हाईकोर्ट ने कहा-याचिका के गंभीर आरोप गलत या निराधार साबित हुए और चयनित अभ्यर्थी की आपत्तियां सही पाई गईं तो याचिकाकर्ता पर ₹10 लाख तक की कॉस्ट लगाई जा सकती है
जयपुर। आयुर्वेद विभाग, अजमेर में कायाचिकित्सा विभाग के लेक्चरर पद पर चयनित अभ्यर्थी के चयन को चुनौती देने वाली याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
याचिका में भर्ती में चयनित अभ्यर्थी और इंटरव्यू लेने वाले परीक्षकों के बीच कथित मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इन गंभीर आरोपों को याचिका का आधार बनाए जाने को लेकर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के नाम ₹1 लाख का डिमांड ड्राफ्ट जमा कराने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि याचिका में लगाए गए आरोप गलत या निराधार साबित होते हैं और चयनित अभ्यर्थी की ओर से उठाई गई आपत्तियां सही पाई जाती हैं, तो याचिकाकर्ता पर ₹10 लाख तक की कॉस्ट लगाई जा सकती है।
जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने मुकेश श्रीमाल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
वहीं, मामले में चयनित अभ्यर्थी देवेश जैमन की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ जैन मूथा ने पक्ष रखा।
2015 से कई याचिकाएं दायर करने का आरोप
सुनवाई के दौरान चयनित अभ्यर्थी की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ जैन मूथा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने वर्ष 2015 से 2023 के बीच आयुर्वेद विश्वविद्यालय और संबंधित विभागों के खिलाफ कई याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की हैं।
इसे आधार बनाते हुए याचिकाकर्ता को आदतन मुकदमेबाज बताया गया।
चयनित अभ्यर्थी की ओर से यह भी कहा गया कि याचिका में सफल अभ्यर्थी और इंटरव्यू लेने वाले परीक्षकों के बीच कथित मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इन आरोपों के जवाब में चयनित अभ्यर्थी की ओर से न्यायालय के समक्ष शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया गया।
₹1 लाख जमा कराने का आदेश
मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता RPSC के पक्ष में ₹1 लाख की राशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा कराए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राशि जब्त की जाएगी या वापस की जाएगी, इसका निर्णय याचिका के अंतिम परिणाम के आधार पर किया जाएगा।
आरोप गलत साबित हुए तो ₹10 लाख तक की कॉस्ट संभव
कोर्ट ने मामले में यह भी संकेत दिया कि यदि सफल अभ्यर्थी की ओर से उठाई गई आपत्तियां सही पाई जाती हैं और याचिका में लगाए गए आरोपों का उचित आधार नहीं मिलता है, तो याचिकाकर्ता पर ₹10 लाख तक की कॉस्ट लगाई जा सकती है।
हाईकोर्ट का यह रुख भर्ती प्रक्रिया और सफल अभ्यर्थियों के खिलाफ लगाए जाने वाले गंभीर आरोपों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर आरोप लगाने के लिए उनके समर्थन में उचित और ठोस आधार होना आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा है कि भर्ती प्रक्रिया या सफल अभ्यर्थियों पर गंभीर आरोप लगाने के लिए ठोस आधार होना जरूरी है।
केवल आरोपों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं, तो याचिकाकर्ता को गंभीर परिणामों और भारी कॉस्ट का सामना करना पड़ सकता है।
22 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की है।
