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स्ट्रे डॉग्स पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: राज्य सरकार को नोटिस जारी कर मांगी रिपोर्ट, पूछा- अब तक क्या कदम उठाए?

Rajasthan High Court Seeks Statewide Compliance Report On Supreme Court's Stray Dog Directions

जयपुर: सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्ट्रे डॉग्स (आवारा कुत्तों) और डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं को लेकर दिए गए निर्देशों के पालन पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान से चल रही सुनवाई में राज्य सरकार, केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि पूरे राजस्थान में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है, जिसमें लोगों की सुरक्षा, स्ट्रे डॉग्स पर नियंत्रण, एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी देने को कहा गया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला केवल जयपुर शहर तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन पूरे राजस्थान में एक समान तरीके से होना चाहिए। इसलिए सरकार को सभी जिलों में की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा कोर्ट के सामने रखना होगा।

कोर्ट ने सरकार से पूछा- अब तक क्या कदम उठाए?

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वह शपथपत्र के साथ यह बताए कि नगर निकायों ने स्ट्रे डॉग्स की समस्या से निपटने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की है। रिपोर्ट में यह भी शामिल किया जाए कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किस स्तर तक हुआ है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया को भी नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा गया है कि जिला स्तर पर एनिमल वेलफेयर बोर्ड बनाने और डॉग बाइट की घटनाओं को रोकने के लिए मानक कार्यप्रणाली (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार करने की दिशा में क्या प्रगति हुई है।

सार्वजनिक जगहों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट सख्त

हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के आसपास लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। जरूरत के अनुसार फेंसिंग, गेट और अन्य सुरक्षा उपाय किए जाएं, ताकि स्ट्रे डॉग्स इन जगहों पर लोगों के लिए खतरा न बन सकें।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में भी इसी तरह के सुरक्षा इंतजाम किए जाएं। खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

स्ट्रे डॉग्स को हटाने, नसबंदी और टीकाकरण के निर्देश

हाईकोर्ट ने कहा कि नगर निकायों में स्ट्रे डॉग्स को पकड़ने और सार्वजनिक सड़कों से हटाने के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए। इसके लिए अलग विंग बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जाएं, ताकि शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई हो सके।

कोर्ट ने कहा कि पकड़े गए स्ट्रे डॉग्स के साथ कानून के मुताबिक ही कार्रवाई की जाए। उनकी नसबंदी और टीकाकरण एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 के अनुसार कराया जाए, ताकि लोगों की सुरक्षा के साथ पशु कल्याण से जुड़े नियमों का भी पालन हो सके।

वैक्सीन, जागरूकता और जवाबदेही को लेकर निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरी में पर्याप्त मात्रा में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है या नहीं। सरकार को इस संबंध में भी शपथपत्र देकर पूरी जानकारी कोर्ट में पेश करनी होगी।

इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नगर निकायों और पशुपालन विभाग को मिलकर गांवों और शहरों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। लोगों को डॉग बाइट से बचाव, ऐसी स्थिति में तुरंत क्या करना चाहिए और इलाज कैसे शुरू करना चाहिए, इसकी जानकारी दी जाए।

कोर्ट ने इस अभियान में गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की व्यवस्था विकसित करने को भी कहा, ताकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का प्रभावी तरीके से पालन हो सके।

पालतू जानवरों के रजिस्ट्रेशन पर भी हाईकोर्ट सख्त

हाईकोर्ट ने सिर्फ स्ट्रे डॉग्स तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। हाईकोर्ट ने केवल आवारा कुत्तों पर ही नहीं, बल्कि पालतू कुत्तों के मालिकों पर भी सख्ती दिखाई है।

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ऐसे सभी पालतू जानवरों का रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित किया जाए, जो लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से कुत्तों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके रजिस्ट्रेशन के लिए समय-सीमा तय की जाए और नियमों का पालन नहीं करने वालों पर जुर्माने जैसी कार्रवाई का भी प्रावधान किया जाए।

कोर्ट का मानना है कि स्ट्रे डॉग्स के साथ-साथ पालतू जानवरों को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था होना जरूरी है। इससे जिम्मेदारी तय होगी और भविष्य में होने वाली डॉग बाइट जैसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के सभी निर्देशों के पालन पर विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले कोर्ट में पेश करें।

कोर्ट ने साफ किया कि यह आदेश केवल जयपुर शहर के लिए नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में लागू होगा। इसलिए सभी जिलों में एक समान व्यवस्था सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी।

उस दिन हाईकोर्ट यह देखेगा कि राज्य सरकार और संबंधित विभागों ने स्ट्रे डॉग्स की समस्या, डॉग बाइट रोकने, एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता, पालतू जानवरों के रजिस्ट्रेशन और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं। कर्ट ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट में यह दिखना चाहिए कि निर्देशों का वास्तविक पालन हुआ है, न कि केवल औपचारिकता निभाई गई है।

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