बार कार्यालय, अधिवक्ताओं के चैंबर्स, कैंटीन और पार्किंग व्यवस्था का लिया जायजा; नए सत्र से पहले बड़े सुधारों के संकेत
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ में ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले अंतिम कार्यदिवस पर हाईकोर्ट बिल्डिंग कमेटी के सदस्य न्यायाधीशों ने पूरे कोर्ट परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान परिसर में फैली गंदगी, अव्यवस्थित पार्किंग और अधिवक्ताओं के चैंबर्स की खराब स्थिति को देखकर जजों ने नाराजगी जताई।

हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सुदेश बंसल, जस्टिस अनुप कुमार ढंड और जस्टिस समीर जैन ने बुधवार को संयुक्त रूप से हाईकोर्ट परिसर का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन कार्यालय, चैंबर ए, बी और नए डी चैंबर्स सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान जजों ने गोल कैंटीन से लेकर गेट नंबर-5 के आसपास तक फैली अव्यवस्था को गंभीरता से देखा।
विशेष रूप से दुपहिया वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग और लंबे समय से बंद पड़े स्पोर्ट्स रूम की स्थिति पर भी असंतोष व्यक्त किया गया।

सबसे अधिक नाराजगी अधिवक्ताओं की कैंटीन और उसके आसपास फैली गंदगी को लेकर दिखाई दी।
जजों ने कैंटीन परिसर में साफ-सफाई की खराब व्यवस्था पर चिंता जताते हुए संबंधित व्यवस्थाओं को सुधारने की आवश्यकता बताई।
इसके अलावा अधिवक्ताओं के चैंबर्स की सीढ़ियों और दीवारों पर फैली गंदगी को लेकर भी न्यायाधीशों ने कड़ी नाराजगी जाहिर की।

निरीक्षण के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव दीपेश शर्मा भी मौजूद रहे।
दोनों पदाधिकारियों ने न्यायाधीशों के समक्ष अधिवक्ताओं से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और आवश्यकताओं को रखा।
बार एसोसिएशन की ओर से नए चैंबर्स के निर्माण, अधिवक्ताओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा वर्तमान कैंटीन व्यवस्था में सुधार के लिए नए भवन के निर्माण की मांग भी रखी गई।

इसके अलावा परिसर में सफाई, बैठने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के सुझाव भी दिए गए।
सूत्रों के अनुसार, ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नए न्यायिक सत्र से पहले हाईकोर्ट बिल्डिंग कमेटी कई महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा कराने की दिशा में कदम उठा सकती है।

निरीक्षण के बाद यह संकेत मिले हैं कि परिसर की साफ-सफाई, पार्किंग व्यवस्था और अधिवक्ताओं की सुविधाओं में व्यापक सुधार किए जा सकते हैं।
हाईकोर्ट परिसर के इस औचक निरीक्षण को न्यायिक व्यवस्था और अधिवक्ताओं के कार्य वातावरण को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

