31 जुलाई से 2 अगस्त तक जयपुर में आयोजित होगी Commonwealth Peace Mediation and Rule of Law Conference
Laws and Legals Exclusive. जयपुर | “क्या अदालतों में वर्षों तक चलने वाले मुकदमों का समाधान अब कुछ दिनों या एक महीने में हो सकता है?
क्या केवल विवाद (Dispute) ही नहीं, बल्कि लोगों के मन में बैठी कटुता और टकराव (Conflict) भी समाप्त किया जा सकता है?
और क्या जयपुर से पूरी दुनिया के लिए मध्यस्थता (Mediation) का नया मॉडल तैयार होगा?”
इन सभी सवालों का जवाब राजस्थान की राजधानी जयपुर में 31 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित होने जा रहे Commonwealth Peace Mediation and Rule of Law Conference में तलाशा जाएगा।
यह केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में एक नई सोच, नई दिशा और नए वैश्विक दृष्टिकोण की शुरुआत माना जा रहा है।
राजधानी जयपुर के एक पांच सितारा होटल में आयोजित इस तीन दिवसयी सम्मेलन में कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, अटॉर्नी, मध्यस्थ (Mediators), विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति-निर्माता एक मंच पर एकत्र होंगे।
सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होगा “Jaipur Peace Mediation Declaration”, जिसे आयोजक दक्षिण एशिया ही नहीं, बल्कि कॉमनवेल्थ न्यायिक व्यवस्था के इतिहास में एक मील का पत्थर मान रहे हैं।
क्या है कॉमनवेल्थ और क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन?
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ हरीओम अत्री ने सोमवार को रालसा में आयोजित प्रेसवार्ता में इस सम्मेलन की जानकारी दी.
उन्होने कहा कि कॉमनवेल्थ उन देशों का समूह है जिनकी विधिक व्यवस्था ऐतिहासिक रूप से ब्रिटिश कॉमन लॉ प्रणाली से प्रभावित रही है। इन देशों में प्रक्रियात्मक (Procedural Law) और मूलभूत (Substantive Law) कानूनों में व्यापक समानताएं हैं।
यही कारण है कि न्यायिक सुधार, वैकल्पिक विवाद समाधान और कानून के शासन (Rule of Law) जैसे विषयों पर साझा विमर्श की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
सदस्य सचिव ने कहा कि इसी सोच के साथ जयपुर में पहली बार Commonwealth Peace Mediation and Rule of Law Conference आयोजित की जा रही है, जिसमें सभी 52 कॉमनवेल्थ देशों को आमंत्रित किया गया है।
अब तक लगभग 30 देशों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है और आयोजकों को उम्मीद है कि सम्मेलन तक अधिकांश सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो जाएगा।
राजस्थान को क्यों मिला यह अवसर?
यह सम्मेलन संयोग नहीं, बल्कि राजस्थान की मेडिएशन व्यवस्था की राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान का परिणाम है।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA) ने सुप्रीम कोर्ट की Mediation Mission के दौरान उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
विशेष अभियान में राज्य ने करीब 25 हजार मामलों का मध्यस्थता के माध्यम से निस्तारण किया।
लगभग दो हजार से अधिक प्रशिक्षित मध्यस्थों का नेटवर्क तैयार किया गया और न्यायालयों के बाहर विवाद समाधान की संस्कृति को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया गया।
आयोजकों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और उत्कृष्ट परिणाम देने के कारण ही राजस्थान को इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी का अवसर प्राप्त हुआ।
मीडिएशन नहीं, ‘पीस मीडिएशन’ पर होगा वैश्विक विमर्श
सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल Mediation पर नहीं, बल्कि Peace Mediation पर चर्चा होगी।
सामान्य मीडिएशन का उद्देश्य अदालत के बाहर विवाद का समाधान करना होता है, लेकिन Peace Mediation उससे कहीं आगे की अवधारणा है।
इसका उद्देश्य केवल मुकदमा समाप्त करना नहीं, बल्कि पक्षकारों के बीच वर्षों से चली आ रही कटुता, अविश्वास और मानसिक टकराव को भी समाप्त करना है।
यदि दो पक्ष केवल कानूनी मजबूरी में समझौता कर लें, लेकिन उनके मन में विरोध बना रहे, तो भविष्य में नया विवाद जन्म ले सकता है।
इसके विपरीत पीस मीडिएशन ऐसा समाधान खोजने का प्रयास करती है, जिसे दोनों पक्ष दिल से स्वीकार करें और भविष्य में विवाद की कोई संभावना न बचे।
यही इस सम्मेलन की मूल अवधारणा है।
Adversarial System बनाम Peace Mediation
वर्तमान भारतीय न्याय व्यवस्था मुख्यतः Adversarial System पर आधारित है।
इस व्यवस्था में दोनों पक्ष एक-दूसरे के दावों का पूर्ण खंडन करते हैं।
एक पक्ष कहता है कि अनुबंध हुआ था, दूसरा कहता है कि ऐसा कोई अनुबंध ही नहीं हुआ।
इसके बाद साक्ष्य, गवाह, बहस और अपीलों की लंबी प्रक्रिया शुरू होती है, जो कई बार दस-दस वर्षों तक चलती है।
