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महिला कर्मचारी का 500 किलोमीटर दूर ट्रांसफर करने पर राजस्थान हाईकोर्ट गंभीर, विभाग को 60 दिन में निर्णय लेने के निर्देश

Rajasthan High Court Expresses Concern Over Transfer of Woman Employee 500 Km Away, Directs Department to Decide Representation Within 60 Days

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के दूरस्थ ट्रांसफर से जुड़ी परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला कर्मचारी को राहत देते हुए निर्देश दिया कि वह 15 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करे।

साथ ही विभाग को भी आदेश दिया है कि वह महिला कर्मचारी के प्रतिवेदन पर हर हाल में 60 दिन में निर्णय ले।

जस्टिस कुलदीप माथुर ने यह आदेश महिला कर्मचारी अनुराधा सोनी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के दूरस्थ ट्रांसफर को लेकर कहा कि महिला कर्मचारियों को उनके मूल निवास से अत्यधिक दूर स्थानों पर स्थानांतरित किए जाने से उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

पशुपालन विभाग में कार्यरत हैं याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता अनुराधा सोनी, जो पशुपालन विभाग में कार्यरत हैं, ने अपने तबादले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

याचिका में कहा गया कि उनका ट्रांसफर उदयपुर से अलवर कर दिया गया है, जो उनके मूल निवास से 500 किलोमीटर से अधिक दूरी पर है। इससे उनके पारिवारिक जीवन और दैनिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है।

याचिका में अनुराधा सोनी ने विभाग द्वारा जारी 27 मार्च 2026, 17 अप्रैल 2026 और 20 अप्रैल 2026 के आदेशों को निरस्त करने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि उन्हें उनके मूल पदस्थापन स्थान पर कार्य जारी रखने की अनुमति दी जाए।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने पक्ष रखते हुए कहा कि सामान्यतः महिला कर्मचारियों को उनके निवास स्थान से अत्यधिक दूर नहीं भेजा जाना चाहिए, ताकि उन्हें और उनके परिवार को न्यूनतम असुविधा हो।

उन्होंने अदालत से तबादला आदेश पर रोक लगाने का आग्रह किया।

हाईकोर्ट का आदेश

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया तबादला आदेश किसी वैधानिक प्रावधान का उल्लंघन या दुर्भावनापूर्ण प्रतीत नहीं होता।

हालांकि अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि महिला कर्मचारी को 500 किलोमीटर दूर स्थानांतरित करना उसके पारिवारिक जीवन को प्रभावित कर सकता है।

इसी आधार पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए निर्देश दिया कि वह 15 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करे।

हाईकोर्ट ने पशुपालन विभाग को निर्देशित किया कि यदि याचिकाकर्ता प्रतिवेदन प्रस्तुत करती हैं, तो विभाग उस पर यथाशीघ्र, अधिमानतः 60 दिनों के भीतर निर्णय ले।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल याचिकाकर्ता की शिकायतों के शीघ्र निस्तारण के उद्देश्य से दिया गया है और इसे किसी विशेष तरीके से निर्णय लेने का निर्देश नहीं माना जाए।

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