जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने‘सरफेसी एक्ट’ के तहत बैंक की लोन वसूली की कार्रवाई को लेकर अहम फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट ने पंजाब नेशनल बैंक को बड़ी राहत देते हुए उसकी याचिका स्वीकार कर ली और ‘सरफेसी एक्ट’ के तहत संपत्ति का कब्जा लेने की कार्रवाई आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि किसी प्रॉपर्टी को लेकर चल रहे अलग सिविल विवाद में जारी स्टेटस क्वो (Status Quo) का आदेश किसी बैंक की सरफेसी (सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स एंड एनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट एक्ट) कार्रवाई को नहीं रोक सकता, खासकर तब जब बैंक उस सिविल केस में पक्षकार ही नहीं है।
माामले में हाईकोर्ट ने पाली के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि वह PNB की प्रॉपर्टी का कब्जा लेने से जुड़ी अर्जी पर कानून के मुताबिक फैसला करें।
हाईकोर्ट ने कहा कि सिविल कोर्ट के ऐसे अंतरिम आदेश को आधार बनाकर जिला मजिस्ट्रेट बैंक की ‘सरफेसी एक्ट’ के तहत कब्जा लेने की कार्रवाई को अनिश्चित समय तक रोककर नहीं रख सकता।
जस्टिस समीर जैन ने कहा कि ‘सरफेसी एक्ट’ की धारा 14 के तहत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का काम सिर्फ बैंक की मदद करना है। उन्हें प्रॉपर्टी के मालिकाना हक या परिवार के आपसी विवाद में फैसला नहीं करना है। कानून की प्रक्रिया पूरी होने पर उन्हें बैंक को गिरवी रखी प्रॉपर्टी का कब्जा लेने में मदद करनी होती है।
करीब 7 करोड़ के लोन की गारंटी में गिरवी रखा था प्लॉट
मामला पाली के RIICO इंडस्ट्रियल एरिया के एक प्लॉट से जुड़ा है। जहां काना राम ने 2016 में 2000 वर्गमीटर का प्लॉट खरीदा था।
यह प्लॉट उसके नाम पर दर्ज था। बाद में काना राम ने एक कंपनी को मिली करीब 7 करोड़ रुपये की कैश-क्रेडिट सुविधा और 11.87 लाख रुपये के कार लोन के लिए पर्सनल गारंटर की जिम्मेदारी ली।
इस लोन की सुरक्षा के लिए काना राम ने प्लॉट के मूल दस्तावेज PNB के पास जमा कर दिए। इसके बाद लोन अकाउंट 10 जनवरी 2019 को NPA हो गया।
बैंक ने बकाया रकम की वसूली के लिए ‘सरफेसी एक्ट’ के तहत कार्रवाई शुरू की और पहले प्रॉपर्टी पर सांकेतिक कब्जा लिया।
इसके बाद बैंक ने प्रॉपर्टी का वास्तविक यानी फिजिकल कब्जा लेने के लिए सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत पाली के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास आवेदन किया।
परिवार के विवाद में फंसी थी बैंक की संपत्ति
इसी दौरान काना राम के भाई-बहनों ने प्रॉपर्टी को लेकर अलग सिविल केस दायर किया। उनका कहना था कि यह जमीन उनके पिता के पैसों से खरीदी गई थी।
इस केस में 9 मार्च 2019 को सिविल कोर्ट ने प्रॉपर्टी को लेकर स्टेटस क्वो बनाए रखने का आदेश दिया। यानी उस समय प्रॉपर्टी की जो स्थिति थी, उसे बदलने से रोक दिया गया।
PNB ने इस केस में खुद को पक्षकार बनाने की कोशिश भी की थी। लेकिन सिविल कोर्ट ने बैंक की अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी कि बैंक इस मामले में जरूरी पक्षकार नहीं है।
यहीं से विवाद और बढ़ गया। एक तरफ बैंक‘सरफेसी एक्ट’ के तहत संपत्ति का कब्जा लेना चाहता था, दूसरी तरफ जिला मजिस्ट्रेट ने सिविल कोर्ट के स्टेटस-क्वो आदेश का हवाला देते हुए बैंक की धारा 14 वाली अर्जी को आगे नहीं बढ़ाया।
बैंक ने कहा- हमारे खिलाफ आदेश लागू नहीं
आखिरकार जिला मजिस्ट्रेट के इस रवैये के खिलाफ PNB ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
बैंक की दलील थी कि जिस सिविल मुकदमे में स्टेटस-क्वो का आदेश दिया गया है, उसमें बैंक खुद पक्षकार नहीं है। ऐसे में उस मुकदमे में दिया गया अंतरिम आदेश बैंक की वैधानिक सरफेसी कार्रवाई को कैसे रोक सकता है।
हाईकोर्ट ने बैंक की इस दलील को सही माना।
‘जिस मुकदमे में पक्षकार नहीं, उसका आदेश कैसे लागू होगा?’
हाईकोर्ट ने कहा कि जिस सिविल केस में बैंक खुद पक्षकार नहीं था, वहां पारित अंतरिम आदेश को बैंक पर लागू नहीं किया जा सकता। खास तौर पर तब, जब बैंक को उस केस में पक्षकार बनाने की अर्जी भी खारिज हो चुकी हो।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड के मुताबिक प्लॉट की रजिस्टर्ड बिक्री विलेख काना राम के नाम थी और RIICO के रिकॉर्ड में भी प्रॉपर्टी उसी के नाम दर्ज थी।
प्लॉट को बैंक के पास गिरवी रखने की कार्रवाई को भी परिवार के सदस्यों ने उस समय चुनौती नहीं दी थी।
SARFAESI कार्रवाई पर नहीं लग सकती अनिश्चित रोक
हाईकोर्ट ने सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की भूमिका के बारे में भी बताया।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस धारा के तहत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या संबंधित अधिकारी का काम प्रशासनिक होता है। उसे यह तय नहीं करना कि परिवार के बीच प्रॉपर्टी का असली मालिक कौन है।
अगर किसी दूसरी सिविल केस में प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है, तो उसका फैसला उसी केस में होगा। लेकिन सिर्फ इस विवाद की वजह से बैंक की रिकवरी कार्रवाई को नहीं रोका जा सकता।
हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट की ओर से PNB की धारा 14 वाली कार्रवाई को लंबित रखने के फैसले में ‘मूलभूत अधिकार क्षेत्र की गलती’ मानी।
हाईकोर्ट ने बैंक को दी राहत
इसके बाद हाईकोर्ट ने PNB की याचिका मंजूर कर ली और बैंक को ‘सरफेसी एक्ट’ के तहत संपत्ति का कब्जा लेने की कार्रवाई आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।
हाईकोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को बैंक की धारा 14 वाली अर्जी पर कानून के मुताबिक फैसला लेने का निर्देश दिया, ताकि बैंक सरफेसी एक्ट के तहत प्रॉपर्टी का कब्जा लेने की कार्रवाई आगे बढ़ा सके।
बैंक को अपनी पुरानी अर्जी दोबारा आगे बढ़ाने या नई अर्जी दाखिल करने की भी छूट दी गई है।
