भर्ती विवाद में हाईकोर्ट ने दिए अंतरिम आदेश; पात्रता रखने वाले अभ्यर्थियों को प्रोविजनल रूप से साक्षात्कार में शामिल करने का निर्देश
जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा मेडिकल एजुकेशन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर (सुपर स्पेशियलिटी) पदों पर भर्ती से जुड़े विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत दी है।
जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की अवकाशकालीन विशेष एकलपीठ ने डॉ. प्रणव राजा यादव, दीपिका गहलोत और शिखा कुमारी मीणा की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि यदि याचिकाकर्ता साक्षात्कार की तिथि तक निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव रखते हैं तथा लिखित परीक्षा की मेरिट के आधार पर साक्षात्कार के लिए पात्र हैं, तो उन्हें प्रोविजनल रूप से साक्षात्कार में शामिल किया जाए।
साथ ही हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि इन अभ्यर्थियों का परिणाम कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना घोषित नहीं किया जाएगा और उसे सीलबंद लिफाफे में रखा जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा 22 अक्टूबर 2024 और 11 दिसंबर 2024 को जारी विज्ञापनों से जुड़ा है।
इन विज्ञापनों के जरिए राजस्थान चिकित्सा सेवा (महाविद्यालय शाखा) नियम, 1962 के तहत विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी।
इनमें यूरो-ऑन्कोलॉजी (Uro-Oncology) विषय के पद भी शामिल थे।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने निर्धारित शैक्षणिक योग्यता प्राप्त कर ली थी तथा आवश्यक अनुभव भी अर्जित कर लिया था, लेकिन आयोग ने उनकी उम्मीदवारी पर आपत्ति जताते हुए उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया।
डॉ. प्रणव राजा यादव की याचिका
अधिवक्ता तनवीर अहमद के जरिए दायर याचिका में डॉ. प्रणव राजा यादव ने कहा कि यूरो-ऑन्कोलॉजी एक नई सुपर स्पेशियलिटी है और इस विषय में पहली बार पद विज्ञापित किए गए हैं।
याचिका में दावा किया गया कि विज्ञापन में अनुभव संबंधी आवश्यकताओं को लेकर स्पष्ट उल्लेख नहीं था। साथ ही आयोग द्वारा ऑनलाइन आवेदन पत्र में कुछ सुधार करने की अनुमति भी दी गई थी।
याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्होंने समय रहते आवश्यक संशोधन कर दिए थे तथा परीक्षा और साक्षात्कार से पहले निर्धारित योग्यता एवं अनुभव दोनों प्राप्त कर लिए थे।
इसके बावजूद आरपीएससी ने 27 मई 2025 को उनकी उम्मीदवारी अस्वीकार कर दी।
याचिका में दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलीलों में कहा गया कि राजस्थान चिकित्सा सेवा (महाविद्यालय शाखा) नियम, 1962 के नियम 12 के अनुसार यदि कोई अभ्यर्थी साक्षात्कार की तिथि तक निर्धारित योग्यता रखता है, तो उसे चयन प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
चयन प्रक्रिया लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होती है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि वे लिखित परीक्षा में सफल होकर मेरिट सूची में साक्षात्कार के लिए पात्रता प्राप्त कर चुके हैं। इसलिए उन्हें साक्षात्कार से वंचित करना अनुचित होगा।
पूर्व के आदेश का भी दिया हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने एक पूर्व मामले का भी हवाला दिया, जिसमें समान प्रकृति के एक मामले में हाईकोर्ट ने 28 जनवरी 2025 को पारित आदेश के तहत अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में शामिल होने की अंतरिम अनुमति दी थी।
इसी आधार पर वर्तमान याचिकाओं में भी समान राहत देने का आग्रह किया गया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद पाया कि विवाद विचारणीय है और विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि नियम 1962 के नियम 12 के अनुसार साक्षात्कार के समय अभ्यर्थी के पास निर्धारित योग्यता होना आवश्यक माना गया है। ऐसे में प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं का मामला विचार करने योग्य प्रतीत होता है।
अंतरिम राहत, लेकिन परिणाम पर रोक
हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में राजस्थान लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया कि:
- यदि याचिकाकर्ता साक्षात्कार की तिथि तक संबंधित पद की निर्धारित योग्यता रखते हैं; और
- यदि वे लिखित परीक्षा की मेरिट के आधार पर साक्षात्कार के लिए पात्र हैं,
तो उन्हें प्रोविजनल आधार पर साक्षात्कार में शामिल किया जाए।
हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं का परीक्षा परिणाम न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना घोषित नहीं किया जाएगा।
परिणाम को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा जाएगा। यह अंतरिम आदेश याचिकाओं के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।
तीन याचिकाओं की एक साथ सुनवाई
हाईकोर्ट ने पाया कि डॉ. प्रणव राजा यादव, दीपिका गहलोत और शिखा कुमारी मीणा द्वारा दायर याचिकाओं में समान कानूनी प्रश्न शामिल हैं। इसलिए तीनों याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए एक साझा आदेश पारित किया गया।
हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार सहित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह बाद मामले की सुनवाई तय की है।