इसके विपरीत Mediation Advocacy पक्षकारों को समाधान आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
यदि दोनों पक्ष मूल तथ्यों को स्वीकार करते हुए केवल विवादित बिंदुओं पर सहमति बनाने का प्रयास करें, तो वर्षों तक चलने वाला मुकदमा कुछ दिनों या अधिकतम एक महीने में समाप्त हो सकता है।
यही मॉडल अब कॉमनवेल्थ देशों के सामने रखा जाएगा।
Rule of Law भी रहेगा केंद्र में
सम्मेलन का दूसरा प्रमुख विषय Rule of Law होगा।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन ही नागरिक अधिकारों, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की सबसे बड़ी गारंटी माना जाता है।
सम्मेलन में इस बात पर भी मंथन होगा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में कानून के शासन को किस प्रकार और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा न्यायिक संस्थाओं को जनता के प्रति अधिक उत्तरदायी कैसे बनाया जाए।
देश-विदेश के न्यायाधीश होंगे शामिल
सम्मेलन में भारत के सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश भाग लेंगे।
विदेशी न्यायाधीशों में जांबिया सुप्रीम कोर्ट की Justice Daba Nair Patel,
श्रीलंका सुप्रीम कोर्ट जज Justice A.H.M. Nawaz और बहमास अपीलीय कोटर् के Justice Vashisht V. Okara के शामिल होने की अपनी सहमति भेजी हैं.
इसके अतिरिक्त बहामास, जाम्बिया, श्रीलंका, सिंगापुर, जिम्बाब्वे, हांगकांग, यूनाइटेड किंगडम, मलेशिया, बांग्लादेश, इस्वातिनी, केन्या, मालदीव सहित अनेक देशों के न्यायविद और विधि विशेषज्ञ सम्मेलन में भाग लेंगे।
भव्य उद्घाटन समारोह
31 जुलाई की शाम जयपुर स्थित होटल द ललित में सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन होगा।
इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट के जज, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा, Attorney General आर. वेंकटरमणी, Supreme Court Bar Association के अध्यक्ष विकास सिंह, Supreme Court Mediation and Conciliation Project Committee (MCPC) के प्रतिनिधि, राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी तथा अनेक वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे।
राजस्थान सरकार की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।
सम्मेलन के आयोजन में विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा है।
इतिहास रचेगी Jaipur Peace Mediation Declaration
सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण होगा Jaipur Peace Mediation Declaration।
इस घोषणा-पत्र पर विभिन्न कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, अटॉर्नी, मध्यस्थ और विधि विशेषज्ञ हस्ताक्षर करेंगे।
घोषणा का उद्देश्य केवल मेडिएशन को बढ़ावा देना नहीं होगा, बल्कि यह तय करना होगा कि आने वाले वर्षों में कॉमनवेल्थ देशों में Conflict Resolution, Peace Mediation, Rule of Law और न्याय तक त्वरित पहुंच के लिए साझा सिद्धांत क्या होंगे।
यह दस्तावेज़ भविष्य में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।
भारत केवल सीखेगा नहीं, नेतृत्व भी करेगा
आयोजकों का स्पष्ट कहना है कि यह सम्मेलन केवल अन्य देशों से सीखने का मंच नहीं है।
राजस्थान ने जिस प्रकार कम समय में बड़ी संख्या में मामलों का मध्यस्थता के माध्यम से समाधान किया है, वह अनुभव अन्य देशों के लिए भी उपयोगी है।
इसलिए यह सम्मेलन दोतरफा संवाद का मंच होगा—भारत दुनिया से सीखेगा भी और दुनिया को अपना सफल मॉडल भी बताएगा।
जनता के लिए क्या मायने रखता है यह सम्मेलन?
यदि सम्मेलन में प्रस्तुत अवधारणाएं प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो आम नागरिकों के लिए इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि वर्षों तक अदालतों में लंबित रहने वाले अनेक विवाद मध्यस्थता के माध्यम से कम समय में सुलझ सकेंगे।
इससे न केवल न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बल्कि मुकदमेबाजी की लागत घटेगी, समय बचेगा और पक्षकारों के बीच स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
जयपुर में आयोजित होने जा रहा Commonwealth Peace Mediation and Rule of Law Conference केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए वैश्विक नेतृत्व का अवसर है।
यदि Jaipur Peace Mediation Declaration अपने उद्देश्यों के अनुरूप प्रभावी सिद्ध होती है, तो यह आने वाले वर्षों में कॉमनवेल्थ देशों में मेडिएशन और विवाद समाधान की दिशा बदलने वाला ऐतिहासिक दस्तावेज़ बन सकती है।
राजस्थान के लिए यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक न्यायिक मानचित्र पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने का अवसर भी है।
