जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर की द्रव्यवती नदी के संरक्षण और जल प्रवाह में आ रही बाधाओं को गंभीरता से लेते हुए जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) से जवाब तलब किया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जेडीए से जवाब मांगा कि नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी), नागपुर की रिपोर्ट में सिफारिश होने के बावजूद अंबावाड़ी इलाके में सीमेंट-कंक्रीट ड्रेनेज चैनल का निर्माण अब तक क्यों नहीं कराया गया।
हाईकोर्ट ने जेडीए से अगली सुनवाई तक इस पर जवाब दाखिल करने को कहा है।
यह मामला द्रव्यवती नदी के संरक्षण से जुड़ी एक जनहित याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता का कहना है कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद भी जिन स्थानों पर ड्रेनेज व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत थी, वहां अब तक जरूरी निर्माण नहीं कराया गया।
साथ ही नीरी की रिपोर्ट में अंबावाड़ी इलाके में जिन निर्माण कार्यों की सिफारिश की गई थी, जेडीए ने उन्हें अब तक पूरा नहीं किया।
उनका कहना था कि इसी वजह से द्रव्यवती नदी में पानी का बहाव प्रभावित हो रहा है और नदी की सुरक्षा पर भी असर पड़ रहा है।
इन दलीलों पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जेडीए से जवाब दाखिल करने को कहा।
नीरी की रिपोर्ट का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी), नागपुर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में अंबावाड़ी इलाके के आसपास सीमेंट-कंक्रीट ड्रेनेज चैनल बनाने की सिफारिश की गई थी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन इलाकों में किस तरह के निर्माण की जरूरत है, लेकिन जेडीए ने अब तक उस पर अमल नहीं किया। इसी वजह से बरसात के दौरान पानी का बहाव प्रभावित हो रहा है।
अगर समय रहते ये निर्माण कार्य पूरे कर लिए जाते तो द्रव्यवती नदी में पानी का प्रवाह बेहतर रहता और नदी की सुरक्षा पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ता।
जेडीए से जवाब तलब
हाईकोर्ट ने जेडीए की ओर से पेश वकील को अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने पूछा है कि नीरी की रिपोर्ट में सिफारिश के बावजूद अंबावाड़ी इलाके के पास, उससे पहले वाले हिस्से और शास्त्री नगर से विद्याधर नगर जाने वाली सड़क के बीच पहाड़ियों के आसपास अब तक सीमेंट-कंक्रीट ड्रेनेज चैनल क्यों नहीं बनाए गए।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब विशेषज्ञ संस्था ने इन जगहों पर निर्माण की जरूरत बताई थी, तब भी काम शुरू क्यों नहीं किया गया। इन जगहों पर निर्माण नहीं होने की वजह स्पष्ट की जाए।
मामले की अगली सुनवाई से पहले जेडीए को अपना जवाब दाखिल करना होगा। जेडीए को यह स्पष्ट करना होगा कि नीरी की रिपोर्ट के बावजूद अब तक जरूरी निर्माण कार्य क्यों नहीं किए गए और भविष्य में इस दिशा में क्या कदम उठाए जाएंगे।
पानी के बहाव को लेकर सवाल
याचिकाकर्ता का कहना था कि जिन निर्माण कार्यों की सिफारिश की गई थी, वे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। इसकी वजह से बरसात के दौरान पानी का बहाव प्रभावित हो रहा है और इसका असर द्रव्यवती नदी की सुरक्षा और संरक्षण पर भी पड़ रहा है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस चरण पर इन दलीलों पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।
हाईकोर्ट ने सिर्फ जेडीए से जवाब मांगा है कि नीरी की रिपोर्ट में सिफारिश के बावजूद निर्माण कार्य क्यों नहीं किए गए। जवाब मिलने के बाद ही मामले में आगे की सुनवाई होगी।
12 अगस्त को सुनवाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 तय की है।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस याचिका को इसी मुद्दे से जुड़ी एक अन्य लंबित याचिका के साथ सुना जाएगा।
अगली सुनवाई से पहले जेडीए को अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद खंडपीठ जेडीए के जवाब और दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे की सुनवाई करेगी।
