जयपुर। राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव में देरी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह को अवमानना नोटिस जारी किए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसपी शर्मा की खंडपीठ ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को ये नोटिस जारी किए हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता की मौजूदगी रही, जिसके चलते सरकार को फिलहाल नोटिस नहीं दिया गया है।
हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए आयोग से पूछा है कि उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के कार्यक्रम के लिए तय समय सीमा से बाहर का आदेश कैसे जारी किया।
जानबूझकर टाल रहे चुनाव
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने याचिका दायर कर सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार और आयोग जानबूझकर चुनाव टाल रहे हैं, जो हाईकोर्ट के आदेश की सीधे तौर पर अवमानना है।
संयम लोढ़ा ने अदालत से कहा कि आयोग ने निकाय चुनाव के लिए 22 अप्रैल तक फाइनल मतदाता सूची जारी करने का कार्यक्रम तय किया है।
जबकि पूर्व में सरकार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी है कि वह 15 अप्रैल तक चुनाव कराएगी, ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा तय 15 अप्रैल की समय सीमा में अब चुनाव नहीं हो सकते।
सरकार चुनाव आगे बढ़ाना चाहती
गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा—सरकार चुनाव आगे बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र दायर करने जा रही है।
इस पर कोर्ट ने कहा—यह बाद की स्थिति है। फिलहाल चुनाव आयोग ने इस तरह का कार्यक्रम कैसे जारी कर दिया।
हाईकोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को 4 सप्ताह में जवाब देने को कहा है।
सरकार के बदले दावे
राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को प्रदेश में 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के आदेश दिए थे।
वहीं, सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा था।
इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई के समय सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य में 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के लिए कहा था।
राजस्थान सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में यह स्वीकार किया था कि वह 15 अप्रैल तक चुनाव कराएगी।