जयपुर। जयपुर नगर निगम मुख्यालय में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब अदालत के आदेश पर नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा की कुर्सी कुर्क करने के लिए कोर्ट टीम निगम मुख्यालय पहुंच गई।
यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट के वर्ष 2013 में दिए गए आदेश की करीब 13 साल तक पालना नहीं किए जाने से जुड़ा हुआ है।
अदालत की इस कार्रवाई ने नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, चंद्रकांत नागर बनाम जेडीए एवं अन्य मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने 26 सितंबर 2013 को नगर निगम को संबंधित भूमि का आवंटन पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे।
कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट कहा था कि नियमानुसार राशि जमा कराने के बाद परिवादी को छह महीने के भीतर भूमि आवंटित की जाए। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन ने वर्षों तक आदेश की पालना नहीं की।
लगातार आदेशों की अनदेखी के बाद मामला निष्पादन न्यायालय पहुंचा।
ACJM-1 जयपुर महानगर प्रथम कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए नगर निगम आयुक्त की कुर्सी कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए।
कोर्ट ने कहा कि बार-बार अवसर देने के बावजूद नगर निगम ने न तो आदेश की पालना की और न ही संतोषजनक जवाब प्रस्तुत किया।
अदालत ने इसे न्यायालय के आदेशों की अवमानना के समान माना।
शुक्रवार को सेल अमीन बाबूलाल शर्मा, डिक्रीदार रश्मिकांत नागर और अधिवक्ता संजय शर्मा नगर निगम मुख्यालय पहुंचे।
वहां आयुक्त कार्यालय में कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
अचानक हुई इस कार्रवाई से निगम अधिकारियों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कोर्ट अधिकारियों ने कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई भी पूरी की।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, परिवादी की ओर से भारतीय स्टेट बैंक की हाईकोर्ट शाखा में विस्तारित बैंक गारंटी भी जमा कराई जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद नगर निगम ने आवंटन प्रक्रिया पूरी नहीं की।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि नगर निगम अधिकारियों द्वारा न्यायालय के निर्देशों की लगातार अवहेलना की गई है।
न्यायालय ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि सरकारी विभाग न्यायालय के आदेशों की पालना नहीं करते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कुर्की जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
इसी आधार पर अदालत ने नगर निगम आयुक्त की कुर्सी कुर्क कर पालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।