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सिर्फ वाहन का रजिस्टर्ड मालिक होने से नहीं बनता NDPS केस का आरोपी-राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Rajasthan High Court: Vehicle Owner Cannot Be Prosecuted Under NDPS Act Solely Because He Is the Registered Owner

हाईकोर्ट ने कहा-वाहन में मिले गांजे के मामले में मालिक की जानकारी या संलिप्तता साबित होना जरूरी; दो साल पहले बाइक बेच चुके व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश रद्द

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने NDPS एक्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल किसी वाहन का रजिस्टर्ड मालिक होने के आधार पर उसके मालिक को मादक पदार्थों की तस्करी या परिवहन के अपराध में आरोपी नहीं बनाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष को यह दिखाने के लिए कम से कम प्रथम दृष्टया साक्ष्य पेश करना होगा कि वाहन मालिक को अपराध की जानकारी थी या उसने जानबूझकर अपने वाहन का इस्तेमाल अपराध के लिए होने दिया था।

जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने अलवर निवासी अनिकेत की याचिका स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 8/25 के तहत आरोप तय करने के आदेश को रद्द कर दिया और उसे मामले से डिस्चार्ज कर दिया।

मामले में सबसे बड़ा तथ्य ये हैं कि घटना से करीब दो साल पहले ही याचिकाकर्ता ने वाहन को बेच दिया था.

बाइक पर सवार दो लोगों से मिला था 500 ग्राम गांजा

मामला अलवर जिले के मालाखेड़ा थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, 31 जनवरी 2022 को पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक मोटरसाइकिल को रोका, जिस पर दो व्यक्ति सवार थे।

तलाशी के दौरान एक आरोपी के पास से 300 ग्राम और दूसरे के पास से 200 ग्राम गांजा बरामद हुआ।

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।

जांच के बाद पुलिस ने मोटरसाइकिल के तत्कालीन रजिस्टर्ड मालिक रहे अनिकेत को भी आरोपी बना दिया।

उसके खिलाफ केवल इस आधार पर कार्रवाई की गई कि बरामदगी के समय इस्तेमाल की गई बाइक उसके नाम पर रजिस्टर्ड थी।

बाद में ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ धारा 8/25 NDPS एक्ट के तहत आरोप तय किए और सेशन कोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा।

हाईकोर्ट ने पाया-बाइक दो साल पहले ही बेच दी

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उसने मोटरसाइकिल को घटना से करीब दो साल पहले ही सह-आरोपी को बेच दिया था और उस समय से बाइक उसी के कब्जे और उपयोग में थी।

रिकॉर्ड पर मौजूद गवाह के बयान से भी यह तथ्य सामने आया कि बाइक 2 दिसंबर 2019 को सह-आरोपी को बेची गई थी, हालांकि तकनीकी कारणों से उसका रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर नहीं हो पाया था।

हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि सह-आरोपी ने खुद को बाइक का मालिक बताते हुए ट्रायल कोर्ट से उसकी सुपुर्दगी मांगी थी, जिसे मंजूर करते हुए बाइक उसे सौंप दी गई थी।

सिर्फ मालिकाना हक से अपराध की जानकारी साबित नहीं होती

हाईकोर्ट ने कहा कि NDPS एक्ट की धारा 25 में इस्तेमाल किया गया शब्द “जानबूझकर” (knowingly) बेहद महत्वपूर्ण है।

किसी वाहन या संपत्ति का मालिक केवल इसलिए अपराध का दोषी नहीं हो सकता कि उसकी संपत्ति का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति ने अपराध के लिए किया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन को कम से कम प्रथम दृष्टया यह साबित करना होगा कि वाहन मालिक को जानकारी थी कि उसका वाहन मादक पदार्थ रखने, छिपाने या ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

केवल वाहन के स्वामित्व या रजिस्ट्रेशन के आधार पर आपराधिक दायित्व तय नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलो का हवाला देते हुए कहा कि NDPS कानून के कड़े प्रावधानों का अर्थ यह नहीं है कि आपराधिक कानून के मूल सिद्धांतों को नजरअंदाज कर दिया जाए।

विशेष रूप से जब किसी वाहन के मालिक को चालक या अन्य व्यक्ति के कथित अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा हो, तो उसकी जानकारी, सहमति या संलिप्तता का आधार होना जरूरी है।

कोर्ट ने कहा कि जब तक अभियोजन यह नहीं दिखाता कि मालिक को अपराध की जानकारी थी या उसने जानबूझकर वाहन के आपराधिक इस्तेमाल की अनुमति दी थी, तब तक केवल मालिक होने के आधार पर उसके खिलाफ आपराधिक दायित्व नहीं लगाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने दोनों निचली अदालतों के आदेश किए रद्द

मामले के तथ्यों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 8/25 के तहत मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं थी। अदालत ने माना कि केवल बाइक का रजिस्ट्रेशन याचिकाकर्ता के नाम होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसने जानबूझकर बाइक को अपराध के लिए इस्तेमाल करने दिया था।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा 21 सितंबर 2024 को आरोप तय करने और सेशन कोर्ट द्वारा 30 जनवरी 2025 को उस आदेश को बरकरार रखने के फैसले को रद्द कर दिया। याचिकाकर्ता को NDPS एक्ट के आरोप से डिस्चार्ज कर दिया गया।

हाईकोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि NDPS जैसे गंभीर कानून के तहत भी किसी व्यक्ति को केवल तकनीकी रूप से वाहन का रजिस्टर्ड मालिक होने के कारण आरोपी नहीं बनाया जा सकता। अपराध में उसकी जानकारी, सहमति या प्रत्यक्ष संलिप्तता का प्रथम दृष्टया आधार होना जरूरी है।

मामला: S.B. Criminal Miscellaneous (Petition) No. 3023/2025
याचिकाकर्ता: अनिकेत बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य
फैसले की तारीख : 23 जुलाई 2026
राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर बेंच—जस्टिस अनिल कुमार उपमन
अधिवक्ता — ए के गुप्ता, एस पी सिंह, गौरव अग्रवाल, सरवत आलम, आशुतोष सिंह नरूका
मुख्य मुद्दा: केवल वाहन का रजिस्टर्ड मालिक होने के आधार पर NDPS एक्ट के तहत आपराधिक जिम्मेदारी तय की जा सकती है या नहीं; अपराध में मालिक की जानकारी या जानबूझकर अनुमति का प्रमाण आवश्यक है।

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