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झीलों के आसपास निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा- राजस्थान के हिल एरिया में कब लागू होंगे नए बिल्डिंग नियम? सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

Rajasthan High Court Questions Delay in Implementing Hill Area Building Rules

जोधपुर: राजस्थान के झीलों और पहाड़ी इलाकों में निर्माण को लेकर अब राज्य सरकार को राजस्थान हाईकोर्ट के सवालों का जवाब देना होगा।

हाईकोर्ट ने राजस्थान के हिल एरिया वाले शहरों में नए बिल्डिंग नियम लागू करने को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

हाईकोर्ट ने पूछा कि केंद्र सरकार की ओर से जारी स्टैंडर्डाइज्ड डेवलपमेंट एंड बिल्डिंग रेगुलेशंस, 2023 को राजस्थान के झीलों और हिल एरिया वाले शहरों में लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई पर पूरी स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

यह निर्देश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने झील संरक्षण समिति बनाम राज्य सरकार समेत तीन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया।

इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एस. सिंघवी ने कोर्ट का ध्यान केंद्र सरकार की ओर से जारी स्टैंडर्डाइज्ड डेवलपमेंट एंड बिल्डिंग रेगुलेशंस, 2023 की ओर दिलाया।

इसके बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि इन नियमों को अपनाने और लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

सरकार से क्या पूछा?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर यह बताया जाए कि राजस्थान सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों में आने वाले शहरों के लिए इन नए भवन नियमों को अपनाने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं।

साथ ही स्थानीय जरूरतों के हिसाब से इन नियमों को अपनाने की दिशा में क्या कार्रवाई हुई है, इसकी पूरी जानकारी भी कोर्ट के सामने रखी जाए।

क्या हैं स्टैंडर्डाइज्ड डेवलपमेंट एंड बिल्डिंग रेगुलेशंस, 2023?

हाईकोर्ट को बताया गया कि स्टैंडर्डाइज्ड डेवलपमेंट एंड बिल्डिंग रेगुलेशंस, 2023 केंद्र सरकार की ओर से तैयार किए गए ऐसे मानक हैं, जिनका उद्देश्य पूरे देश में भवन निर्माण से जुड़े नियमों में एकरूपता लाना है।

इन्हें ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) ने तैयार किया है, ताकि अलग-अलग राज्यों और नियामक संस्थाओं के नियमों को समय के अनुसार बेहतर बनाया जा सके।

इन नियमों का मकसद भवन निर्माण से जुड़े प्रावधानों को नए समय की जरूरतों के मुताबिक अपडेट करना, मंजूरी की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और पंजीकृत भवन विशेषज्ञों के माध्यम से लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी के अधिक इस्तेमाल और भवन निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड को बेहतर तरीके से तैयार करने पर भी जोर दिया गया है।

हिल एरिया के लिए भी अलग दिशा-निर्देश

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इन मानकों में पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों जैसे विशेष भौगोलिक इलाकों के लिए अलग दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।

यानी जिन शहरों की भौगोलिक परिस्थितियां सामान्य क्षेत्रों से अलग हैं, वहां निर्माण के लिए अलग मानकों का पालन करने की व्यवस्था की गई है।

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन नियमों को न्यूनतम बदलाव के साथ लागू करें। ताकि अलग-अलग क्षेत्रों की परिस्थितियों के मुताबिक उनका प्रभावी इस्तेमाल हो सके।

हालांकि, बदलाव केवल वहीं किए जाएं, जहां उनकी जरूरत हो। बाकी नियमों की मूल संरचना को बरकरार रखा जाए।

क्यों उठा यह मुद्दा?

यह मुद्दा झील संरक्षण समिति, बसंत होटल्स प्राइवेट लिमिटेड और उदयपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़ी तीन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान उठा।

वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एस. सिंघवी ने कोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया कि केंद्र सरकार पहले ही भवन निर्माण के लिए नए मानक जारी कर चुकी है।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि राजस्थान सरकार ने खासकर झीलों और पहाड़ी क्षेत्रों वाले शहरों में इन्हें लागू करने की दिशा में क्या तैयारी की है।

इसी के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में पूरी जानकारी मांगी और अगली सुनवाई तक पूरी स्टेटस रिपोर्ट तैयार रखने के निर्देश दिए।

सिर्फ झील संरक्षण नहीं, निर्माण नियमों का भी मामला

यह मामला केवल झील संरक्षण तक सीमित नहीं रहा। सुनवाई के दौरान जब केंद्र सरकार के नए भवन नियमों का मुद्दा उठा तो हाईकोर्ट ने इसे भी महत्वपूर्ण माना।

हाईकोर्ट ने माना कि यदि केंद्र सरकार पूरे देश के लिए भवन निर्माण के मानक तय कर चुकी है और उनमें पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भी विशेष प्रावधान हैं, तो यह जानना जरूरी है कि राजस्थान ने उन्हें अपनाने की दिशा में क्या पहल की है।

इसी वजह से राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी गई।

18 अगस्त को अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 तय की है।

तब तक राज्य सरकार, केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को अपने जवाब, शपथपत्र और जरूरी दस्तावेज दाखिल करने होंगे।

इसके साथ ही राज्य सरकार को यह भी बताना होगा कि स्टैंडर्डाइज्ड डेवलपमेंट एंड बिल्डिंग रेगुलेशंस, 2023 को राजस्थान के हिल एरिया वाले शहरों में लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे की क्या योजना है।

अब 18 अगस्त की सुनवाई पर राज्य सरकार को हाईकोर्ट के सामने यह बताना होगा कि केंद्र सरकार के नए बिल्डिंग नियमों को राजस्थान के पहाड़ी क्षेत्रों और झीलों के आसपास के शहरों में लागू करने की दिशा में अब तक कितनी प्रगति हुई है।

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