नई दिल्ली: देशभर में चल रहे बार काउंसिल चुनावों के बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को बड़ा झटका लगा है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी ने राज्य बार काउंसिलों में निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाने के बीसीआई के प्रस्ताव पर फिलहाल रोक लगा दी है।
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने कहा कि मौजूदा चुनाव प्रक्रिया के दौरान सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई जा सकती।
समिति के मुताबिक, कई राज्यों में चुनाव पूरे हो चुके हैं और कुछ जगह नतीजे भी घोषित हो चुके हैं। ऐसे में यह फैसला कानून और सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए आदेशों के अनुरूप नहीं है।
समिति ने सभी हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटियों और रिटर्निंग ऑफिसरों को निर्देश दिया है कि वे बीसीआई के 19 जुलाई के प्रस्ताव और 21 जुलाई को जारी पत्र पर फिलहाल कोई कार्रवाई न करें।
साथ ही मतगणना पहले से तय प्रक्रिया के अनुसार ही जारी रखने को कहा गया है।
BCI ने क्या फैसला लिया था?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 19 जुलाई 2026 को एक प्रस्ताव पास किया था, जिसके तहत राज्य बार काउंसिलों में सीटों की संख्या बढ़ाने की बात कही गई थी।
इसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए राज्य बार काउंसिलों में निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाए।
बीसीआई का कहना था कि पहले से चुने गए उम्मीदवारों की सीटें कम नहीं की जाएंगी। उनकी जगह बरकरार रहेगी और महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें जोड़कर कुल संख्या बढ़ा दी जाएगी।
यानी मौजूदा सीटों में कटौती किए बिना महिलाओं के लिए अनुपात के हिसाब से नई सीटें बनाई जाएंगी।
समिति ने रोक क्यों लगाई?
हाई पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी ने कहा कि मौजूदा बार काउंसिल चुनाव एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत तय सीटों के आधार पर कराए जा रहे हैं।
ऐसे में चुनाव शुरू होने और कई राज्यों में नतीजे घोषित होने के बाद सीटों की संख्या बढ़ाना कानून के अनुरूप नहीं होगा।
समिति ने अपने आदेश में कहा कि बीसीआई का प्रस्ताव न सिर्फ मौजूदा चुनावों पर लागू कानूनों के खिलाफ है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के 8 दिसंबर 2025 के आदेश का भी सीधा उल्लंघन करता है।
समिति ने यह भी कहा कि बीसीआई ने अपने प्रस्ताव में रिटर्निंग ऑफिसरों और सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटियों को निर्देश देने की कोशिश की है, जबकि चुनाव कराने और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी पहले से सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय व्यवस्था के तहत चल रही है।
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समिति के निर्देश
इन्हीं कारणों से समिति ने सभी हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटियों और रिटर्निंग ऑफिसरों को निर्देश दिया कि वे 19 जुलाई के बीसीआई प्रस्ताव और 21 जुलाई को जारी उससे जुड़े पत्र पर फिलहाल कोई कार्रवाई न करें।
समिति ने यह भी कहा कि मतगणना 9 फरवरी 2026 के आदेश में तय प्रक्रिया के अनुसार ही जारी रहेगी।
इसके अलावा, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रधान सचिव को निर्देश दिया गया है कि समिति का यह आदेश सभी हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटियों और रिटर्निंग ऑफिसरों तक पहुंचाया जाए और इसके पालन की रिपोर्ट समिति के सामने पेश की जाए।
BCI की दलील
सुनवाई के दौरान बीसीआई के अतिरिक्त सचिव अवनीश पांडे ने समिति को बताया कि 19 जुलाई का फैसला फिलहाल सिर्फ एक प्रस्ताव है। इसे कानून के तहत जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही लागू किया जाएगा।
समिति ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि अगर यह केवल एक प्रस्ताव है, तो जरूरी मंजूरी मिलने और सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना इसे लागू नहीं किया जा सकता।
समिति ने यह भी कहा कि बार काउंसिल से जुड़े कई मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। ऐसे में कोर्ट की मंजूरी के बिना इस प्रस्ताव पर अमल नहीं किया जा सकता।
फिलहाल समिति ने सभी हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटियों और रिटर्निंग ऑफिसरों को निर्देश दिया कि वे 19 जुलाई के प्रस्ताव और 21 जुलाई को जारी उससे जुड़े पत्र पर फिलहाल कोई कार्रवाई न करें। साथ ही मतगणना पहले से तय प्रक्रिया के अनुसार ही जारी रखने को कहा गया है।
महिला प्रतिनिधित्व पर समिति की राय
बीसीआई का कहना था कि सीटों की संख्या बढ़ाने का मकसद सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का पालन करना है, जिसमें बार काउंसिलों में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई थी।
हालांकि, समिति ने कहा कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व जरूरी है, लेकिन चल रही चुनाव प्रक्रिया के बीच सीटों की संख्या नहीं बढ़ाई जा सकती। इसके लिए पहले कानून के तहत जरूरी मंजूरी और सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेनी होगी।
समिति ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रधान सचिव को भी निर्देश दिया कि यह आदेश सभी हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटियों और रिटर्निंग ऑफिसरों तक तुरंत पहुंचाया जाए। साथ ही इसके पालन की रिपोर्ट भी समिति के सामने पेश की जाए।
गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि अगर बार काउंसिलों में सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए। इसी आधार पर बीसीआई ने सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन समिति ने साफ कर दिया कि मौजूदा चुनाव प्रक्रिया में इसे लागू नहीं किया जा सकता।
