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भारत के उच्चायुक्त अमराराम गुर्जर ने मलावी में किया महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा का अनावरण, बैसाखी समारोह में जुटे 400 से अधिक लोग

India and Malawi Unveil Maharaja Ranjit Singh Bust at Blantyre Sikh Gurudwara

लिलोंग्वे/ब्लैंटायर। अफ्रीकी देश मलावी में भारतीय संस्कृति और सिख विरासत को सम्मान देते हुए ब्लैंटायर शहर के लिम्बे स्थित सिख गुरुद्वारे परिसर में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा (बस्ट) का भव्य अनावरण किया गया।

यह समारोह 19 अप्रैल 2026 को बैसाखी उत्सव के बाद आयोजित किया गया, जिसमें 400 से अधिक प्रवासी भारतीय, सिख समुदाय के सदस्य और भारत के मित्र शामिल हुए।

इस अवसर पर मलावी में भारत के उच्चायुक्त अमराराम गुर्जर और ब्लैंटायर सिटी काउंसिल के मेयर काउंसलर इसाक जोमो उस्मान ने संयुक्त रूप से प्रतिमा का अनावरण किया।

गौतरबल हैं कि भारत के उच्चायुक्त अमराराम गुर्जर राजस्थान के पाली जिले के निवासी हैं. जो वर्तमान में मलावी में भारत के उच्चायुक्त हैं.

समारोह में भारतीय और मलावी समुदाय के बीच सांस्कृतिक एकता और मित्रता का संदेश देखने को मिला।

पिछले वर्ष सिख एसोसिएशन इन मलावी (SAM) के सदस्यों से मुलाकात के दौरान भारतीय उच्चायुक्त ने गुरुद्वारा परिसर में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा स्थापित करने का सुझाव दिया था, जिसे समुदाय ने सहर्ष स्वीकार किया।

महाराजा रणजीत सिंह (1780–1839), जिन्हें “शेर-ए-पंजाब” के नाम से जाना जाता है, भारतीय इतिहास के महान सिख योद्धा और दूरदर्शी शासक थे।

उन्होंने पंजाब में सिख साम्राज्य की स्थापना की और अपने शासनकाल में समृद्धि, सहिष्णुता और एकता का स्वर्णिम युग स्थापित किया।

भारत सरकार की भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) द्वारा उपलब्ध कराई गई यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को महाराजा रणजीत सिंह के साहस, नेतृत्व और दूरदृष्टि से प्रेरणा देगी।

साथ ही यह मलावी में बसे भारतीय सिख समुदाय के लिए गौरव और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनेगी।

मलावी में सिख समुदाय लंबे समय से देश के विकास, व्यापार और सामाजिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है।

यहां पहला गुरुद्वारा वर्ष 1928 में स्थापित हुआ था और समुदाय अब 2028 में उसके शताब्दी समारोह की तैयारी को लेकर उत्साहित है।

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