जयपुर। प्रदेश के बहुचर्चित हाईप्रोफाइल ब्लैकमेलिंग और कथित हनीट्रैप मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी युवती को बड़ी राहत देते हुए नियमित जमानत प्रदान कर दी है।
न्यायमूर्ति बिपिन गुप्ता की विशेष अवकाशकालीन पीठ ने सोमवार को सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया।
मामले में युवती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश गुप्ता ने पक्ष रखते हुए पूरे प्रकरण को एक सुनियोजित साजिश बताया।
उन्होंने अदालत को बताया कि जिस मामले को ब्लैकमेलिंग के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, उसकी वास्तविकता प्रेम संबंधों, आपसी विश्वास, आर्थिक लेन-देन और कथित धोखे से जुड़ी हुई है।
अदालत में यह भी दलील दी गई कि शिकायतकर्ता कारोबारी ने विवाहित होने के बावजूद स्वयं को अविवाहित बताकर युवती के साथ संबंध बनाए और लंबे समय तक विवाह का झांसा देता रहा।
दबाव बनाने और परेशान करने का तरीका
सुनवाई के दौरान युवती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश गुप्ता ने दलील दी कि शिकायतकर्ता द्वारा पहले भी वर्ष 2025 में इसी तरह के आरोपों के साथ एक मामला दर्ज कराया गया था, जिसमें जांच पूरी होने के बाद उसे अग्रिम जमानत मिल चुकी है।
उस जमानत को रद्द कराने के लिए दायर याचिका भी बाद में वापस ले ली गई थी।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि वर्तमान एफआईआर केवल युवती पर दबाव बनाने और उसे परेशान करने के उद्देश्य से दर्ज कराई गई है।
वहीं, राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया गया कि युवती और उसके परिजनों की ओर से धमकियां दी गई थीं, इसलिए उसे राहत नहीं दी जानी चाहिए।
5 से 6 बार गर्भपात कराने
बचाव पक्ष के अनुसार युवती का कई वर्षों तक यौन शोषण किया गया तथा उस पर 5 से 6 बार गर्भपात कराने का दबाव डाला गया।
युवती की ओर से यह दावा भी किया गया कि कारोबारी की आर्थिक मदद के लिए उसने करीब 10.5 लाख रुपये का बैंक ऋण लेकर सहयोग किया था।
बाद में जब उसने अपनी राशि वापस मांगी तो दोनों के संबंधों में विवाद शुरू हो गया।
बचाव पक्ष ने पुलिस जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
अदालत को बताया गया कि युवती के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच नहीं कराई जा रही है तथा उसके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच में शामिल नहीं किया गया। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि पूरी जांच शिकायतकर्ता कारोबारी के प्रभाव में संचालित हो रही है।
दूसरी ओर शिकायतकर्ता कारोबारी ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उसका कहना था कि युवती और उसके सहयोगियों ने उसे ब्लैकमेल किया, करोड़ों रुपये की मांग की और उसके परिवार की सुरक्षा को भी खतरा है।
कारोबारी के अनुसार उससे करीब 90 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं और अतिरिक्त रकम की मांग की जा रही थी।
हालांकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता की आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया और आरोपी युवती को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया।
सशर्त जमानत
हाईकोर्ट ने आरोपी युवती को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और 50-50 हजार रुपये की दो जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया।
साथ ही शर्त लगाई कि वह बिना अदालत की अनुमति देश नहीं छोड़ेगी, किसी भी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगी और सुनवाई के दौरान नियमित रूप से अदालत में उपस्थित रहेगी।
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जेल में पहुंचे थे दो अधिवक्ता, जांच तेज
दूसरी तरफ युवती से जेल में अधिवक्ता बनकर पहुचंने वाले दो लोगो के खिलाफ पुलिस ने जांच तेज कर दी हैं.
पुलिस द्वारा महिला बंदी जेल के प्रभारी को मामले में लिखे गये पत्र के बाद अब जेल प्रशासन ने अपना जवाब भेज दिया हैं.
पुलिस को भेजे गये जवाब में जेल प्रशासन ने स्वीकार किया हैं कि 12 जून को दो अधिवक्ता जेल में युवती से मिलने पहुंचे थे.
युवती द्वारा चिल्लाने पर दोनो अधिवक्ताओं को 5 मिनट में ही जेल से बाहर निकालने की बात पत्र में कही गयी हैं.
11 जून की गलत तारीख, मुलाकात पंजिका नहीं
जेल प्रशासन द्वारा पुलिस को भेजे गये जवाब में जेल प्रशासन ने 11 जून केा अधिवक्ताओं के जेल आने की बात कही गयी, जिसे बाद में सुधार कर 12 जून किया गया हैं.
दूसरी तरफ जेल प्रशासन ने पुलिस को लिखा हैं किे मुलाकात का दिन नहीं होने के कारण महिला बंदी से मुलाकात पंजिका का सबूत नही हैं.
उसी पत्र में जेल प्रशासन ने यह भी कहा हैं हरेन्द्रसिंह और चन्द्रिया कुमावत ने युवती से मुलाकात की थी.
ब्लैकमेलिंग या गहरी साजिश?
यह मामला अब केवल कथित ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं रह गया है।
एक तरफ कारोबारी करोड़ों रुपये की उगाही और हनीट्रैप की कहानी बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ युवती स्वयं को प्रेम, धोखे, आर्थिक शोषण और यौन उत्पीड़न की शिकार बता रही है।
मामले में हाल ही में युवती के परिवार ने पुलिस को शिकायत देकर यह भी आरोप लगाया कि जमानत याचिका पर सुनवाई से पहले उन पर समझौते का दबाव बनाया गया।
शिकायत में दावा किया गया कि कुछ लोग वकील के जूनियर बनकर जेल तक पहुंचे और युवती को समझौते के लिए धमकाने का प्रयास किया।
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इन आरोपों ने पूरे प्रकरण को और अधिक रहस्यमय बना दिया है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल कथित ब्लैकमेलिंग का नहीं बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास का भी बन सकता है।
फिलहाल हाईकोर्ट से मिली जमानत के बाद इस हाईप्रोफाइल मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
अब सभी की निगाहें आगे की न्यायिक कार्यवाही और उन तथ्यों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि इस मामले में वास्तविक पीड़ित कौन है और पर्दे के पीछे की सच्चाई क्या है।
