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पंजाब-हरियाणा के वकीलों के आंदोलन का असर: लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के मौजूदा LADC कॉन्ट्रैक्ट नही होंगे रिन्यू, NALSA ने लिया बड़ा फैसला

NALSA Ends Renewal of LADC Contracts After Punjab-Haryana Lawyers' Protest | Legal Aid Defense Counsel Scheme Under Review

LADCS स्कीम की समीक्षा तक देशभर में रुकेगा नवीनीकरण, जिला न्यायाधीश अब बार के वकीलों, विशेषकर युवाओं को सौंपेंगे लीगल एड के मामले

नई दिल्ली। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) के खिलाफ पिछले एक महीने से जारी वकीलों के आंदोलन के बीच नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (NALSA) ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

NALSA ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में कार्यरत लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) के अनुबंध सितंबर 2026 से आगे नवीनीकृत (Renew) नहीं किए जाएंगे।

इतना ही नहीं, NALSA ने यह भी निर्देश दिया है कि देश के अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी LADC के अनुबंध उनके वर्तमान कार्यकाल की समाप्ति के बाद आगे नहीं बढ़ाए जाएंगे।

जब तक LADCS स्कीम की समीक्षा पूरी नहीं हो जाती, तब तक कानूनी सहायता से जुड़े मामलों का आवंटन बार के अधिवक्ताओं, विशेषकर युवा वकीलों, को किया जाएगा।

नालसा ने अधिकारिक पत्र जारी कर इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी दी हैं.

बार एसोसिएशनों के साथ बैठक के बाद लिया गया निर्णय

NALSA के सदस्य सचिव संजीव पांडे ने देश के सभी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों (SLSAs) के सदस्य सचिवों को पत्र भेजकर इस निर्णय की जानकारी दी हैं.

यह फैसला 3 अगस्त 2026 को पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के विभिन्न बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया।

बैठक में बार प्रतिनिधियों ने LADCS स्कीम के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर आपत्तियां और चिंताएं व्यक्त कीं।

इसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने उनसे स्कीम में मौजूद व्यावहारिक कमियों और संचालन संबंधी समस्याओं पर विशिष्ट, ठोस और रचनात्मक सुझाव देने को कहा। साथ ही यह भी बताया गया कि LADCS स्कीम की समीक्षा के लिए एक समिति पहले ही गठित की जा चुकी है।

NALSA के तीन बड़े निर्देश

समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने तक नालसा ने मुख्य रूप से तीन दिशानिर्देश जारी किए हैं. —

1 पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में सितंबर 2026 से LADC के किसी भी अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा।

2 देश के शेष सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूदा अनुबंध समाप्त होने के बाद उनका नवीनीकरण नहीं होगा।

3 संबंधित जिलों के जिला एवं सत्र न्यायाधीश कानूनी सहायता के मामलों को LADC के बजाय बार एसोसिएशन के सदस्यों, विशेषकर युवा अधिवक्ताओं, को सौंपेंगे।

कार्यकारी अध्यक्षों के समक्ष रखा जाएगा मामला

NALSA ने अपने पत्र में सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश विधिक सेवा प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले को अपने-अपने कार्यकारी अध्यक्ष (Executive Chairperson) के समक्ष विचारार्थ रखा जाए, ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके।

क्या है LADCS स्कीम?

लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) को उन गरीब और जरूरतमंद आरोपियों को गुणवत्तापूर्ण कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, जो निजी वकील रखने में सक्षम नहीं हैं।

इस योजना के तहत वेतनभोगी लीगल एड डिफेंस काउंसिल नियुक्त किए जाते हैं, जो आपराधिक मामलों में अभियुक्तों का बचाव करते हैं। इस मॉडल को ‘पब्लिक डिफेंडर सिस्टम’ की तर्ज पर विकसित किया गया था और इसे पहले से प्रचलित पैनल लॉयर सिस्टम के विकल्प के रूप में लागू किया गया।

क्यों हो रहा था विरोध?

पंजाब के अधिवक्ता लंबे समय से इस योजना का विरोध कर रहे थे। उनका कहना है कि LADCS के माध्यम से सरकार ने एक समानांतर सरकारी आपराधिक बचाव तंत्र खड़ा कर दिया है, जिससे स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं के कार्य और आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

वकीलों का यह आंदोलन धीरे-धीरे हरियाणा और चंडीगढ़ के कई जिलों तक फैल गया। गतिरोध समाप्त करने के लिए बार एसोसिएशनों और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के बीच कई दौर की वार्ताएं भी हुईं।

पिछले सप्ताह पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन भी इस आंदोलन में शामिल हो गई थी। अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट में न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया और हाईकोर्ट परिसर में प्रदर्शन कर LADCS स्कीम वापस लेने की मांग की।

देशभर पर पड़ेगा असर

NALSA के इस निर्णय का प्रभाव केवल पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा। क्योंकि प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूदा LADC अनुबंध समाप्त होने के बाद उनका नवीनीकरण नहीं किया जाएगा, इसलिए अब LADCS स्कीम की समीक्षा पूरी होने तक कानूनी सहायता व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

जिला न्यायाधीशों द्वारा लीगल एड के मामलों को बार के अधिवक्ताओं को सौंपने का निर्णय विशेष रूप से युवा वकीलों के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है, वहीं LADCS स्कीम के भविष्य को लेकर अब सभी की निगाहें NALSA की गठित समीक्षा समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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