जोधपुर। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिली है।
राजस्थान हाई कोर्ट ने पादू कलां पुलिस स्टेशन में 28 मई को दर्ज FIR के सिलसिले में कोई सख्त कार्रवाई न करें. जस्टिस फरजंद अली ने बेनीवाल की उस आपराधिक विविध याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 8B के प्रावधानों के तहत दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई थी. कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद तय की है.
राजस्थान हाईकोर्ट ने हुनमान बेनीवाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया माना कि मामला कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठाता है, जिनकी न्यायिक जांच आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए अगली सुनवाई तक हुनमान बेनीवाल के खिलाफ दंडात्मक (Coercive) कार्रवाई परा रोक लगा दी हैं.
जस्टिस फरजंद अली ने बेनीवाल की उस आपराधिक विविध याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 8B के प्रावधानों के तहत दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई थी.
क्या है पूरा मामला?
मामला नागौर जिले के पाडू कलां थाना में दर्ज एफआईआर संख्या 119/2026 से जुड़ा है।
यह एफआईआर 28 मई 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 189(2), 223(a), 285 तथा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 8B के तहत दर्ज की गई थी।
यह शिकायत बेनीवाल और 13 अन्य लोगों के खिलाफ 6 जनवरी को नागौर के रियान बड़ी में रेत माफिया के खिलाफ एक राजनीतिक सभा और उसके बाद निकाले गए जुलूस के संबंध में दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप है कि बेनीवाल ने कई अन्य लोगों के साथ भाग लिया था.
एफआईआर में आरोप राजनीतिक सभा और उसके बाद निकाले गए जुलूस से जुड़े घटनाक्रम को लेकर लगाए गए हैं।
लांकि अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि इस मामले की भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 528 के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों के आधार पर जांच की जरूरत है.
एफआईआर दर्ज होने के बाद हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर को चुनौती दी।
उनका कहना था कि उनके खिलाफ दर्ज मामला कानून के अनुरूप नहीं है तथा राजनीतिक गतिविधियों को आपराधिक रंग देकर कार्रवाई की गई है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और एफआईआर की प्रथम दृष्टया जांच से कई ऐसे कानूनी प्रश्न सामने आते हैं जिनकी विस्तार से न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।
राजनीतिक सभा से जुड़ा है मामला
हाईकोर्ट ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि एफआईआर में वर्णित घटनाएं एक राजनीतिक सभा और उसके बाद निकाले गए जुलूस से संबंधित हैं, जिसमें याचिकाकर्ता सहित कई अन्य लोगों की भागीदारी बताई गई है।
कोर्ट ने माना कि केवल किसी राजनीतिक कार्यक्रम में भाग लेने मात्र से किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी स्वतः स्थापित नहीं हो जाती।
यह देखना आवश्यक होगा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ ऐसे कौन से विशिष्ट तथ्य मौजूद हैं जिनके आधार पर उन पर आपराधिक दायित्व तय किया जा सकता है।
राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का समय
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) उपस्थित हुए और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। चूंकि राज्य सरकार की ओर से पहले ही उपस्थिति दर्ज करा दी गई थी, इसलिए न्यायालय ने अलग से नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं समझी और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का समय प्रदान किया।
तीन सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले को तीन सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई तक राज्य सरकार अपना विस्तृत जवाब दाखिल करेगी, जिसके बाद अदालत मामले की मेरिट पर आगे विचार करेगी।