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‘पैकेज्ड फूड देखकर कैसे पता चलेगा खाना कितना ‘खतरनाक’? सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से पूछे 13 सवाल; बच्चों की न्यूट्रिशन लिटरेसी पर भी मांगा जवाब

Packaged Food Warning Label: Supreme Court Asks FSSAI 13 Questions, Seeks Response on Children’s Nutrition Literacy

नई दिल्ली। पैकेज्ड फूड पर ज्यादा चीनी, नमक और फैट की चेतावनी देने वाला लेबल आखिर कब से लगेगा? यह लेबल कैसा होगा और किन प्रोडक्ट्स पर लगेगा?

सुप्रीम कोर्ट ने इन सवालों पर Food Safety and Standards Authority of India यानी FSSAI से जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने लाल हेक्सागन वाले फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल के प्रस्ताव पर FSSAI से कुल 13 सवाल पूछे हैं।

यह मामला 3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी की याचिका से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त को पैकेज्ड फूड की लेबलिंग और बच्चों की सेहत पर चिंता जताते हुए जल्द कदम उठाने को कहा था।

इसके बाद FSSAI ने 28 अगस्त को हलफनामा देकर लाल हेक्सागन वाला फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया।

पहले चरण में दो या ज्यादा पोषक तत्व तय सीमा से ज्यादा वाले प्रोडक्ट और कुछ मीठे पेय, जबकि दूसरे चरण में किसी एक पोषक तत्व की मात्रा ज्यादा वाले प्रोडक्ट शामिल करने का प्रस्ताव है।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और FSSAI से इस व्यवस्था की टाइमलाइन, तय सीमा, हेक्सागन के आकार-रंग, लेबल की समझ और बच्चों को इसकी जानकारी देने के तरीके समेत 13 मुद्दों पर हलफनामा मांगा है। इसके लिए 10 दिन का समय दिया गया है।

FSSAI के प्रस्ताव पर SC ने क्यों उठाए सवाल?

FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक पैकेज्ड फूड के सामने लाल हेक्सागन लगाकर ज्यादा मात्रा वाले पोषक तत्वों की चेतावनी दी जाएगी। इसके लिए ICMR-NIN की 2024 की गाइडलाइंस में तय सीमाओं को आधार बनाया जाएगा।

इस व्यवस्था से सिंगल-इंग्रीडिएंट फूड और घी, तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे प्राकृतिक रूप से ज्यादा फैट, शुगर या नमक वाले खाद्य पदार्थों को बाहर रखने का प्रस्ताव है।

FSSAI ने लेबलिंग को दो चरणों में Phase-I और Phase-II में लागू करने की बात कही है, ताकि कंपनियों को प्रोडक्ट में बदलाव और उपभोक्ताओं को नई व्यवस्था समझने का समय मिल सके।

FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक पहले चरण में ऐसे उत्पादों को शामिल किया जाएगा जिनमें चिंता वाले दो या उससे ज्यादा पोषक तत्व तय सीमा से अधिक हैं। कुछ मीठे पेय भी पहले चरण में शामिल किए जाएंगे।

दूसरे चरण में ऐसे उत्पादों को चेतावनी के दायरे में लाने का प्रस्ताव है जिनमें इन तीन में से कोई एक पोषक तत्व तय सीमा से ज्यादा है।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि इस दो-चरण वाली व्यवस्था का आधार क्या है और दोनों चरण कब तक लागू होंगे।

SC ने Phase-I और Phase-II पर सवाल उठाए

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि पहले चरण में दो या ज्यादा पोषक तत्व ज्यादा वाले प्रोडक्ट्स और दूसरे चरण में सिर्फ एक पोषक तत्व ज्यादा वाले प्रोडक्ट्स को क्यों रखा गया है। FSSAI को इसके पीछे का आधार बताना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों चरणों के बीच तय समय सीमा जरूरी है, वरना दूसरा चरण टल सकता है। इसलिए FSSAI को स्पष्ट और वैज्ञानिक टाइमलाइन देनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि एक तरीका यह हो सकता है कि पहले सबसे ज्यादा चिंताजनक स्तर वाले प्रोडक्ट्स पर लेबल लगाया जाए और बाद के चरणों में तय सीमा धीरे-धीरे कम की जाए।

लाल हेक्सागन कैसा और कितना बड़ा होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ यह नहीं पूछा कि लेबल कब लगेगा। बल्कि कोर्ट ने लेबल के आकार और पैकेट पर उसकी जगह को लेकर भी सवाल किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि लाल हेक्सागन का आकार कितना होगा और पैकेट पर कहां लगाया जाएगा।

FSSAI ने फॉन्ट को पीछे दिए न्यूट्रिशन लेबल से एक प्वाइंट बड़ा रखने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन सुप्रीम ने पूछा कि हेक्सागन का आकार पैकेट के आकार के हिसाब से तय होगा या सभी पैकेट पर एक जैसा रहेगा।

लाल रंग को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है। भारत में लाल रंग को नॉन-वेज से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए FSSAI को बताना होगा कि क्या वार्निंग लेबल के लिए रंग बदलने पर विचार किया जाएगा।

सिर्फ लिखना काफी होगा या तस्वीर भी जरूरी?

