जयपुर। राजस्थान में पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लेकर एक बार फिर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की है।
संयम लोढ़ा की ओर से दायर की गई अवमानना याचिका में राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों पर अदालत के आदेशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया है।
याचिका में संयम लोढ़ा ने आरोप लगाया है कि राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया।
याचिका में कहा गया है कि राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 22 मई 2026 को पारित अपने फैसले में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को शहरी निकायों के वार्डों के परिसीमन (Delimitation) तथा मतदाता सूची के पुनरीक्षण (Revision of Electoral Rolls) की प्रक्रिया 20 जून 2026 तक पूरी करने तथा 31 जुलाई 2026 तक चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के आदेश दिए थे।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने बाद में जारी विभिन्न पत्रों और प्रशासनिक कार्यवाहियों के माध्यम से उसी आधार पर कार्रवाई जारी रखी, जिसे हाईकोर्ट पहले ही अपने निर्णय में अस्वीकार कर चुका था। इससे हाईकोर्ट के आदेशों का प्रभावी पालन नहीं हो सका।
अवमानना याचिका Contempt of Courts Act, 1971 की धारा 12 तथा संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत दायर की गई है।
याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली और विलंबपूर्ण रवैये के कारण हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन असंभव हो गया, जो न्यायालय की जानबूझकर अवमानना (Wilful Disobedience) की श्रेणी में आता है।
याचिका में राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह (आईएएस), राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राजेश वर्मा (आईएएस), पंचायती राज विभाग के सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम (आईएएस), स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक एवं विशेष सचिव जुलकर प्रतिक चंद्रशेखर (आईएएस) तथा राज्य सरकार के मुख्य सचिव को पक्षकार बनाया गया है।
अब इस मामले में हाईकोर्ट यह तय करेगा कि क्या संबंधित अधिकारियों ने 22 मई 2026 के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन किया है और क्या उनके विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई की जानी चाहिए।