जयपुर। राजस्थान न्यायिक अकादमी में वर्ष 2026-27 में चयनित न्यायिक मजिस्ट्रेटों के लिए आयोजित एक वर्षीय प्रशिक्षण शिविर का भव्य उद्घाटन समारोह बुधवार को न्यायिक अकादमी में आयोजित किया गया।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विजय बिश्नोई रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने की।
वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस डॉ. पी.एस. भाटी एवं जस्टिस वीनीत माथुर मौजूद रहे।

समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस विजय बिश्नोई ने कहा कि न्यायिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने नवचयनित न्यायिक अधिकारियों से निष्पक्षता, संवेदनशीलता और संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में जनता का विश्वास बनाए रखना प्रत्येक न्यायिक अधिकारी का सर्वोच्च कर्तव्य है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने प्रशिक्षण शिविर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण नवचयनित मजिस्ट्रेटों को न्यायिक प्रक्रिया, विधिक सिद्धांतों और न्यायिक आचरण की व्यावहारिक समझ प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि एक सक्षम और संवेदनशील न्यायिक अधिकारी ही न्याय व्यवस्था को मजबूत बना सकता है।
विशिष्ट अतिथि जस्टिस डॉ. पी.एस. भाटी और जस्टिस वीनीत माथुर ने भी अपने संबोधन में न्यायिक सेवा में अनुशासन, अध्ययनशीलता और नैतिक मूल्यों के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को निरंतर सीखते रहने और न्यायिक दायित्वों के निर्वहन में ईमानदारी बनाए रखने की प्रेरणा दी।
राजस्थान न्यायिक अकादमी द्वारा आयोजित यह एक वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम नवचयनित न्यायिक मजिस्ट्रेटों को न्यायिक कार्यप्रणाली, विधिक अनुसंधान, केस मैनेजमेंट तथा न्यायिक नैतिकता से संबंधित विभिन्न पहलुओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
