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IRS धर्मराज को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सेवा से हटाने की आशंका पर सजा पर रोक, 13 अप्रैल को हुए थे निलबिंत

Rajasthan High Court Stays Conviction of IRS Officer Dharamraj Amid Pending Appeal

19 साल की उम्र में UPSC तैयारी के दौरान दर्ज हुआ था मामला, IRS बनने के बाद शाहपुरा कोर्ट ने सुनाई थी 3 साल की सजा, सजा के बावजूद कोर्ट ने माना-सेवा से हटाने का खतरा, अपूरणीय नुकसान का आधार

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी धर्मराज को बड़ी राहत देते हुए उनकी दोषसिद्धि (conviction) पर रोक लगा दी है।

जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने IRS धर्मराज के खिलाफ शाहपुरा ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि (conviction) पर रोक लगा दी है।

यह आदेश उस समय आया है जब धर्मराज की अपील पहले से लंबित है और उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी जारी थी, जिसके परिणामस्वरूप हाल ही में निलंबित किया जा चुका था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाती, तो इससे याचिकाकर्ता को ऐसा अपूरणीय नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई बाद में संभव नहीं होगी।

हाईकोर्ट ने न्यायिक विवेक का उपयोग करते हुए इस मामले को “विशेष परिस्थितियों” के अंतर्गत माना और राहत प्रदान की।

जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने IRS के अधिकारी धर्मराज की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिया हैं.

क्या है पूरा मामला

यह मामला वर्ष 2007 की एक घटना से जुड़ा हुआ है, जब याचिकाकर्ता एक 19 साल के युवा थे और उन पर परिवार के आपस में हुए झगड़े में दंगे में शामिल होने का आरोप लगा. ?

इसी दौरान धर्मराज यूपीएससी की तैयारी भी कर रहे थे.

जिसमें धर्मराज को अन्य आरोपियों के साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 147 (दंगा), 447 (अवैध प्रवेश), 325/149 (गंभीर चोट) और 323/149 (साधारण चोट) के तहत आरोपी बनाया गया था।

इस मामले में भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (Additional Sessions Judge) ने 16 अगस्त 2018 को फैसला सुनाते हुए धर्मराज को दोषी करार दिया और उन्हें अधिकतम तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।

हालांकि, इस फैसले के खिलाफ धर्मराज ने उसी वर्ष राजस्थान हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की, जिसे 5 सितंबर 2018 को स्वीकार कर लिया गया।

साथ ही, अदालत ने उनकी सजा के क्रियान्वयन (execution of sentence) पर रोक लगा दी, जिससे उन्हें जेल जाने से राहत मिल गई।?

हालांकि, दोषसिद्धि बरकरार रहने के कारण उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू हो गई।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 13 अप्रैल 2026 को उन्हें निलंबित कर दिया गया। ऐसे में उन्होंने हाईकोर्ट से दोषसिद्धि पर भी रोक लगाने की मांग की।

IRS अधिकारी बनने के बाद बढ़ी जटिलता

मामले की विशेषता यह है कि धर्मराज न केवल एक आम आरोपी हैं, बल्कि वे भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी हैं और वर्तमान में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं।

धर्मराज वर्तमान में भारतीय राजस्व सेवा में अतिरिक्त आयुक्त (Additional Commissioner) के पद पर कार्यरत हैं और कोलकाता में तैनात हैं।

उनकी नियुक्ति और सेवा का स्तर इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना देता है।

याचिका में बताया गया कि अपील लंबित रहने के बावजूद दोषसिद्धि का प्रभाव उनके सेवा जीवन पर पड़ रहा था। विभाग ने इस मामले को आधार बनाते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी थी।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 13 अप्रैल 2026 को भारत सरकार के राजस्व विभाग (Ministry of Finance) ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

याचिकाकर्ता की दलीलें

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण तर्क रखे।

डॉ सचिन आचार्य ने दलील दी कि घटना के समय धर्मराज मात्र 19 वर्ष के थे और UPSC की तैयारी कर रहे थे। बाद में वे भारतीय राजस्व सेवा में चयनित हुए।

उन्होंने यह भी दलील दी कि धर्मराज को इस मामले में चार साल बाद धारा 319 CrPC के तहत अतिरिक्त आरोपी के रूप में जोड़ा गया।

साथ ही उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और न ही यह मामला नैतिक अधमता (moral turpitude) से जुड़ा है।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि अपील की सुनवाई निकट भविष्य में संभव नहीं है, जबकि विभागीय कार्रवाई के चलते उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है, जिससे उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।

राज्य पक्ष का विरोध

राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत पक्ष ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि दोषसिद्धि पर रोक लगाना एक असाधारण उपाय है और इसे केवल विशेष परिस्थितियों में ही लागू किया जाना चाहिए।

राज्य ने तर्क दिया कि इस मामले में ऐसे कोई विशेष तथ्य नहीं हैं, जो इस राहत को उचित ठहराते हों।

हाईकोर्ट का फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें नवजोत सिंह सिद्धू बनाम पंजाब राज्य, अफजल अंसारी केस और राहुल गांधी केस शामिल हैं।

इन फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि अपीलीय अदालतों के पास दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अधिकार है, लेकिन इसका प्रयोग केवल दुर्लभ मामलों में ही किया जाना चाहिए, जहां बिना रोक के गंभीर और अपूरणीय परिणाम सामने आ सकते हैं।

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि

अपील पहले से लंबित है और सजा के क्रियान्वयन पर रोक दी जा चुकी है। अपील की सुनवाई में समय लग सकता है। जबकि विभागीय कार्रवाई के चलते याचिकाकर्ता को सेवा से हटाया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि यदि बाद में अपील में बरी हो जाते हैं, तो उन्हें हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं होगी। घटना पुरानी है (2007 की) और उस समय याचिकाकर्ता युवा थे।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने इसे एक विशेष परिस्थिति माना।

दोषसिद्धि पर रोक का आदेश

अंततः हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा 16 अगस्त 2018 को सुनाई गई दोषसिद्धि पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि अपील के अंतिम निर्णय तक यह रोक प्रभावी रहेगी।

इस आदेश के साथ ही धर्मराज को विभागीय कार्रवाई के तत्काल प्रभावों से राहत मिल गई है, हालांकि अंतिम फैसला अपील के निपटारे पर निर्भर करेगा।

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