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वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती मामले में RPSC को झटका: हाईकोर्ट में अपील खारिज, अयोग्य अभ्यर्थियों को सिलेक्ट लिस्ट से करना होगा बाहर

900 Veterinary Officer Recruitment: Rajasthan HC Rejects RPSC Appeal, Upholds Disqualification

जोधपुर। 900 पदों वाली वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती को लेकर राजस्थान लोक सेवा आयोग और मेरिट में शामिल कुछ उम्मीदवारों को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है।

हाईकोर्ट ने 900 वेटरिनरी ऑफिसर पोस्ट की भर्ती में कुछ उम्मीदवारों को अयोग्य मानने वाले सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए RPSC की याचिका खारिज कर दी।

इस फैसले के साथ ही भर्ती में शामिल हुए अयोग्य अभ्यर्थी सिलेक्ट लिस्ट से बाहर हो गए हैं।

हाईकोर्ट ने भर्ती में उन उम्मीदवारों को अयोग्य मानने के फैसले को बरकरार रखा है, जिन्होंने तय तारीख तक B.V.Sc. & A.H. की फाइनल ईयर की परीक्षा न तो दी थी और न ही परीक्षा फॉर्म जमा किया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ फाइनल ईयर में पढ़ रहे उम्मीदवार को परीक्षा में शामिल होना नहीं माना जा सकता।

मामला उन उम्मीदवारों से जुड़ा है, जिन्होंने 24 नवंबर 2019 तक फाइनल ईयर परीक्षा न तो दी थी और न ही परीक्षा फॉर्म जमा किया था।

RPSC ने सिंगल जज के 9 जनवरी 2025 के फैसले को चुनौती दी थी। यानी आयोग चाहता था कि उस फैसले को पलट दिया जाए और उन उम्मीदवारों को भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल रखा जाए, जिन्हें सिर्फ फाइनल ईयर में पढ़ रहे होने के कारण अयोग्य माना गया था।

लेकिन जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की डिवीजन बेंच ने RPSC की अपील खारिज कर दी, और कहा कि अगर उम्मीदवार ने तय तारीख तक परीक्षा फॉर्म तक जमा नहीं किया था, तो वह इस छूट का लाभ नहीं ले सकता।

भर्ती नियमों के Rule 11 को लेकर विवाद

राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन (RPSC) ने 22 अक्टूबर 2019 को 900 वेटरिनरी ऑफिसर पोस्ट पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। यह भर्ती Rajasthan Animal Husbandry Service Rules, 1963 के तहत होनी थी।

भर्ती के लिए उम्मीदवार के पास B.V.Sc. & A.H. की डिग्री या किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी की इसके बराबर की योग्यता होना जरूरी था।

विवाद भर्ती नियमों के Rule 11 को लेकर सामने आया।

इस नियम में निर्धारित योग्यता की परीक्षा के फाइनल ईयर में ‘appeared or are appearing’ यानी परीक्षा दे चुके या परीक्षा दे रहे अभ्यर्थियों को सीमित राहत दी गई थी।

यानी उन अभ्यर्थियों को भर्ती के समय फाइनल ईयर की परीक्षा दे चुके थे या परीक्षा दे रहे थे। उन्हें बाद में तय समय तक अपनी डिग्री पूरी करने का सबूत देना था।

लेकिन विवाद उन उम्मीदवारों को लेकर शुरू हो हुआ जो 24 नवंबर 2019 तक सिर्फ फाइनल ईयर में पढ़ रहे थे। उन्होंने न तो फाइनल ईयर की परीक्षा दी थी और न ही परीक्षा में बैठने के लिए फॉर्म जमा किया था।

यही सवाल हाईकोर्ट के सामने था कि क्या सिर्फ फाइनल में पढ़ना, फाइनल ईयर परीक्षा देने के बराबर माना जा सकता है?

फाइनल ईयर में पढ़ना और परीक्षा देने की स्थिति अलग

मामले में मुख्य सवाल यह था कि क्या ऐसा अभ्यर्थी Rule 11 की राहत ले सकता है, जो 24 नवंबर 2019 तक सिर्फ B.V.Sc. के फाइनल ईयर में दाखिल था या पढ़ाई कर रहा था?

इन अभ्यर्थियों ने उस तारीख तक न तो फाइनल ईयर की परीक्षा दी थी और न ही परीक्षा में शामिल होने के लिए अपना फॉर्म जमा किया था। बाद में उन्होंने इंटरव्यू से पहले पूरी डिग्री हासिल कर ली।

अभ्यर्थियों की ओर से यह तर्क दिया गया कि चूंकि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उन्होंने निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी कर ली थी, इसलिए उन्हें अयोग्य नहीं माना जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस तर्क को सही नहीं माना।

डिवीजन बेंच ने कहा-सिर्फ फाइनल ईयर में पढ़ना काफी नहीं

डिवीजन बेंच ने माना कि केवल किसी कोर्स के फाइनल ईयर में पहुंच जाना, फाइनल ईयर की परीक्षा में शामिल होने की स्थिति के बराबर नहीं है।

कोर्ट के मुताबिक, परीक्षा फॉर्म और फीस जमा करना इस बात का साफ संकेत है कि उम्मीदवार सिर्फ फाइनल ईयर में पढ़ाई नहीं कर रहा, बल्कि परीक्षा देने की प्रक्रिया में भी शामिल हो चुका है।

