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BREAKING: ₹500 के विवाद में ₹5 लाख का पूरा बैंक अकाउंट फ्रीज क्यों? साइबर फ्रॉड मामलों में बैंक अकाउंट फ्रीज करने पर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Rajasthan High Court Issues Detailed Guidelines on Freezing Bank Accounts in Cyber Fraud Cases
  • August 23, 2026
  • 2:19 pm

साइबर फ्रॉड मामलों में बैंक अकाउंट फ्रीज करने के नियम करने होंगे तय, राज्य के DGP को 4 सप्ताह में सर्कुलर जारी करने का आदेश, RBI को भी आदेश

जयपुर। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में बैंक खातों को फ्रीज करने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि किसी संदिग्ध साइबर ट्रांजैक्शन के आधार पर बिना उचित कारण पूरे बैंक खाते को अनिश्चितकाल के लिए फ्रीज नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि जहां विवादित राशि की पहचान संभव हो, वहां सामान्यतः केवल उसी रकम पर लियन या होल्ड लगाया जाना चाहिए और खाते की शेष वैध राशि का संचालन खाताधारक को करने दिया जाना चाहिए।

जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने अपने फैसले में साइबर फ्रॉड से जुड़े बैंक खाते फ्रीज करने, डेबिट फ्रीज करने और लियन के मामलों में विस्तार से दिशानिर्देश जारी किए हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है, लेकिन जांच के नाम पर किसी निर्दोष व्यक्ति या कारोबारी के पूरे बैंक खाते को बिना पर्याप्त आधार और अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं किया जा सकता।

जांच और नागरिकों के आर्थिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना कानून की अनिवार्य शर्त है।

कोर्ट ने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें साइबर फ्रॉड की किसी एक संदिग्ध ट्रांजैक्शन के कारण पूरे बैंक खाते को निष्क्रिय कर दिया जाता है, जिससे निर्दोष नागरिकों और कारोबारियों को गंभीर आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है।

₹500 के विवाद में ₹5 लाख का अकाउंट क्यों फ्रीज?

राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुपातिकता के सिद्धांत पर जोर देते हुए एक उदाहरण दिया कि यदि कथित साइबर फ्रॉड की रकम केवल ₹500 है और बैंक खाते में ₹5 लाख जमा हैं, तो जांच के उद्देश्य के लिए ₹500 की राशि को सुरक्षित रखना पर्याप्त हो सकता है।

शेष ₹4,99,500 तक खाताधारक की पहुंच पूरी तरह रोक देना सामान्यतः उचित नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि विवादित रकम को होल्ड करना और पूरे खाते को फ्रीज करना दो अलग-अलग बातें हैं।

कोर्ट ने माना कि बैंक खाता आज केवल पैसा रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी, वेतन, कारोबार, कर्मचारियों को भुगतान, टैक्स और अन्य आवश्यक खर्चों से जुड़ा हुआ है।

इसलिए पूरे खाते को फ्रीज करने के गंभीर नागरिक और आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।

जांच जरूरी, लेकिन कार्रवाई कानून और तर्क के आधार पर हो

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि साइबर अपराधों की जांच और पीड़ितों के पैसे को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

जांच एजेंसियां संदिग्ध रकम को बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई कर सकती हैं, लेकिन ऐसी अस्थायी कार्रवाई को बिना समीक्षा के अनिश्चितकालीन और अनुपातहीन प्रतिबंध में नहीं बदला जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी खाते पर रोक लगाने या उसे जारी रखने से पहले जांच अधिकारी के पास खाते या संबंधित ट्रांजैक्शन और अपराध के बीच प्रथम दृष्टया संबंध दर्शाने वाली सामग्री होनी चाहिए।

केवल “संदिग्ध ट्रांजैक्शन”, “म्यूल अकाउंट” या “साइबर फ्रॉड” जैसे शब्दों के आधार पर पूरे खाते को लंबे समय तक निष्क्रिय नहीं रखा जा सकता।

कब पूरे बैंक खाते को फ्रीज किया जा सकता है?

