युवती के अधिवक्ता का दावा, कारोबारी से समझौता करने का दबाव बनाने जेल में पहुंचे फर्जी अधिवक्ता; लालकोठी पुलिस थाने में मामला दर्ज,
जयपुर। प्रदेश के बहुचर्चित हाईप्रोफाइल ब्लैकमेलिंग मामले में रोज नए दावे और आरोप सामने आ रहे हैं।
अब तक मामले को मुख्य रूप से कारोबारी से कथित तौर पर 90 लाख रुपये की मांग से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन बचाव पक्ष की ओर से पेश किए जा रहे तथ्यों ने मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
आरोपी युवती के अधिवक्ता का दावा है कि वास्तविकता उतनी सीधी नहीं है, जितनी पहली नजर में दिखाई दे रही है।
जेल में धमकाने का आरोप
युवती के भाई ने अपने अधिवक्ता लोकेश शर्मा के जरिए शनिवार को लालकोठी पुलिस थाने में एक शिकायत दी है।
शिकायत के अनुसार, आरोपी युवती को जेल में जाकर दो लोगों ने समझौते के लिए धमकी दी है।
जयपुर पुलिस कमिश्नर को भी भेजी गई शिकायत में दावा किया गया है कि 12 जून यानी शुक्रवार को फर्जी अधिवक्ता बनकर दो लोगों ने युवती से मुलाकात कर समझौता करने के लिए धमकाया है।
शिकायत में दावा किया गया है कि ये दो लोग युवती के अधिवक्ता के जूनियर बनकर जेल पहुंचे थे।
युवती के भाई ने पुलिस में दी शिकायत में कहा है कि जेल में उसकी बहन के साथ कोई अप्रिय वारदात हो सकती है।
युवती के भाई की शिकायत पर शनिवार को ही लालकोठी थाना पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए आईओ (Investigating Officer) की नियुक्ति कर जांच शुरू कर दी है।
अधिवक्ता लोकेश शर्मा के अनुसार, कारोबारी लगातार युवती पर समझौते का दबाव बना रहा है। अधिवक्ता के अनुसार, हाल ही में दो व्यक्ति स्वयं को उनका जूनियर बताकर जेल पहुंचे और युवती को समझौता करने के लिए कथित तौर पर धमकाने का प्रयास किया।
जांच पर उठ रहे सवाल
मामले में पुलिस जांच भी सवालों के घेरे में है। बचाव पक्ष का आरोप है कि जिस मोबाइल फोन को पुलिस ने युवती से बरामद किया है, उसकी अब तक फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) से जांच नहीं कराई गई है।
दूसरी ओर, युवती की तरफ से मोबाइल डेटा और ई-मेल रिकॉर्ड की निजी एफएसएल रिपोर्ट पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन उन्हें जांच का हिस्सा नहीं बनाया जा रहा।
अधिवक्ता का कहना है कि यदि डिजिटल साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो मामले के कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आ सकते हैं।
एफएसएल रिपोर्ट में क्या हैं दावे?
युवती की ओर से जमानत सुनवाई के दौरान अदालत में पेश की गई कथित एफएसएल रिपोर्ट को लेकर भी कई दावे किए जा रहे हैं। बचाव पक्ष का कहना है कि रिपोर्ट में मौजूद डिजिटल संवादों से यह संकेत मिलता है कि दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध थे।
अधिवक्ता का दावा है कि इन दस्तावेजों में कारोबारी ने स्वयं स्वीकार किया है कि युवती ने उससे अत्यधिक प्रेम किया और उसके कहने पर पांच-छह बार गर्भपात कराया।
साथ ही, कई स्थानों पर कारोबारी द्वारा अपराधबोध (गिल्ट) महसूस करने जैसी बातें भी सामने आने का दावा किया गया है।
युवती के अधिवक्ता का दावा है कि कारोबारी ने युवती को अपने प्रेमजाल में फंसाया क्योंकि वह एआई में बहुत अच्छा काम कर रही थी।
लेकिन जब कारोबारी के स्वयं विवाहित होने और दो बच्चे होने की जानकारी युवती को हुई, तब मामला बिगड़ गया।
अधिवक्ता लोकेश शर्मा के अनुसार, एफएसएल जांच की इस रिपोर्ट में युवती का दावा है कि कारोबारी ने खुद स्वीकार किया है कि उसने कोई पुण्य का काम किया होगा, जो उसे वह मिली।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
धीरज की भूमिका पर भी विवाद
मामले में एक अन्य युवक धीरज का नाम भी सामने आया है, जिस पर कथित साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।
बचाव पक्ष का कहना है कि कारोबारी को युवती और धीरज की बढ़ती नजदीकियां पसंद नहीं थीं, जिसके चलते विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई।
इन दावों ने मामले को केवल कथित ब्लैकमेलिंग तक सीमित न रखकर व्यक्तिगत संबंधों और आपसी विवादों के दायरे में भी ला खड़ा किया है।
करोड़ों के एआई प्रोजेक्ट का रहस्य
इस पूरे विवाद का सबसे चर्चित और रहस्यमय पहलू एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रोजेक्ट को माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, युवती और कारोबारी ने मिलकर एक एआई प्रोजेक्ट विकसित किया था, जिसकी संभावित बाजार कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट तक पहुंच के लिए आवश्यक डिजिटल एक्सेस या ‘की’ दोनों पक्षों के पास अलग-अलग रूप में मौजूद है। यही कारण है कि इस प्रोजेक्ट को पूरे विवाद की जड़ माना जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से इस प्रोजेक्ट पर खुलकर कुछ नहीं कह रहे हैं, जबकि कारोबारी की शिकायत में भी इसका उल्लेख होने की बात सामने आई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कारोबारी कथित तौर पर प्रोजेक्ट पर पूर्ण नियंत्रण चाहता है, जबकि युवती उसमें अपना हिस्सा और अधिकार मांग रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कारोबारी पर भी बढ़ सकती हैं मुश्किलें?
मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट में कुछ ऐसे तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है, जिनसे कारोबारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेज जांच में सही पाए जाते हैं तो मामले की दिशा बदल सकती है।
युवती के अधिवक्ता लोकेश शर्मा का आरोप है कि इसी आशंका के चलते कारोबारी समझौते का दबाव बना रहा है। हालांकि, कारोबारी पक्ष ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।
क्या हैं कारोबारी के आरोप?
यह मामला महेश नगर थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 205/2026 से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता कारोबारी विमल डागा ने आरोप लगाया है कि युवती, धीरज कुमार और अन्य लोगों ने मिलकर उन्हें हनी ट्रैप में फंसाया तथा कथित रूप से एआई तकनीक से तैयार आपत्तिजनक फोटो-वीडियो वायरल करने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर करोड़ों रुपये की मांग की।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने अब तक करीब 90 लाख रुपये वसूल लिए, जबकि अतिरिक्त 50 लाख रुपये की मांग भी की गई थी।
जिला अदालत से जमानत हो चुकी खारिज
आरोपी युवती के साथ आरोपी युवक और उसके साथी धीरजकुमार की भी जमानत याचिकाए खारिज हो चुकी है।.
जिला अदालत ने दोनो की जमानत याचिकाए खारिज की हैं.
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
जिला अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी युवती ने अब राजस्थान हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की है।
मामले पर आगामी सुनवाई में कई महत्वपूर्ण तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों पर बहस होने की संभावना है।
फिलहाल यह मामला आरोपों, प्रत्यारोपों, व्यक्तिगत संबंधों, करोड़ों रुपये के कथित एआई प्रोजेक्ट और जांच प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उलझा हुआ है। ऐसे में सभी की निगाहें अब हाईकोर्ट और पुलिस जांच की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
हाईकोर्ट में अगले सप्ताह जमानत पर सुनवाई
सत्र न्यायालय से राहत नहीं मिलने के बाद अब आरोपी पक्ष राजस्थान High Court पहुंचा है, जहां 15 जून को मामले की सुनवाई होने की संभावना है।
मामले की अगली सुनवाई को लेकर कानूनी हलकों में भी काफी चर्चा है, क्योंकि इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से डिजिटल साक्ष्यों, एफएसएल रिपोर्ट और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को लेकर विस्तृत बहस होने की संभावना जताई जा रही है।
