जोधपुर। पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख धार्मिक आयोजन रामदेवरा मेले में सामने आई अव्यवस्थाओं का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
मेले में श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी और प्रशासन के कुप्रबंधन को राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है।
आरोप है कि मेले में प्रशासन की ओर से पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के चलते रोजाना हादसे, लूटपाट, महिलाओं और बच्चों के साथ वारदात जैसी घटनाएं सामने आ रही है।
वहीं मूलभूत सुविधाओं के लिए भी श्रद्धालुओं को भटकना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन को मेले की अव्यवस्थाओं को तत्काल दूर करने का निर्देश जारी किया है।
साथ ही मेले में सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़ी व्यवस्थाएं तुरंत सुधारने के निर्देश दिए है।
हाईकोर्ट ने इसके लिए जोधपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने समिति बनाकर तुरंत बैठक बुलाने और जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने इसके लिए प्रशासन को एक सप्ताह की समय सीमा दी है।
जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की बेंच ने मामले से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, इसलिए उनकी बुनियादी जरूरतों को लेकर प्रशासन बिना देर किए तत्काल कदम उठाएं।
मेले में पर्याप्त इंतजाम नहीं होने का आरोप
जनहित याचिका में मेले के दौरान प्रशासन की ओर से पर्याप्त इंतजाम नहीं होने का मुद्दा उठाया गया था।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अशोक छंगाणी ने कोर्ट को बताया कि रोज करीब तीन लाख श्रद्धालु रामदेवरा पहुंच रहे हैं।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने के बावजूद मेले में रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं।
मेले में न तो पर्याप्त सफाई व्यवस्था है और न ही चिकित्सा सुविधा। पानी, वॉशरूम और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को दर-दर भटकना पड़ रहा है।
मेले में अस्थायी टेंट तो लगाए गए हैं, लेकिन उनके साथ पर्याप्त शौचालयों की व्यवस्था नहीं है। इससे मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मेले में सुरक्षा और अव्यवस्थाओं का भी मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान मेले में एक्सीडेंट, लूटपाट के साथ ही महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी सामने रखे गए।
याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ लोग और दुकानदार श्रद्धालुओं से दर्शन के नाम पर पैसे वसूल रहे हैं।
पार्किंग के नाम पर भी अलग-अलग जगहों पर मनमानी रकम वसूली जा रही है लेकिन प्रशासन कार्रवाई करने की बजाय मूकदर्शक बना हुआ है।
इसके अलावा धर्मशालाओं और होटलों में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने और फायर एंबुलेंस की कमी का मुद्दा भी कोर्ट के सामने उठाया गया।
संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी कमेटी
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने संभागीय आयुक्त, जोधपुर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है।
इस कमेटी में जिला कलेक्टर जैसलमेर, जिला पुलिस अधीक्षक जैसलमेर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जैसलमेर और निजी ट्रस्ट के अध्यक्ष को शामिल किया गया है।
कमेटी को श्रद्धालुओं की जरूरतों का आकलन कर जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी।
हाईकोर्ट ने समिति को श्रद्धालुओं के लिए सफाई, चिकित्सा-स्वास्थ्य सेवाओं और कानून-व्यवस्था की जरूरतों पर खास ध्यान देने को कहा है।
साथ ही, जहां जरूरत हो वहां बुनियादी सुविधाएं और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
एक हफ्ते में शुरू करनी होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने कहा कि समिति इस मामले को आगे टालने के बजाय तुरंत बैठक करे और जरूरी फैसले ले।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि समिति की ओर से जरूरी कार्रवाई में एक सप्ताह से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए।
राज्य सरकार को समिति के काम में जरूरी सहयोग देने के निर्देश दिए गए हैं। मेले में ये व्यवस्थाएं एक महीने तक या श्रद्धालुओं की भीड़ कम होने तक जारी रहेंगी।
हाईकोर्ट ने समिति को तत्काल बैठक कर जरूरी कदम उठाने और तय समय सीमा में कार्रवाई शुरू करने को कहा है।
अब मेले में सफाई, चिकित्सा, सुरक्षा और दूसरी बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर समिति के स्तर पर आगे की कार्रवाई होगी।