जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने सोमवार को कार्यभार संभालते ही हाईकोर्ट का नया रोस्टर जारी कर दिया। नए रोस्टर के सामने आते ही न्यायिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है।
नए रोस्टर के तहत अब तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी संभाल रहे जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को हाईकोर्ट के अधिकांश महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई से हटा दिया गया है।
आगामी आदेश तक उन्हें मुख्य रूप से कैट (Central Administrative Tribunal) से संबंधित मामलों की सुनवाई का दायित्व सौंपा गया है।

आगामी आदेश तक CAT मामलों की सुनवाई
नए रोस्टर के मुताबिक जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा आगामी आदेश तक मुख्य रूप से CAT मामलों की सुनवाई करेंगे। इसके अलावा उनके समक्ष अन्य श्रेणी के मामलों की सुनवाई को लेकर रोस्टर में निर्धारित प्रावधान लागू होंगे।
मुख्य न्यायाधीश के कार्यभार संभालने के तत्काल बाद जारी हुए इस रोस्टर को राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायिक कामकाज में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
पदभार के बाद पहला आदेश
गौरतलब है कि जस्टिस संजय के. अग्रवाल ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट के 44वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला।
पदभार ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट के न्यायिक कार्य के लिए नया रोस्टर जारी किया।
नए रोस्टर के प्रभावी होने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट में विभिन्न न्यायाधीशों के बीच मामलों के आवंटन में बदलाव हुआ है। इनमें सबसे प्रमुख बदलाव जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के रोस्टर को लेकर सामने आया है।
एक सप्ताह में दो बार रोस्टर
पिछले एक सप्ताह में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहते हुए जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने 1 अगस्त और 4 अगस्त को रोस्टर में बदलाव किया था.

गौरतलब हैं कि रविवार को सप्लीमेंट्री कॉज लिस्ट बदलाव करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कई मामले खुद के समक्ष सुनवाई के लिए रखे थे.
सोमवार की कॉज लिस्ट में अचानक किए गए इन बदलावों को लेकर हाईकोर्ट के न्यायिक और अधिवक्ता गलियारों में चर्चाएं तेज थी

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में संभाली थी जिम्मेदारी
जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके पास मुख्य न्यायाधीश के रूप में कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई भी थी।
अब नए मुख्य न्यायाधीश के कार्यभार संभालने के बाद जारी किए गए रोस्टर में न्यायिक कार्य का पुनर्विन्यास किया गया है। इसके तहत जस्टिस शर्मा के समक्ष लंबित अधिकांश महत्वपूर्ण मामलों को अन्य पीठों को आवंटित किया गया है।