामलों में पैरवी करने का रिकॉर्ड है। व
वर्तमान में भी वे कई मामलों में बिना फीस पैरवी कर रहे हैं। यहां तक कि जिस विश्वविद्यालय से उन्होंने कानून की पढ़ाई की, उसके मामलों में भी उन्होंने कोई शुल्क नहीं लिया।
राजस्थान हाईकोर्ट ने भी उन्हे हाईकोर्ट के मुकदमों में पैरवी के लिए अधिवक्ता नियुक्त हैं लेकिन डॉ सचिन आचार्य राजस्थान हाईकोर्ट से भी कोई फीस नहीं लेते.
जनहित मामलों में भी सक्रिय चेहरा
डॉ. सचिन आचार्य ने प्रदेश से जुड़े अनेक जनहित मामलों में अधिवक्ता और न्यायमित्र के रूप में सेवाएं दी हैं।
इनमें तालछापर में कृष्णमृग संरक्षण, बारां में पेड़ों की कटाई, जोधपुर रिंग रोड, शहर की सफाई व्यवस्था, अस्पतालों से जुड़े मुद्दे, परिवहन कंपनियों के स्थानांतरण और सांस्कृतिक ढांचे के विकास जैसे कई महत्वपूर्ण मामले शामिल हैं।
वे 100 से अधिक जनहित मामलों में योगदान दे चुके हैं।
10 हजार से अधिक मामलों में पैरवी
राजस्थान High Court, सुप्रीम कोर्ट और देशभर की विभिन्न अदालतों में डॉ. आचार्य 10 हजार से अधिक मुकदमों में पैरवी कर चुके हैं।
वे सीबीआई, एक्साइज विभाग, कई सरकारी संस्थानों, कॉरपोरेट कंपनियों और प्रतिष्ठित परिवारों के अधिवक्ता भी रह चुके हैं।
वे राजस्थान हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के दो बार सदस्य भी रह चुके हैं।
देश के नाम गिरामी कॉरपोरेट संस्थाओं, कंपनियो और राजपरिवार के अधिवक्ता रह चुके है.
सीनियर एडवोकेट का सम्मान
उनकी विधिक सेवाओं और योगदान को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 में उन्हें सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया।
पहला और अंतिम चुनाव, सीड पेपर से प्रचार
डॉ. सचिन आचार्य ने वर्ष 2018 में पहली बार राजस्थान बार काउंसिल सदस्य का चुनाव लड़ा था।
उसी समय उन्होंने घोषणा की थी कि यह उनका पहला और अंतिम चुनाव होगा।
उनका चुनाव प्रचार भी चर्चा में रहा, क्योंकि उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सीड पेपर से प्रचार सामग्री तैयार करवाई थी, जिसे मिट्टी में लगाने पर पौधा उगता है।

निष्पक्षता और भरोसे का नाम
राजस्थान बार काउंसिल चुनाव जैसे बड़े और संवेदनशील चुनाव में निष्पक्षता, प्रशासनिक क्षमता, तकनीकी समझ और अधिवक्ताओं के बीच सम्मानित छवि सबसे अधिक मायने रखती है।
यही वजह है कि डॉ. सचिन आचार्य को इस चुनाव का रिटर्निंग अधिकारी बनाया गया है।
अधिवक्ता जगत का मानना है कि उनके नेतृत्व में यह चुनाव पारदर्शी, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न होगा।
चुनाव की खास बातें
इस विशाल चुनावी प्रक्रिया में मुख्य सचिव, डीजीपी, निर्वाचन विभाग और प्रमुख विधि सचिव भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
वाहनों की संख्या: 30 से अधिक
चुनाव तिथि: 22 अप्रैल 2026
कुल सीटें: 23 सदस्य
कुल मतदाता अधिवक्ता: 84,237+
पोलिंग स्टेशन: 258
मतपेटियां: 700 से अधिक
एसडीओ स्तर अधिकारी: 258
राज्य सरकार कर्मचारी: 550+
हाईकोर्ट व अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारी: 550+
