जयपुर मद्रास हाईकोर्ट से तबादला होकर राजस्थान आए जस्टिस केआर श्रीराम राजस्थान हाईकोर्ट के 43 वें मुख्य न्यायाधीश हैं. 21 जुलाई 2025 की शाम 4 बजे राजभवन में आयोजित हुए एक समारोह में जस्टिस के आर श्रीराम ने मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली.
लंदन से समुन्द्री विज्ञान में एलएलएम करने वाले जस्टिस के आर श्रीराम का जन्म 28 सितंबर, 1963 को मुंबई में हुआ. मुंबई विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद उन्होंने लंदन का रुख किया था.

जुलाई 1986 को महाराष्ट्र एवं गोवा बार कौंसिल में अधिवक्ता के रूप में जस्टिस श्रीराम ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया.
जस्टिस श्रीराम ने अधिवक्ता के तौर पर बॉम्बे हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, उपभोक्ता आयोगों, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण, प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण, कंपनी कानून बोर्ड सहित देश के कई हाईकोर्ट में भी केसो में पैरवी की.
उनके अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर 21 जून, 2013 को जस्टिस श्रीराम को बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया.
एक लंबे अंतराल के बाद 2 मार्च, 2016 को को उन्हे स्थायी जज नियुक्त किया गया.

11 वर्ष के बाद जस्टिस श्रीराम को 21 सितंबर 2024 को मद्रास हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत दी गयी.
सेवानिवृति से कुछ माह पूर्व सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनके तबादले की सिफारिश मद्रास हाईकोर्ट से राजस्थान हाईकोर्ट में की गयी.
जिसके बाद 21 जुलाई 2025 को जस्टिस श्रीराम ने राजस्थान हाईकोर्ट के 43 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली.
व्यक्तिगत जीवन में जस्टिस श्री राम लगातार सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल होते रहे है.
गोल्फ खेलना पसंद करने वाले जस्टिस श्रीराम कई सालों तक एक ऐसे एनजीओ में उपाध्यक्ष के तौर पर जुड़े रहे जो दिवंगत लोगों के लिए अंतिम संस्कार और श्राद्ध करने की व्यवस्था करता है.
जस्टिस के आर श्रीराम इसी वर्ष 27 सितंबर 2025 को अपने पद से सेवानिवृत होंगे.