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जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी बने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के 39वें मुख्य न्यायाधीश, श्रीनगर में भव्य शपथग्रहण समारोह

Justice Pushpendra Singh Bhati Takes Oath as 39th Chief Justice of J&K and Ladakh High Court

श्रीनगर। राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के 39वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली।

श्रीनगर के सालिमार कन्वेंशन सेंटर में आयोजित भव्य शपथग्रहण समारोह में उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपने नए दायित्व की औपचारिक रूप से जिम्मेदारी संभाली।

जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण के साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट में उनके लंबे न्यायिक सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा हुआ और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके न्यायिक जीवन के नए अध्याय की शुरुआत हुई।

शपथग्रहण समारोह में राजस्थान के न्यायिक जगत की जबरदस्त मौजूदगी

जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी के शपथग्रहण समारोह में राजस्थान के न्यायिक एवं विधिक जगत की विशेष मौजूदगी देखने को मिली। राजस्थान हाईकोर्ट के कई सिटिंग जज, पूर्व न्यायाधीश और बड़ी संख्या में अधिवक्ता विशेष रूप से श्रीनगर पहुंचे।

राजस्थान से करीब 200 अधिवक्ता जस्टिस भाटी के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ के ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने श्रीनगर पहुंचे। देशभर से न्यायिक और विधिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी ने समारोह की गरिमा और बढ़ा दी।

शपथग्रहण समारोह में पहुंचीं दिग्गज न्यायिक हस्तियां

समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस दिनेश मेहता, जस्टिस एन.एस. सेखावत, जस्टिस वासुदेव सांबरे, जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव और जस्टिस संजय वशिष्ठ सहित कई न्यायाधीश श्रीनगर पहुंचे।

वहीं राजस्थान हाईकोर्ट से जस्टिस इन्द्रजीत सिंह, जस्टिस विनीत माथुर, जस्टिस अरुण मोंगा, जस्टिस कुलदीप माथुर, जस्टिस अशोक कुमार जैन, जस्टिस मुकेश राजपुरोहित, जस्टिस सुनील बेनीवाल, जस्टिस संदीप साह और जस्टिस रवि चिरानिया सहित कई न्यायाधीश श्रीनगर पहुंचे।

इसके अलावा जस्टिस गोविंद माथुर, जस्टिस के.एस. अहलुवालिया और जस्टिस निर्मलजीत कौर सहित कई पूर्व मुख्य न्यायाधीश और पूर्व न्यायाधीश भी जस्टिस भाटी के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने श्रीनगर पहुंचे।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के पारिवारिक सदस्य भी समारोह में शामिल

जस्टिस भाटी के शपथग्रहण समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई के पारिवारिक सदस्य भी मौजूद रहे। इससे समारोह में राजस्थान के न्यायिक परिवार की उपस्थिति और भी विशेष हो गई।

पारिवारिक सदस्यों की भी रही विशेष मौजूदगी

जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी के इस ऐतिहासिक अवसर पर उनके परिवार के सदस्य भी विशेष रूप से समारोह में शामिल हुए। माताजी सरोजनी चौहान, ग्रुप कैप्टन करणसिंह भाटी, ऐश्वर्या भाटी, डॉ. जस्टिस नूपुर भाटी, चित्रांगदा सिंह, चन्द्रगुप्त सिंह, सुनीता सिंह, मानवेन्द्र सिंह, अनिरुद्ध सिंह, अभिजीत सिंह, माधव और केशव सहित परिवार के अन्य सदस्य इस महत्वपूर्ण अवसर के साक्षी बने।

परिवार और न्यायिक जगत के वरिष्ठ सदस्यों की मौजूदगी ने जस्टिस भाटी के शपथग्रहण समारोह को भावनात्मक और यादगार बना दिया।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का पूरा न्यायिक परिवार रहा मौजूद

शपथग्रहण समारोह में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीशों के अलावा न्यायिक अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रशासनिक एवं न्यायिक क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों ने भी समारोह में भाग लिया।

इस दौरान राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के न्यायिक एवं विधिक जगत के बीच एक विशेष जुड़ाव देखने को मिला। राजस्थान से बड़ी संख्या में न्यायाधीशों, पूर्व न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं का श्रीनगर पहुंचना जस्टिस भाटी के प्रति उनके सम्मान और आत्मीय संबंधों को दर्शाता है।

राजस्थान से जम्मू-कश्मीर तक न्यायिक सफर का नया अध्याय

जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेने के साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट को उनके लंबे न्यायिक अनुभव और प्रशासनिक क्षमता का लाभ मिलने की उम्मीद है।

राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में जस्टिस भाटी ने लंबे समय तक न्यायिक दायित्वों का निर्वहन किया और कई महत्वपूर्ण मामलों में अपने न्यायिक दृष्टिकोण के लिए पहचान बनाई। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी न्यायिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है।

श्रीनगर में हुआ यह शपथग्रहण समारोह केवल एक संवैधानिक पदभार ग्रहण करने का अवसर नहीं रहा, बल्कि राजस्थान के न्यायिक एवं विधिक जगत और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के न्यायिक परिवार के बीच एक नए और मजबूत जुड़ाव का भी साक्षी बना।

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