टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

28 सेवानिवृत्त न्यायाधीश बने प्रशिक्षित मध्यस्थ, रालसा का विशेष 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न, जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल ने वितरित किए प्रमाण-पत्र

Retired Judges Trained as Mediators: Rajasthan’s Major Push to Speed Up Justice Delivery

जयपुर। राजस्थान में न्याय तक त्वरित और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने हाईकोर्ट के 28 सेवानिवृत्त जजों को विशेष मध्यस्थता (मीडिएशन) प्रशिक्षण दिया हैं.

5 दिन तक चले 40 घंटे के गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को जयपुर स्थित विधिक सेवा सदन में भव्य समापन हुआ।

न्यायिक क्षेत्र में इस पहल को अदालतों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और विवादों के शीघ्र समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

समापन समारोह में राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं मीडिएशन प्रभारी महेंद्र कुमार गोयल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का अनुभव देश की न्यायिक व्यवस्था की सबसे बड़ी पूंजी है और मध्यस्थता के क्षेत्र में उनका योगदान लाखों लोगों को त्वरित न्याय दिलाने में सहायक होगा।

कार्यक्रम के दौरान एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य भी देखने को मिला, जब जस्टिस गोयल ने मंच से प्रतिभागियों को बुलाने के बजाय स्वयं उनकी सीटों तक जाकर प्रमाण-पत्र वितरित किए। उनके इस सम्मानजनक व्यवहार की उपस्थित लोगों ने खुलकर सराहना की।

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम शर्मा अत्री ने बताया कि यह प्रशिक्षण 1 जून से 5 जून 2026 तक सुप्रीम कोर्ट की Mediation and Conciliation Project Committee (एमसीपीसी) के निर्धारित मानकों के अनुसार आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में प्रदेशभर से आए 28 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मध्यस्थता की आधुनिक तकनीकों, संवाद कौशल, विवाद समाधान की रणनीतियों और व्यवहारिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

श्रम न्यायालय जयपुर के न्यायाधीश बालकृष्ण गोयल तथा राष्ट्रीय प्रशिक्षक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अनुजा सक्सेना ने विभिन्न सत्रों का संचालन किया।

रोल-प्ले, समूह चर्चा और वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को मध्यस्थता की बारीकियां सिखाई गईं।

विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर की अदालतों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या के बीच मध्यस्थता सबसे प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है।

ऐसे में अनुभवी सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को प्रशिक्षित कर विवाद निस्तारण की प्रक्रिया में शामिल करना न्यायिक सुधारों की दिशा में दूरगामी परिणाम देने वाला कदम साबित हो सकता है।

सबसे अधिक लोकप्रिय