सीजेआई कार्यक्रम और राष्ट्रीय लोक अदालत के बाद हाईकोर्ट प्रशासन एक्टिव, वरिष्ठता और परफॉर्मेंस के आधार पर तैयार हो रही सूची
जयपुर। प्रदेश की न्यायपालिका में बड़े स्तर पर तबादलों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक 15 मई से पहले ही जंबो ट्रांसफर लिस्ट जारी हो सकती है, जिससे पूरे राजस्थान के न्यायिक ढांचे में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे।
सीजेआई के हालिया कार्यक्रम और राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के बाद अब राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन पूरी तरह ट्रांसफर प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुट गया है।
आवेदन से लेकर स्क्रूटनी तक-पूरी प्रक्रिया तेज
हाईकोर्ट प्रशासन ने दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में ही ट्रांसफर पॉलिसी के तहत स्वैच्छिक तबादलों के लिए आवेदन आमंत्रित कर दिए थे। इसके तहत प्रदेशभर के न्यायिक अधिकारियों ने 15 जनवरी 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से अपने आवेदन जमा कर दिए।
इन आवेदनों में अधिकारियों को अपनी वर्तमान पोस्टिंग, कार्यकाल, मामलों के निस्तारण का प्रतिशत, लंबित मामलों की स्थिति, अवकाश विवरण और पूर्व पोस्टिंग का पूरा रिकॉर्ड देना अनिवार्य किया गया था।
अब इन सभी आवेदनों और प्रतिनिधित्वों (Representations) की गहन स्क्रूटनी के बाद फाइनल रिकॉर्ड प्रशासनिक कमेटी के सामने रखा जा रहा है। अंतिम निर्णय मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी के बाद ही सूची जारी होगी।
वरिष्ठता बनेगी सबसे बड़ा आधार
सूत्रों के अनुसार इस बार तबादलों में वरिष्ठता को प्रमुख आधार बनाया जा रहा है। हाल ही में कई जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के रिटायरमेंट और आगामी सेवानिवृत्तियों को देखते हुए बड़े पैमाने पर पदों का पुनर्संतुलन किया जाएगा।
यानी कई जिलों में नए जिला एवं सत्र न्यायाधीश (DJ) की नियुक्ति और स्थानांतरण तय माना जा रहा है।
दूरस्थ क्षेत्रों में भी होंगे नए पोस्टिंग आदेश
इस बार की सबसे बड़ी कार्रवाई जयपुर और जोधपुर जैसे प्रमुख केंद्रों पर देखने को मिल सकती है। लंबे समय से एक ही स्थान पर टिके न्यायिक अधिकारियों को अब हटाने की तैयारी है।
सूत्र बताते हैं कि कई अधिकारी 10 से 12 वर्षों से जयपुर और आसपास जमे हुए हैं, कई अधिकारी डेपुटेशन पर भी लगातार राजधानी में ही कार्यरत हैं, वहीं दूसरी ओर कई अधिकारी वर्षों से दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों में ही तैनात हैं
ऐसे में प्रशासन संतुलन बनाने के लिए बड़े स्तर पर रवानगी की योजना बना रहा है।
ट्रांसफर लिस्ट में उन अधिकारियों को प्राथमिकता दी जा सकती है जो लंबे समय से एक ही जगह पर कार्यरत हैं। उन्हें अब दूरस्थ जिलों में भेजा जा सकता है, जबकि दूर-दराज में कार्य कर रहे अधिकारियों को राहत मिल सकती है।
क्या कहती है ट्रांसफर पॉलिसी?
हाईकोर्ट की ट्रांसफर पॉलिसी के अनुसार पहले स्वैच्छिक आवेदन लिए जाते हैं, फिर प्रदर्शन, वरिष्ठता और प्रशासनिक आवश्यकता को देखा जाता है, इसके बाद प्रशासनिक समिति अंतिम सूची तैयार करती है और अंत में मुख्य न्यायाधीश की स्वीकृति से आदेश जारी होते हैं
संभावित तबादलों को लेकर न्यायिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कई अधिकारी अपनी संभावित पोस्टिंग को लेकर कयास लगा रहे हैं, वहीं कुछ अधिकारी अपने स्थानांतरण को लेकर सक्रिय भी हो गए हैं।