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राजस्थान हाईकोर्ट में GSICC का पुनर्गठन: जयपुर और जोधपुर के लिए नई आंतरिक शिकायत समितियां गठित, अधिवक्ताओं के पैनल में बड़ा बदलाव

Rajasthan High Court Reconstitutes GSICC for Jaipur and Jodhpur, New Internal Complaints Committees Formed

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, लैंगिक समानता और यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों के प्रभावी निस्तारण को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए हाईकोर्ट की जेंडर सेंसिटाइजेशन एंड इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (Gender Sensitization and Internal Complaints Committee-GSICC) का पुनर्गठन किया हैं.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की मंजूरी से जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर बेंच के लिए नई समितियों का गठन किया है। यह पुनर्गठन समिति के एक सदस्य के ट्रांसफर के बाद किया गया है।

रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि नई समितियां तत्काल प्रभाव से कार्य करेंगी और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के निस्तारण की जिम्मेदारी निभाएंगी।

जोधपुर समिति के जस्टिस अनुप कुमार ढंड चैयरमेन

आदेश के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर मुख्यपीठ के लिए गठित समिति का चैयनमेन जस्टिस अनुप कुमार ढंड को बनाया गया है।

वही इस समिति में जस्टिस कुलदीप माथुर, रजिस्ट्रार क्लासिफिकेशन तोषिता मालानी, एडवोकेट डॉ प्रतिभा दवे, अभिलाषा बोड़ा, महावीर बिश्नोई और उप रजिस्ट्रार मीना काबरा को शामिल किया गया हैं.

जयपुर बेंच में जस्टिस शुभा मेहता चैयरमेन

राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर बेंच के लिए गठित GSICC की चैयरमेन जस्टिस शुभा मेहता को बनाया गया हैं.

जस्टिस शुभा मेहता की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में जस्टिस गणेशराम मीणा, रजिस्ट्रार रिट्स शिल्पा सांभर, एडवोकेट अनुपमा चतुर्वेदी, एडवोकेट रमित पारीा, अंकिता शर्मा और सहायक रजिस्ट्रार अर्चना जैन को शामिल किया गया हैं.

अधिवक्ताओं के पैनल में बड़ा बदलाव

नई समिति के गठन में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अधिवक्ताओं के प्रतिनिधित्व को लेकर किया गया है।

जयपुर बेंच में अधिवक्ता रमित पारीक को छोड़कर पूर्व समिति के अन्य सभी अधिवक्ता सदस्यों को बदल दिया गया है, जबकि नई समिति में नए अधिवक्ताओं को शामिल किया गया है।

वहीं जोधपुर मुख्यपीठ में भी अधिवक्ता सदस्यों के पैनल में बदलाव करते हुए डॉ. प्रतिभा दवे, अभिलाषा बोरा और महावीर बिश्नोई को सदस्य बनाया गया है।

हाईकोर्ट प्रशासन का मानना है कि नए सदस्यों के शामिल होने से समिति की कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी तथा संतुलित होगी।

POSH कानून के अनुरूप व्यवस्था

यह समिति कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) तथा राजस्थान हाईकोर्ट के 2014 के विनियमों के अनुरूप कार्य करेगी।

समिति शिकायतों की गोपनीय जांच, पक्षकारों की सुनवाई और नियमानुसार आवश्यक अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगी।

राजस्थान हाईकोर्ट मुख्यपीठ और जयपुर पीठ के लिए गठित ये समिति राजस्थान हाईकोर्ट में जजों, न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, हाईकोर्ट कर्मचारियों, पक्षकारों और कोर्ट परिसर में कार्यरत अन्य व्यक्तियों से जुड़ें मामलो की सुनवाई करेगी.

यदि कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ किसी प्रकार के यौन उत्पीड़न, अनुचित व्यवहार अथवा लैंगिक भेदभाव की शिकायत सामने आती है, तो उसका निस्तारण इसी समिति के माध्यम से किया जाएगा।

2014 के विनियमों के तहत हुआ पुनर्गठन

यह पुनर्गठन राजस्थान हाईकोर्ट (कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध एवं प्रतितोष) विनियम, 2014 के तहत किया गया है।

आदेश में कहा गया है कि GSICC के एक सदस्य के स्थानांतरण के कारण पूर्व में गठित समिति में आंशिक संशोधन आवश्यक हो गया था। इसी कारण कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने समिति के पुनर्गठन को स्वीकृति प्रदान की।

नई समितियां तत्काल प्रभाव से कार्य करेंगी और न्यायालय परिसर में महिलाओं की सुरक्षा तथा शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण की जिम्मेदारी निभाएंगी।

क्या है GSICC?

Gender Sensitization and Internal Complaints Committee (GSICC) न्यायालय परिसर में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न की रोकथाम, शिकायतों की सुनवाई, जांच और निस्तारण के लिए गठित एक वैधानिक समिति है।

यह समिति केवल शिकायतों की जांच तक सीमित नहीं रहती, बल्कि न्यायपालिका में लैंगिक संवेदनशीलता बढ़ाने, सुरक्षित कार्य वातावरण विकसित करने तथा महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का भी कार्य करती है।

समिति के अधिकार क्षेत्र में हाईकोर्ट न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, हाईकोर्ट कर्मचारी, वादकारी (Litigants) तथा न्यायालय परिसर में कार्यरत अन्य सभी व्यक्ति आते हैं।

शिकायतों का होगा प्रभावी और निष्पक्ष निस्तारण

नई GSICC समितियां राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर बेंच में आने वाली सभी यौन उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव तथा अनुचित व्यवहार से संबंधित शिकायतों की सुनवाई करेंगी।

समिति का उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना ही नहीं, बल्कि न्यायालय परिसर में ऐसा वातावरण तैयार करना भी है, जहां प्रत्येक महिला सुरक्षित, सम्मानित और बिना किसी भय के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके।

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