जयपुर: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव की तस्वीर अब लगभग साफ हो गई है। हाईकोर्ट में सरकार ने चुनाव का पूरा रोडमैप पेश कर दिया है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने चुनाव की पूरी समय-सीमा कोर्ट के सामने पेश कर दी है।
सरकार के मुताबिक अगस्त से चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पहले ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट देगा, फिर आरक्षण की लॉटरी निकलेगी और उसके बाद राज्य चुनाव आयोग 90 दिनों के भीतर चुनाव कराएगा।
अगर हाईकोर्ट इस प्रस्तावित कार्यक्रम को मंजूरी देता है, तो पंचायत और निकाय चुनावों की वोटिंग अगस्त के आखिरी सप्ताह से शुरू होकर 15 नवंबर तक अलग-अलग चरणों में कराई जा सकती है।
हाईकोर्ट में सरकार ने क्या बताया?
स्वायत्त शासन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करते हुए बताया कि 16 जुलाई के आदेश के पालन में शनिवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई।
इस बैठक में राज्य चुनाव आयोग, ओबीसी आयोग, स्वायत्त शासन विभाग और पंचायतीराज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में चुनाव कराने का पूरा रोडमैप तय किया गया।
सरकार ने कोर्ट को बताया कि सभी विभागों के बीच समन्वय बनाकर चुनाव प्रक्रिया तय समय में पूरी करने की तैयारी की जा रही है।
चुनाव का पूरा शेड्यूल क्या रहेगा?
सरकार की ओर से हाईकोर्ट में पेश कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा।
- 5 अगस्त तक ओबीसी आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
- इसके बाद 15 अगस्त तक एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी।
- आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा।
- इसके बाद आयोग 90 दिनों के भीतर पंचायत और निकाय चुनाव संपन्न कराएगा।
सरकार का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं तय समय-सीमा के भीतर पूरी करने की तैयारी कर ली गई है।
कब हो सकती है वोटिंग?
हाईकोर्ट में सोमवार को इस मामले पर सुनवाई तय है। अगर कोर्ट सरकार के प्रस्तावित कार्यक्रम को स्वीकार कर लेता है, तो पंचायत और निकाय चुनावों के पहले चरण की वोटिंग अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले सप्ताह में शुरू हो सकती है।
पूरी चुनाव प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से चलेगी और 15 नवंबर तक मतदान पूरा कराने की तैयारी है।
मामला हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा?
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव समय पर नहीं होने को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।
इसी देरी के खिलाफ गिरिराज सिंह देवंदा और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने जनहित याचिकाएं दाखिल की थीं। याचिकाओं में कहा गया था कि संविधान और कानून के मुताबिक स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर कराए जाने चाहिए।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से चुनाव कराने की समय-सीमा बताने को कहा था।
इसी के बाद सरकार ने विस्तृत कार्यक्रम तैयार कर कोर्ट के सामने पेश किया।
राजस्थान में पंचायत व्यवस्था का दायरा काफी बड़ा है। प्रदेश में 14,403 ग्राम पंचायतें, 457 पंचायत समितियां और 41 जिला परिषद हैं। इन सभी संस्थाओं के लिए चुनाव कराए जाने हैं।
ऐसे में चुनाव का शेड्यूल तय होने को स्थानीय लोकतंत्र और लाखों मतदाताओं के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।