नई दिल्ली,। राजस्थान के जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के 4 न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाए जाने के 13 जुलाई, 2026 के अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण संशोधन किया हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों में राज्य सरकार और संबंधित उच्च न्यायालय की ओर से सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की सिफारिश नहीं की गई है, वहां न्यायिक अधिकारियों को वर्तमान निर्धारित आयु पूरी होने पर ही सेवानिवृत्त किया जा सकेगा।
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पदिया किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु के बाद सेवा जारी रखने का लाभ केवल उन्हीं राज्यों में उपलब्ध होगा, जहां राज्य सरकार तथा संबंधित उच्च न्यायालय दोनों की ओर से आयु बढ़ाने की अनुशंसा या सहमति दी गई हो।
ऐसी सिफारिश या सहमति के अभाव में न्यायिक अधिकारियों को नियमानुसार 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त किया जाएगा।
राजस्थान सरकार ने किया है विरोध
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्त शिवमंगल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के 13 जुलाई के आदेश का विरोध किया.
सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य में सरकारी कर्मचारियों तथा जिला न्यायपालिका के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु वर्तमान में 60 वर्ष है और राज्य सरकार की ओर से इसे 61 वर्ष करने की कोई सिफारिश नहीं की गई है।
राजस्थान सरकार ने यह भी कहा कि कई अन्य राज्यों ने भी सेवानिवृत्ति आयु में सामान्य रूप से वृद्धि किए जाने का विरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन आपत्तियों को अपने आदेश में दर्ज किया।
मध्य प्रदेश और तेलंगाना की स्थिति पर भी हुई चर्चा
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश और तेलंगाना के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि अलग-अलग न्यायिक कार्यवाहियों में सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का प्रश्न उठा था और संबंधित राज्य सरकारों की ओर से आयु वृद्धि की सिफारिश की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश में बाद के घटनाक्रम वहां की विशिष्ट परिस्थितियों पर आधारित थे और उन्हें सभी राज्यों पर समान रूप से लागू नहीं माना जा सकता।
13 जुलाई के अंतरिम आदेश में संशोधन
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 13 जुलाई, 2026 के अंतरिम आदेश में संशोधन करते हुए राजस्थान तथा समान प्रकृति के आवेदन प्रस्तुत करने वाले अन्य राज्यों के संबंध में दी गई अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली।
इसके परिणामस्वरूप, जिन राज्यों में आयु वृद्धि की सिफारिश नहीं है, वहां न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति वर्तमान नियमों के अनुसार की जा सकेगी।
सभी राज्यों और उच्च न्यायालयों से मांगा स्पष्ट रुख
सुप्रीम कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर देशभर में एक समान नीति पर विचार करने के उद्देश्य से सभी राज्य सरकारों और संबंधित उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया है कि वे न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 61 वर्ष किए जाने के संबंध में अपना स्पष्ट रुख हलफनामे के माध्यम से न्यायालय के समक्ष पेश करें।
मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त, 2026 को होगी, जब सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर अखिल भारतीय स्तर पर व्यापक विचार करेगा।
सुनवाई के दौरान राजस्थान राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा उपस्थित हुए, जबकि राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से बीना माधवन ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा।