मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर MTP की इजाजत, अस्पताल को सुरक्षित प्रक्रिया अपनाने और भ्रूण सुरक्षित रखने के निर्देश
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म की शिकार एक नाबालिग पीड़िता को बड़ी राहत देते हुए उसकी 23 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था समाप्त (Termination of Pregnancy) करने की अनुमति दी है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेडिकल बोर्ड द्वारा जोखिम बताए जाने के बावजूद, कानून के तहत आवश्यक सहमति और चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए गर्भसमापन किया जा सकता है।
जस्टिस शुभा मेहता की एकलपीठ ने यह आदेश कोटा जिले की एक दुष्कर्म पीड़िता के 65 वर्षीय पिता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिका में बताया गया कि दुष्कर्म की घटना के परिणामस्वरूप नाबालिग गर्भवती हो गई और वह मानसिक एवं शारीरिक आघात के कारण गर्भ को आगे जारी नहीं रखना चाहती।
पीड़िता और उसके पिता दोनों ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) के लिए अपनी सहमति व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट से अनुमति देने की गुहार लगाई।
23 सप्ताह से अधिक का गर्भ
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष जे.के. लोन मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल, कोटा के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पेश की गई।
रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता जांच के दिन 23 सप्ताह और 1 दिन की गर्भवती थी।
बोर्ड ने कहा कि इस चरण में गर्भ समाप्त करना पीड़िता और भ्रूण दोनों के लिए उच्च जोखिम वाला होगा, लेकिन पीड़िता एवं उसके पिता ने हर हाल में गर्भ समाप्त करने का अनुरोध किया।
पीड़िता की मानसिक स्थिति को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने गर्भसमापन की अनुमति देते हुए अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया कि पूरी प्रक्रिया सुरक्षित चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप की जाए।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि गर्भसमापन से पहले पीड़िता और उसके संरक्षक से निर्धारित जोखिमों के संबंध में आवश्यक सहमति ली जाए।
हाईकोर्ट के आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में अस्पताल प्रशासन को कई अहम निर्देश दिए।
जिसमें गर्भसमापन सुरक्षित एवं चिकित्सकीय मानकों के अनुसार करने तथा भ्रूण (Fetus) को भविष्य में डीएनए जांच के लिए सुरक्षित (Preserve) रखने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने कहा कि पीड़िता को गर्भसमापन से पहले और बाद में सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं, पोषण और देखभाल उपलब्ध कराई जाए।
पहचान गुप्त रखने और निःशुल्क उपचार
पूरी चिकित्सा प्रक्रिया निःशुल्क उपलब्ध कराने और पीड़िता की पहचान हर स्तर पर गुप्त रखने के आदेश दिए गए हैं।
पीड़िता को राजस्थान पीड़ित मुआवजा योजना के तहत उपलब्ध कानूनी अधिकारों के अनुसार मुआवजा प्राप्त करने की स्वतंत्रता भी दी गई है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़िता के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे तत्काल अस्पताल प्रशासन से समन्वय स्थापित कर निर्धारित समय पर पीड़िता को अस्पताल में पेश करें। साथ ही संबंधित अस्पताल को तीन दिन के भीतर गर्भसमापन की प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए गए हैं।
