₹25 हजार करोड़ के कथित घोटाले पर हाईकोर्ट सख्त, पूर्व प्रबंधन को बड़ा झटका; सभी अंतरिम राहत खत्म, केंद्र सरकार को भी दिए अहम निर्देश
जोधपुर। देश के सबसे बड़े सहकारी वित्तीय घोटालों में शामिल आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी (ACCSL) मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला आदेश दिया हैं.
जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने करीब 20 लाख निवेशकों की वर्षों से फंसी जमा राशि वापस दिलाने के उद्देश्य से भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजीव खन्ना की अध्यक्षता में एक हाई पावर कमेटी गठित करने का आदेश दिया है।
साथ ही, पूर्व प्रबंधन, शेल कंपनियों और संबंधित पक्षों को मिली सभी अंतरिम राहतें समाप्त कर दी हैं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि यह मामला केवल कानूनी विवाद नहीं, बल्कि 20 लाख निवेशकों की जीवनभर की कमाई और आजीविका से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस मामले में शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।
साधारण धोखाधड़ी नहीं, संगठित व्हाइट कॉलर अपराध
सुनवाई के दौरान निवेशकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि आदर्श क्रेडिट और उसके प्रबंधन ने कथित रूप से शेल कंपनियों के जाल के माध्यम से जनता के लगभग ₹10 हजार करोड़ मूलधन और करीब ₹15 हजार करोड़ ब्याज, यानी कुल ₹25 हजार करोड़ की राशि का गबन किया।
निवेशकों के अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष इसे एक सुनियोजित व्हाइट कॉलर अपराध बताया गया।
2018 से निवेशकों को नहीं मिला पैसा, कई की हो चुकी मौत
अदालत को बताया गया कि वर्ष 2018 से अब तक निवेशकों को उनकी जमा राशि वापस नहीं मिली है।
आठ वर्षों से लाखों परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सुनवाई में यह भी कहा गया कि कई निवेशकों की इस दौरान मृत्यु हो चुकी है और अनेक परिवार इलाज, बेटियों की शादी तथा रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आर्थिक संकट झेल रहे हैं।
ऊंचे ब्याज का लालच, शेल कंपनियों में पहुंचा पैसा
Official Liquidator एच.एस. पटेल ने कोर्ट को बताया कि सोसायटी ने एजेंटों और बिचौलियों के माध्यम से 10 से 30 प्रतिशत तक कमीशन देकर निवेश जुटाया।
इसके बाद यह धन कथित रूप से प्रबंधन, उनके रिश्तेदारों और सहयोगियों द्वारा नियंत्रित शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया।
अधिकांश निवेश रियल एस्टेट कंपनियों में लगाया गया और धन देश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंचाया गया।
100 से अधिक आरोपियों पर चार्जशीट, कई अब भी फरार
लिक्विडेटर ने अदालत को बताया कि जांच एजेंसियां अब तक 100 से अधिक लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी हैं।
लगभग 14 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कुछ प्रमुख आरोपी अभी भी फरार हैं और कुछ अंतरिम अथवा सशर्त जमानत पर हैं।
ED ने ₹5 हजार करोड़ की संपत्तियां अटैच कीं
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत लगभग ₹5 हजार करोड़ बाजार मूल्य की संपत्तियां अटैच की हैं।
अदालत ने माना कि निवेशकों की पूरी राशि की भरपाई के लिए अभी और संपत्तियों की पहचान तथा कुर्की की आवश्यकता होगी।
केंद्र सरकार ने भी माना-अकेला लिक्विडेटर पर्याप्त नहीं
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने अदालत में स्वीकार किया कि यह असाधारण स्तर का घोटाला है और अकेले एक लिक्विडेटर के लिए इतनी बड़ी प्रक्रिया का प्रभावी संचालन संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि अदालत कोई उच्चस्तरीय समिति गठित करती है तो केंद्र सरकार उसका समर्थन करेगी।
पूर्व CJI संजीव खन्ना को मिली बड़ी जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली समिति परिसमापन प्रक्रिया की निगरानी करेगी।
समिति को चार्टर्ड अकाउंटेंट, अधिवक्ताओं और अन्य विशेषज्ञों की टीम गठित करने का अधिकार होगा।
केंद्र सरकार को समिति के कार्यालय, वित्तीय सहायता और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
पहली बैठक 5 अगस्त 2026 को होगी।
NLU जोधपुर और GNLU गांधीनगर भी करेंगे सहयोग
मामले की जटिलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर और गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, गांधीनगर को भी समिति के साथ शोध, केस स्टडी और कानूनी सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।