FSSAI के प्रस्ताव में मुख्य रूप से शब्दों के जरिए चेतावनी देने की बात है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि भारत में अलग-अलग भाषाओं, साक्षरता के स्तर और उम्र के लोगों को देखते हुए क्या सिर्फ शब्दों से दी गई चेतावनी काफी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पिक्टोरियल सिंबल के इस्तेमाल पर भी विचार किया जाना चाहिए, ताकि उपभोक्ता बिना ज्यादा पढ़े भी समझ सके कि किसी प्रोडक्ट में शुगर, फैट या नमक ज्यादा है।

अगर किसी पैकेज्ड फूड में शुगर और फैट दोनों ज्यादा हैं, तो क्या दोनों की चेतावनी एक ही हेक्सागन में दी जाए या शुगर और फैट के लिए अलग-अलग हेक्सागन लगाए जाएं? SC ने FSSAI से पूछा है कि उसने एक ही हेक्सागन रखने का फैसला क्यों किया है।

शुगर-फैट के साथ दूसरे केमिकल पर भी नजर

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि नमक, चीनी और फैट कम करने के बाद कंपनियां इनकी जगह आर्टिफिशियल प्रिजर्वेटिव, इमल्सीफायर और दूसरे एडिटिव्स का इस्तेमाल बढ़ा सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से पूछा है कि अगर नए लेबलिंग सिस्टम के चलते ऐसे दूसरे केमिकल्स का इस्तेमाल बढ़ता है, तो उन्हें नियंत्रित करने के लिए क्या व्यवस्था होगी।

बच्चों की सेहत पर सुप्रीम कोर्ट का खास जोर

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को लेकर अलग से चिंता जताई है। उसका कहना है कि बच्चे कई बार ऐसे फूड प्रोडक्ट्स को लेकर फैसला करते हैं, जिनकी पोषण संबंधी जानकारी को समझने की उनकी क्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती।

इसीलिए कोर्ट ने केंद्र से पूछा है कि स्कूलों में पाठ्यक्रम, कार्यशालाओं और दूसरे कार्यक्रमों के जरिए बच्चों को पैकेज्ड फूड की पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना और समझना कैसे सिखाया जाएगा।

यानी बच्चों को सिर्फ यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि कौन सा खाना अच्छा है और कौन सा खराब। उन्हें यह भी समझाना होगा कि पैकेट पर लिखी पोषण संबंधी जानकारी और सामने लगे चेतावनी चिन्ह का मतलब क्या है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछे ये 13 सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI के प्रस्ताव से जुड़े ये 13 अहम सवाल उठाए हैं।

सवालकोर्ट क्या जानना चाहता है?
1. टाइमलाइनदोनों चरण कब लागू होंगे? तय समय सीमा क्या है?
2. दो चरण क्यों?पहले दो या ज्यादा पोषक तत्व और बाद में सिर्फ एक को क्यों रखा गया?
3. मीठे पेयपहले चरण में कौन से मीठे पेय आएंगे और उनकी तय सीमा क्या होगी?
4. फूड कैटेगरीकैटेगरी 2 और 3 के अंतर को लेबल में कैसे शामिल किया जाएगा?
5. प्रोसेसिंग लेवलकम प्रोसेस किए गए और ज्यादा प्रोसेस किए गए फूड के लिए अलग मानक होंगे या नहीं?
6. शुगर-फैटटोटल शुगर, सैचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट को कैसे गिना जाएगा?
7. लाल रंगलाल रंग को नॉन-वेज से जोड़ने की वजह से क्या लेबल का रंग बदला जाना चाहिए?
8. हेक्सागन का आकारहेक्सागन कितना बड़ा होगा, फॉन्ट का आकार क्या होगा और पैकेट पर इसे कहां लगाया जाएगा?
9. तस्वीर/सिंबलक्या सिर्फ शब्द पर्याप्त हैं या पोषक तत्वों के पिक्टोरियल सिंबल भी जरूरी होंगे?
10. अलग हेक्सागनशुगर, फैट और नमक के लिए अलग-अलग हेक्सागन क्यों नहीं लगाए जाएं?
11. दूसरे केमिकल्सप्रिजर्वेटिव और इमल्सीफायर का इस्तेमाल बढ़ा तो उसे कैसे नियंत्रित किया जाएगा?
12. स्वैच्छिक अवधिनियम लागू होने से पहले कंपनियों को स्वैच्छिक अनुपालन के लिए समय मिलेगा या नहीं?
13. बच्चों की शिक्षास्कूलों में बच्चों को फूड लेबल और न्यूट्रिशन की जानकारी कैसे सिखाई जाएगी?

FSSAI को 10 दिन में देना होगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को इन सवालों पर 10 दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। FSSAI के जवाब के बाद याचिकाकर्ता भी अपनी प्रतिक्रिया देगा।

मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी।

फिलहाल कोर्ट ने खुद कोई अंतिम लेबलिंग मॉडल तय नहीं किया है। उसने FSSAI के प्रस्ताव को लागू करने से पहले उसके हर अहम पहलू पर स्पष्ट जवाब मांगा है।

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