रालसा और नालसा के सदस्य सचित सहित जयपुर महानगर द्वितीय के जिला सचिव को नोटिस जारी
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल के रूप में कार्यरत अधिवक्ता की सेवाएं समाप्त किए जाने के मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम राहत देते हुए संबंधित आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले में उठाए गए उन सवालों पर संज्ञान लिया, जिनमें बिना जांच के सेवाओं को “असंतोषजनक” बताकर कार्रवाई करने और नियुक्ति प्राधिकारी से अलग प्राधिकारी द्वारा सेवा समाप्ति का आदेश जारी करने का कानूनी मुद्दा उठाया गया हैं.
जस्टिस अनूरूप सिंघी की एकलपीठ ने विक्रमादित्य सिंह राघव की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया हैं.
एकलपीठ ने इसके साथ ही राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) के और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव के साथ ही जयपुर महानगर द्वितीय जिला प्राधिकरण के अध्यक्ष पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट ने इसके साथ ही आगामी आदेश तक 9 जनवरी 2026 और 12 जनवरी 2026 के विवादित आदेशों के प्रभाव और संचालन पर रोक लगा दी।
2023 में हुई थी नियुक्ति
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सत्येंद्र सिंह राघव ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति 9 जनवरी 2023 को हुई थी और नियुक्ति आदेश राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) के सदस्य सचिव की ओर से जारी किया गया था।
याचिका में कहा गया कि वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर महानगर-द्वितीय में असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे।
मामले में 9 जनवरी 2026 को याचिकाकर्ता का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाने का आदेश जारी किया गया, जिसके बाद 12 जनवरी 2026 को उनकी सेवाएं “असंतोषजनक सेवाओं” के आधार पर समाप्त करने का आदेश पारित किया गया।
‘असंतोषजनक सेवा’ का आरोप, लेकिन जांच नहीं हुई
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि सेवा समाप्ति का आदेश मनमाना और कलंककारी प्रकृति का है।
अधिवक्ता ने कहा कि किसी व्यक्ति की पेशेवर सेवाओं को “असंतोषजनक” बताना उसके पेशेवर आचरण और प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, इसलिए ऐसी टिप्पणी या कार्रवाई से पहले उचित जांच की जानी आवश्यक थी।
हाईकोर्ट के समक्ष यह भी बताया गया कि 6 जनवरी 2026 को याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस दिया गया था और उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए पांच दिन का समय दिया गया था।
याचिकाकर्ता ने 9 जनवरी को ही अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया, लेकिन व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिए बिना उसी दिन कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाने का आदेश पारित कर दिया गया और इसके तीन दिन बाद सेवा समाप्ति का आदेश भी जारी कर दिया गया।
नियुक्ति करने वाला और सेवा समाप्त करने वाला प्राधिकारी अलग
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति का आदेश RALSA के सदस्य सचिव द्वारा जारी किया गया था, जबकि सेवा समाप्ति का विवादित आदेश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर महानगर-द्वितीय के अध्यक्ष द्वारा जारी किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सेवा समाप्ति का आदेश जारी करने वाला प्राधिकारी नियुक्ति प्राधिकारी नहीं था और इसलिए उसे इस तरह की कार्रवाई करने का अधिकार नहीं था।
हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर दोनों आदेशों पर लगाई रोक
याचिकाकर्ता की दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को चार सप्ताह में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई बाद में सूचीबद्ध की जाएगी।
हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि अगले आदेश तक 9 जनवरी 2026 के कार्यकाल नहीं बढ़ाने के आदेश और 12 जनवरी 2026 के सेवा समाप्ति आदेश के प्रभाव और संचालन पर रोक रहेगी।