इसलिए जिन अभ्यर्थियों ने 24 नवंबर 2019 तक परीक्षा फॉर्म तक जमा नहीं किया था, वे Rule 11 में दी गई विशेष छूट के दायरे में नहीं आते।

डिवीजन बेंच ने कहा कि सिर्फ फाइनल ईयर में पढ़ाई करने से उम्मीदवार को Rule 11 की छूट का फायदा नहीं दिया जा सका।

परीक्षा फॉर्म और फीस को कोर्ट ने माना अहम

हाईकोर्ट ने परीक्षा फॉर्म और परीक्षा फीस जमा करने को अहम माना। कोर्ट के मुताबिक, इससे पता चलता है कि उम्मीदवार सिर्फ फाइनल ईयर में पढ़ाई नहीं कर रहा, बल्कि परीक्षा देने की प्रक्रिया में भी आ चुका है।

इसलिए जिन उम्मीदवारों ने 24 नवंबर 2019 तक न तो फाइनल ईयर की परीक्षा दी थी और न ही परीक्षा फॉर्म जमा किया था, वे Rule 11 की छूट के दायरे में नहीं आएंगे।

बाद में डिग्री लेने से शुरुआती अयोग्यता खत्म नहीं होगी

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती की संबंधित तारीख पर जो पात्रता जरूरी थी, उसे बाद में हासिल कर लेना शुरुआती अयोग्यता को खत्म नहीं करता।

यानी अगर कोई अभ्यर्थी 24 नवंबर 2019 को Rule 11 के तहत परीक्षा देने की स्थिति में नहीं था, तो बाद में इंटरव्यू से पहले B.V.Sc. & A.H. की पूरी डिग्री हासिल कर लेने से उसे उस नियम की छूट का लाभ नहीं मिल सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि Rule 11 सामान्य शैक्षणिक योग्यता की जरूरी शर्त में दी गई एक खास छूट है। इसका फायदा सिर्फ उन्हीं उम्मीदवारों को मिल सकता है, जो इस नियम में बताई गई शर्त पूरी करते हैं।

RPSC नियमों में अपनी तरफ से बदलाव नहीं कर सकता

RPSC की तरफ से दलील दी गई कि सिंगल जज ने परीक्षा फॉर्म जमा करने को पात्रता की एक अलग शर्त मान लिया था। हाईकोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा फॉर्म जमा करना अपने आप में कोई अलग योग्यता नहीं है। इससे सिर्फ यह पता चलता है कि उम्मीदवार फाइनल ईयर की परीक्षा देने की प्रक्रिया में आ चुका था।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि RPSC का काम भर्ती के तय नियमों के मुताबिक उम्मीदवारों की पात्रता जांचना है। आयोग अपनी तरफ से इन नियमों को बदलकर किसी उम्मीदवार को पात्र नहीं बना सकता।

हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि Rule 11 सामान्य शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्य शर्त में दी गई एक खास छूट है। इसलिए इसका फायदा सिर्फ उन्हीं उम्मीदवारों को मिल सकता है, जो नियम में बताई गई शर्त पूरी करते हैं।

कोर्स स्ट्रक्चर बदला, लेकिन Rule 11 नहीं बदला

RPSC ने यह तर्क भी दिया था कि Veterinary Council of India की 2016 Regulations के बाद B.V.Sc. & A.H. कोर्स का अकादमिक स्ट्रक्चर बदल गया था।

इसलिए पुराने फैसलों को मौजूदा भर्ती पर लागू नहीं किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि अकादमिक कोर्स की संरचना में बदलाव होने के बावजूद Rule 11 में कोई ऐसा संशोधन नहीं किया गया, जिससे ‘appeared or is appearing in the Final Year Examination’ की जगह सिर्फ ‘admitted to or studying in the Final Year’ को पात्रता का आधार बना दिया गया हो।

इसलिए नियम में लिखी शर्त को उसके वास्तविक अर्थ में ही लागू करना होगा।

RPSC की अपील खारिज, अयोग्य अभ्यर्थी चयन से बाहर

इसी के साथ राजस्थान हाईकोर्ट ने RPSC की अपील खारिज कर दी और सिंगल जज के 9 जनवरी 2025 के फैसले को बरकरार रखा।

9 जनवरी 2025 को सिंगल जज ने RPSC की मेरिट यानी सिलेक्ट लिस्ट में शामिल उन उम्मीदवारों को बाहर करने का निर्देश दिया था, जिन्होंने 24 नवंबर 2019 तक फाइनल की परीक्षा नहीं दी थी और परीक्षा फॉर्म भी जमा नहीं किया था।

सिंगल जज ने RPSC को ऐसे उम्मीदवारों को हटाकर नई मेरिट लिस्ट तैयार करने को कहा था।

RPSC ने इसी फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी, लेकिन अब हाईकोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी।

इसका सीधा मतलब है कि 900 वेटरिनरी ऑफिसर पोस्ट की भर्ती में सिर्फ फाइनल ईयर में पढ़ रहे उम्मीदवारों को पात्र नहीं माना जाएगा। तय तारीख तक उन्हें फाइनल ईयर परीक्षा देने की प्रक्रिया में आ जाना जरूरी था।

हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि बाद में डिग्री पूरी कर लेने से उस समय की अयोग्यता खत्म नहीं हो जाती। भर्ती में पात्रता उसी नियम और उसी तय तारीख के आधार पर देखी जाएगी, जो उस समय लागू थी।

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