जोधपुर/नई दिल्ली। राजस्थान में जोजरी नदी प्रदूषण और उससे प्रभावित करीब 20 लाख लोगों के जीवन से जुड़े बेहद गंभीर मामले में अब राजस्थान के मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार रहेंगे.
पिछले दो दशक से जोजरी नदी के प्रदूषण के मामले में ये एक नया मोड़ हैं जब देश की सर्वोच्च अदालत ने राज्य के सबसे बड़े अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाते हुए आगामी 4 अगस्त को कोर्ट में जवाब देने का आदेश दिया हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यदि औद्योगिक प्रदूषण के आरोप सही हैं तो यह केवल एक नदी का मामला नहीं, बल्कि भूजल, कृषि, वन्यजीव, पर्यावरण और लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा गंभीर खतरा है।
सुप्रीम कोर्ट राज्य के मुख्य सचिव को सभी आदेशों के समयबद्ध और प्रभावी अनुपालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए 4 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से सामने आ रही जल स्रोतों में औद्योगिक प्रदूषण की घटनाएं गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय हैं और इनकी तत्काल जांच एवं प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
‘गुलाबी पानी’ से सुप्रीम कोर्ट चिंतित
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मीडिया रिपोर्टें रखी गईं, जिनमें जोधपुर के तनावड़ा क्षेत्र में जोजरी नदी के पास स्थित एक तालाब का पानी गुलाबी हो जाने की जानकारी दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार यह पानी न तो इंसानों के उपयोग योग्य रहा और न ही पशुओं के लिए सुरक्षित है।
अदालत ने कहा कि यदि यह स्थिति सही पाई जाती है तो इसका असर भूजल, कृषि भूमि और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
वन्यजीवों पर भी पड़ा प्रदूषण का असर
हाई लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी की दूसरी स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि मेलबा, धावा, झंवर और लूणी तहसील के आसपास प्रदूषण का असर वन्यजीवों पर भी दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार धावा और डोली क्षेत्र चिंकारा, काला हिरण, लोमड़ी, नीलगाय सहित अनेक वन्यजीवों का महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास हैं।
जोजरी नदी में प्रदूषित पानी बहने के बाद से वन्यजीवों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। कमेटी ने इन क्षेत्रों की जमीन वन विभाग को हस्तांतरित कर उन्हें वन एवं घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने की सिफारिश की है।
वन विभाग को जमीन हस्तांतरित करने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेलबा और मोडाथली सहित संबंधित क्षेत्रों की भूमि वन विभाग को हस्तांतरित करने के लिए आवश्यक अधिसूचनाएं और आदेश शीघ्र जारी किए जाएं, ताकि वहां पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और वन्यजीव संरक्षण का कार्य शुरू किया जा सके।
जहरीले पानी पर भी कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर के सांगारिया स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) में जमा औद्योगिक अपशिष्टयुक्त पानी को लेकर भी कड़ी नाराजगी जताई।
राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) को निर्देश दिया गया कि वह तत्काल वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्ययोजना तैयार कर जहरीले पानी का सुरक्षित उपचार और निस्तारण सुनिश्चित करे।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया हाई लेवल कमेटी की प्रत्यक्ष निगरानी में होगी तथा उपचार से पहले और बाद में वैज्ञानिक परीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जहरीले तत्व पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं।
साथ ही अदालत ने साफ कर दिया कि इस प्रक्रिया की आड़ में बंद उद्योगों को दोबारा चालू नहीं किया जा सकेगा।
सरकार से मांगा विस्तृत हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को राज्यभर में सामने आए पर्यावरण प्रदूषण के मामलों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इसमें वास्तविक स्थिति, संबंधित अधिकारियों की भूमिका, अब तक की गई कार्रवाई, जिम्मेदारी तय किए जाने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक उपायों का पूरा विवरण देना होगा।
इसके अलावा सरकार को हाई लेवल कमेटी की दूसरी स्टेटस रिपोर्ट और एसआईटी की पहली रिपोर्ट पर की गई टिप्पणियों का बिंदुवार जवाब भी दाखिल करना होगा।
गंभीर धाराएं क्यों नहीं लगाईं?
सुप्रीम कोर्ट ने बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट के अवैध बहाव को अत्यंत गंभीर अपराध मानते हुए राज्य सरकार से पूछा कि अब तक दर्ज मामलों में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 272, 326(ए), 326(सी) तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की गंभीर धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ये अपराध प्रथम दृष्टया इन धाराओं के अंतर्गत आते हैं।
इसलिए राज्य सरकार लंबित और प्रस्तावित सभी अभियोजन मामलों में इन धाराओं को लागू करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करे।
मुख्य सचिव होंगे व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस मामले में पारित सभी वर्तमान और पूर्व आदेशों के समयबद्ध, प्रभावी और पूर्ण अनुपालन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी राजस्थान के मुख्य सचिव की होगी।
साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि 4 अगस्त, 2026 को अगली सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वयं सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उपस्थित रहें।
