एडीजे कोर्ट के सुपुर्दगी आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, कहा- हाथी के खानपान और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखे सरकार
जयपुर। असम से कथित तौर पर फर्जी ट्रांजिट परमिट के जरिए जयपुर लाए गए 16 वर्षीय हाथी ‘मोहन’ को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा और अहम आदेश दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायालय (एडीजे) द्वारा महावत सलीम खान के पक्ष में दिए गए हाथी की कस्टडी सौंपने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।
इसके साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल हाथी ‘मोहन’ वन विभाग और राज्य सरकार की निगरानी में ही रहेगा तथा उसके खानपान, स्वास्थ्य और कल्याण की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
हाईकोर्ट के अवकाशलीन विशेश एकलपीठ के जज जस्टिस बिपिन गुप्ता ने राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया हैं.
एकलपीठ ने कहा कि मामले के अंतिम निर्णय तक यथास्थिति बनाए रखी जाए।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर चार सप्ताह बाद अगली सुनवाई निर्धारित की है।
फर्जी परमिट और संदिग्ध दस्तावेजों का आरोप
राज्य सरकार की ओर से मामले में पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने हाईकोर्ट को बताया कि हाथी ‘मोहन’ को इसी वर्ष मार्च में असम से जयपुर लाया गया था।
वन विभाग को सूचना मिली कि हाथी को जिन दस्तावेजों और ट्रांजिट परमिट के आधार पर राजस्थान लाया गया, वे संदिग्ध हैं।
जांच के दौरान विभाग को प्रस्तुत ट्रांजिट परमिट फर्जी पाया गया।
इतना ही नहीं, जिस वाहन नंबर से हाथी को लाने का दावा किया गया, वह परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में अस्तित्व में ही नहीं मिला।
इन तथ्यों के सामने आने के बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए हाथी को अपने कब्जे में ले लिया और उसे हाथी गांव में रखा गया, जहां वर्तमान में उसकी देखभाल की जा रही है।
पहले मजिस्ट्रेट ने खारिज किया, फिर ADJ ने दे दी सुपुर्दगी
हाथी के कब्जे को लेकर महावत सलीम खान ने दावा किया कि हाथी के मालिक लोकनाथ बोहरा ने उसे पावर ऑफ अटॉर्नी दी हुई है, इसलिए हाथी उसे वापस सौंपा जाना चाहिए।
इस मांग को लेकर उसने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन अदालत ने 25 मार्च 2026 को उसका आवेदन खारिज कर दिया।
इसके बाद सलीम खान ने पुनरीक्षण याचिका दायर की।
एडीजे-7, जयपुर महानगर-द्वितीय ने 29 अप्रैल 2026 को मजिस्ट्रेट का आदेश पलटते हुए 50 लाख रुपये के सुपुर्दगीनामे और समान राशि के जमानतनामे पर हाथी की कस्टडी सलीम खान को देने का आदेश जारी कर दिया।
हाईकोर्ट में सरकार की दलील: न मालिक, न कानूनी अधिकार
एडीजे के इस आदेश को वन विभाग ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश चौधरी ने अदालत को बताया कि सलीम खान न तो हाथी का मालिक है और न ही उसके कब्जे का कोई वैध कानूनी अधिकार रखता है।
रिकॉर्ड में हाथी का स्वामी असम निवासी लोकनाथ बोहरा है।
सरकार ने यह भी कहा कि पुनरीक्षण अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट पर पर्याप्त विचार किए बिना हाथी की कस्टडी सौंपने का आदेश पारित कर दिया।
असम से राजस्थान तक सफर को बताया ‘जैविक क्रूरता’
सुनवाई के दौरान सरकार ने एक और महत्वपूर्ण तर्क रखा।
राज्य की ओर से कहा गया कि हाथी असम की आर्द्र और प्राकृतिक जलवायु का जीव है।
उसे राजस्थान जैसे शुष्क और गर्म वातावरण में लाना उसके प्राकृतिक जीवन और स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल है।
सरकार ने इसे हाथी के प्रति जैविक क्रूरता के समान बताते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण और पशु कल्याण के दृष्टिकोण से उसकी सुरक्षा सर्वोपरि है।
हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने फिलहाल एडीजे कोर्ट के आदेश के संचालन पर रोक लगाते हुए कहा कि हाथी की समुचित देखभाल सुनिश्चित की जाए।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और वन विभाग को निर्देश दिया कि हाथी के भोजन, चिकित्सा, स्वास्थ्य और कल्याण में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।