जयपुर। इंडियन क्रिकेटर्स एसोसिएशन (ICA) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की एपेक्स बॉडी में महिला प्रतिनिधि के रूप में एडवोकेट सुमति दवे बिश्नोई को नामित किया है।
यह नियुक्ति ICA की नामांकन नीति के तहत की गई है और इससे राज्य क्रिकेट प्रशासन में महिला भागीदारी को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
ICA के सचिव वेंकट्टु (वेंकट) सुंदरम द्वारा RCA को भेजे गए आधिकारिक पत्र में इस नामांकन की जानकारी दी गई।
पत्र में बताया गया कि ICA, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा मान्यता प्राप्त पूर्व क्रिकेटरों का आधिकारिक संगठन है और उसे BCCI के एपेक्स काउंसिल, IPL गवर्निंग काउंसिल तथा राज्य क्रिकेट संघों की एपेक्स बॉडी में प्रतिनिधियों को नामित करने का अधिकार प्राप्त है।
चुनाव में नहीं भरे गए थे नामांकन
ICA के अनुसार वर्ष 2025 में हुए ICA के आम चुनाव (15-16 अक्टूबर 2025) के दौरान राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की एपेक्स बॉडी में पुरुष और महिला प्रतिनिधि पद के लिए कोई नामांकन प्राप्त नहीं हुआ था। इस कारण यह पद रिक्त रह गया था।
इसके बाद ICA के निदेशक मंडल ने 18 मार्च 2022 की नामांकन नीति के तहत इस पद को भरने की प्रक्रिया शुरू की।
ICA ने अपने सदस्यों और आसपास के क्रिकेट संघों के सदस्यों से आवेदन आमंत्रित किए, जिसके बाद सुमति दवे बिश्नोई को महिला प्रतिनिधि के रूप में चयनित किया गया।
तुरंत शामिल करने के निर्देश
ICA ने RCA को निर्देश दिया है कि सुमति दवे बिश्नोई को तत्काल प्रभाव से एपेक्स बॉडी के कार्यों में शामिल किया जाए।
साथ ही उन्हें संविधान के अनुसार एपेक्स बॉडी के सदस्य के रूप में सभी अधिकार, कर्तव्य और विशेषाधिकार प्रदान किए जाएं।
महिला भागीदारी को मिलेगा बढ़ावा
इस नियुक्ति से राज्य क्रिकेट प्रशासन में महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलेगा और निर्णय प्रक्रिया में विविधता आएगी।
क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता और संतुलन सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कदम अहम माने जा रहे हैं।
ICA ने जताई सहयोग की उम्मीद
ICA ने अपने पत्र में RCA के साथ सकारात्मक और सहयोगात्मक संबंध बनाए रखने की उम्मीद जताई है। संगठन का कहना है कि यह नियुक्ति क्रिकेट प्रशासन को और अधिक मजबूत एवं समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कौन हैं एडवोकेट सुमति दवे बिश्नोई
राजस्थान के विधि जगत में एक सशक्त और सम्मानित नाम के रूप में पहचान बना चुकी एडवोकेट सुमति दवे बिश्नोई का व्यक्तित्व बहुआयामी उपलब्धियों से भरा हुआ है।
वे न केवल राजस्थान हाईकोर्ट की वरिष्ठ महिला अधिवक्ता हैं, बल्कि खेल, सामाजिक सेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।

सुमति दवे बिश्नोई ने वर्ष 1988 में राजस्थान विश्वविद्यालय से विधि स्नातक (लॉ ग्रेजुएट) की उपाधि प्राप्त करने के साथ ही अपने विधिक करियर की शुरुआत की।
प्रारंभिक दो वर्षों (1988–1990) तक उन्होंने जयपुर सेशन कोर्ट में वकालात की और इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की, जहां वे पिछले तीन दशकों से अधिक समय से सक्रिय रूप से सेवाएं दे रही हैं।
अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण संस्थाओं के लिए कानूनी परामर्शदाता (काउंसिल) के रूप में कार्य किया है।
इनमें राजस्थान विश्वविद्यालय, राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC), जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA), कृषि उपज मंडी और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। वर्तमान में वे राजस्थान हाईकोर्ट में केंद्र सरकार की अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

कानून, खेल और समाज सेवा का प्रेरक संगम
सुमति दवे बिश्नोई का योगदान केवल अदालत तक सीमित नहीं है।
वे महिला संबंधी मामलों में हाईकोर्ट की आंतरिक समिति की सदस्य रह चुकी हैं और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) की विभिन्न समितियों में भी अपनी भूमिका निभा चुकी हैं।
एक प्रशिक्षित मध्यस्थ (Mediator) होने के नाते वे कई मामलों में मध्यस्थता प्रक्रिया का हिस्सा रही हैं, जिससे न्यायिक विवादों के समाधान में तेजी और सहमति का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी उल्लेखनीय है।
वे “शिकॉय डिकोय” नामक एनजीओ की बोर्ड सदस्य हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कई सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
इसके अलावा, वे जयपुर के गणगौरी बाजार स्थित ब्लाइंड स्कूल से पिछले चार दशकों से जुड़ी हुई हैं, जहां वे निरंतर सेवा और सहयोग प्रदान कर रही हैं।
महिला अधिकारों और अधिवक्ताओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वे राजस्थान वीमेन लॉयर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष रह चुकी हैं और इस मंच के माध्यम से महिला अधिवक्ताओं के हितों की आवाज बुलंद की है।
राजस्थान महिला क्रिकेट टीम की कैप्टन
खेल के क्षेत्र में भी सुमति दवे बिश्नोई का योगदान प्रेरणादायक रहा है। वर्ष 1979 से 1990 तक वे राजस्थान की महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा रहीं, जहां उन्होंने सीनियर और जूनियर दोनों स्तरों पर खेला।
उन्होंने लगभग आठ राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया और 1983–84 में राजस्थान महिला क्रिकेट टीम की कप्तान भी रहीं।
इसके अलावा उन्होंने इंटर यूनिवर्सिटी, इंटर जोनल और सेंट्रल जोनल प्रतियोगिताओं में भी सक्रिय भागीदारी निभाई।

उनकी खेल यात्रा में रानी झांसी क्रिकेट प्रतियोगिता और जूनियर इंडियन कैंप, ग्वालियर में भागीदारी भी शामिल है।
खेल प्रशासन में भी वे सक्रिय रहीं और राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की महिला चयन समिति की सदस्य के रूप में कार्य किया।
साथ ही वे राजस्थान महिला क्रिकेट टीम (सीनियर और जूनियर) की मैनेजर के रूप में कई प्रतियोगिताओं में टीम का नेतृत्व और मार्गदर्शन कर चुकी हैं।
कुल मिलाकर, एडवोकेट सुमति दवे बिश्नोई का जीवन संघर्ष, समर्पण और बहुमुखी प्रतिभा का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उन्होंने कानून, खेल और समाज सेवा—तीनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाकर नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत प्रस्तुत किया है।