कोर्ट ने कहा कि कुछ असाधारण परिस्थितियों में पूरे खाते को फ्रीज करना उचित हो सकता है।

उदाहरण के तौर पर, यदि खाता जानबूझकर चलाया जा रहा म्यूल अकाउंट प्रतीत हो, उसमें लगातार संदिग्ध लेन-देन और आगे धन हस्तांतरण हो रहे हों, खाताधारक की अपराध में सचेत भागीदारी के सबूत हों या संदिग्ध रकम को अलग-अलग पहचानना संभव न हो।

लेकिन ऐसी स्थिति में भी पूरे खाते को फ्रीज करने के विशिष्ट कारण लिखित रूप में दर्ज करना और समय-समय पर प्रतिबंध की समीक्षा करना जरूरी होगा।

जांच एजेंसी के पत्र पर आंख बंद कर न करें कार्रवाई

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि जांच एजेंसी द्वारा बैंक को भेजे जाने वाले फ्रीज या होल्ड संबंधी पत्र में, जहां जांच की गोपनीयता प्रभावित न हो, पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए।

इसमें जांच अधिकारी का नाम और पद, संबंधित पुलिस स्टेशन या एजेंसी, FIR/क्राइम/NCRP/CFCFRMS संदर्भ, कानूनी प्रावधान, संबंधित खाता, ट्रांजैक्शन और विवादित राशि जैसी जानकारी शामिल होनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि बैंक किसी एक संदिग्ध ट्रांजैक्शन से संबंधित सूचना को बिना जांचे पूरे खाते के अनिश्चितकालीन फ्रीज में नहीं बदल सकते।

जांच खत्म या क्लीन चिट तो तुरंत हटे प्रतिबंध

फैसले में कहा गया कि यदि जांच पूरी हो जाती है, क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हो जाती है, खाताधारक को दोषमुक्त कर दिया जाता है या जांच अधिकारी को खाते अथवा रकम की आगे आवश्यकता नहीं रहती, तो बैंक को प्रतिबंध हटाने के लिए तुरंत आवश्यक सूचना भेजी जानी चाहिए।

बैंक को इसके बाद पुलिस द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को शीघ्र हटाना होगा, हालांकि कानून के तहत किसी अन्य स्वतंत्र प्रतिबंध की स्थिति अलग हो सकती है।

शिकायत पर 7 दिन के भीतर कार्रवाई की प्रक्रिया

हाईकोर्ट ने 2 जनवरी 2026 की Standard Operating Procedure (SOP) का कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया।

फैसले के अनुसार, प्रभावित खाताधारक की शिकायत मिलने पर बैंक को निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत को CFCFRMS के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा।

SOP में बैंक द्वारा शिकायत को अधिकतम सात कैलेंडर दिनों के भीतर आगे भेजने की व्यवस्था का उल्लेख है।

हाईकोर्ट ने कहा कि खाताधारक को बैंक से पुलिस और फिर दूसरे राज्य की एजेंसी के चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

जहां फ्रीज किसी दूसरे राज्य की जांच एजेंसी के अनुरोध पर किया गया है, वहां राजस्थान पुलिस और संबंधित बैंक को उस एजेंसी से समन्वय कर आवश्यक जानकारी हासिल करनी चाहिए।

DGP को 4 सप्ताह में सर्कुलर जारी करने का निर्देश, RBI को भी आदेश

हाईकोर्ट ने राजस्थान के पुलिस महानिदेशक और साइबर क्राइम विंग के अधिकारियों को फैसले की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जनरल सर्कुलर/स्टैंडिंग ऑर्डर जारी करने का आदेश दिया।

इसके तहत सभी जांच अधिकारियों को बैंक खाते फ्रीज करने से जुड़े कानूनी प्रावधानों, SOP और कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा।

लंबे समय तक जारी फ्रीज की निगरानी के लिए राज्य स्तर पर एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक को भी सभी अनुसूचित बैंकों और अन्य विनियमित बैंकिंग संस्थाओं के लिए उचित सर्कुलर या एडवाइजरी जारी कर बैंक अधिकारियों को साइबर फ्रॉड, लियन, अकाउंट फ्रीज और शिकायत निवारण की प्रक्रिया पर नियमित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए हैं।

सभी समान मामलों पर लागू होंगे निर्देश

हाईकोर्ट ने Shree Balaji Enterprises सहित सभी याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं का निस्तारण करते हुए कहा कि बैंक और जांच अधिकारी संबंधित खातों पर लगाए गए प्रतिबंधों की समीक्षा करें।

जहां विवादित राशि स्पष्ट रूप से पहचानी जा सकती है और पूरे खाते को फ्रीज करने का कोई ठोस आधार नहीं है, वहां केवल विवादित रकम पर रोक लगाकर बाकी राशि के संचालन की अनुमति दी जाए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये निर्देश केवल इस मामले के याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि राजस्थान में साइबर वित्तीय अपराधों की जांच के दौरान बैंक खातों के फ्रीज, डेबिट फ्रीज, लियन, होल्ड या जब्ती से जुड़े सभी समान मामलों में सामान्य दिशानिर्देश के रूप में लागू होंगे।

हाईकोर्ट ने राजस्थान के DGP, साइबर क्राइम विंग और RBI को आठ सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है।

REPORTABLE JUDGEMENT
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