जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट परिसर में लगे कॉनोकार्पस (Conocarpus) पेड़ों को हटाने की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने गंभीर चिंता जताई है।
इस संबंध में राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष को अधिवक्ताओं की ओर से विस्तृत प्रतिनिधित्व सौंपा गया है, जिसमें इन पेड़ों से होने वाले संभावित स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट मुख्यपीठ के अधिवक्ता दुर्गेश खत्री, नवनीत सिंह बिर्ख, प्रियंका बोराणा, सुभाष चौधरी, श्रीराम चौधरी, विक्रम सिंह, नंदीपना सहित अधिवक्ताओं ने बार को दिए प्रतिवेदन में कहा है कि हाईकोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में कॉनोकार्पस पेड़ लगाए गए हैं, जो भले ही सजावटी और तेजी से बढ़ने वाले पेड़ माने जाते हों, लेकिन इनके कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका है।
प्रतिवेदन में कहा गया कि इन पेड़ों से निकलने वाला पराग (pollen) और अन्य कण सांस संबंधी बीमारियों, एलर्जी और अस्थमा जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।

केंद्रीय सशक्त समिति की रिपोर्ट का हवाला
अधिवक्ताओं ने अपने प्रतिवेदन के साथ केंद्रीय सशक्त समिति (Central Empowered Committee) की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया है, जिसमें भारत में कॉनोकार्पस प्रजाति से जुड़े पर्यावरणीय और पारिस्थितिक खतरों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत करने की बात कही गई है।
स्वास्थ्य पर गंभीर असर की आशंका
प्रतिनिधित्व में यह भी बताया गया है कि हाईकोर्ट परिसर में प्रतिदिन हजारों अधिवक्ता, वादकारी और कर्मचारी लंबे समय तक कार्य करते हैं।
ऐसे में यदि वातावरण प्रदूषित या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, तो इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। विशेष रूप से अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति और अधिक चिंताजनक बताई गई है।

अधिवक्ताओं ने यह भी उल्लेख किया कि देश के कुछ राज्यों, जैसे गुजरात, ने कॉनोकार्पस पेड़ों के रोपण पर प्रतिबंध या सीमाएं लगाई हैं।
इन राज्यों में किए गए पर्यावरणीय अध्ययनों में पाया गया कि यह प्रजाति अत्यधिक भूजल का उपयोग करती है और इसके पराग कण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
प्रतिवेदन में अधिवक्ताओं ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं, जिसमें हाईकोर्ट परिसर में लगे कॉनोकार्पस पेड़ों का वैज्ञानिक और पर्यावरणीय मूल्यांकन कराने, पेड़ों के आगे रोपण पर तत्काल रोक लगाने, चरणबद्ध तरीके से इन पेड़ों को हटाकर उनकी जगह पर्यावरण के अनुकूल और स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगाने और परिसर में सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कराने की मांग की है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा
प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया है कि यह केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल सुरक्षा का भी गंभीर विषय है।
अधिवक्ताओं ने इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि लॉयर्स एसोसिएशन को संबंधित प्राधिकरणों के साथ इस मुद्दे को तत्काल उठाना चाहिए।
बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं का समर्थन
दिए गए प्रतिवेदन में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर भी संलग्न किए गए हैं, जो इस मुद्दे पर व्यापक समर्थन को दर्शाते हैं।
