राजस्थान हाईकोर्ट में राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर विचार गोष्ठी, न्यायिक कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान; हिंदी आशुलिपिकों की नियुक्ति की मांग
जयपुर। राष्ट्रीय हिंदी दिवस के मौके पर राजस्थान हाईकोर्ट में हिंदी भाषा में विधिक कार्य को बढ़ावा देने के लिए आयोजित विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया.
हाईकोर्ट परिसर स्थित सतीशचन्द्र सभागार में आयोजित हुए इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथी जस्टिस अनिल उपमन ने अधिवक्ताओं से न्यायिक प्रक्रिया में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक समृद्ध भाषा ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान की आत्मा है।
राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले 8 वर्षों से भारतीय भाषा अभियान एवं राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर के माध्यम से राष्ट्रीय हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा में विधिक कार्य करने के लिए अधिवक्ताओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विचार गोष्ठी और सम्मान समारोह का आयेाजन किया जाता रहा हैं.
इसी क्रम में मंगलवार को भी सम्मान समारोह और विचार गोष्ठी का आयोजन राजस्थान हाईकोर्ट के सतीश चंद्र सभागार में किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस अनिल उपमन ने न्यायिक प्रक्रिया में हिंदी भाषा के प्रभाव को और बढ़ाने के लिए सभी अधिवक्ताओं से आगे आने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य बेहद समृद्ध है और आने वाले दिनों में वे स्वयं भी अपने निर्णयों में अधिक से अधिक हिंदी भाषा का प्रयोग करेंगे।
जस्टिस अनिल उपमन ने कहा कि वे राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से हिंदी आशुलिपिकों की नियुक्ति का अनुरोध करेंगे, ताकि न्यायालय में हिंदी में विधिक कार्य को सरलता से आगे बढ़ाया जा सके।
उन्होंने अधिवक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है, इसलिए हमें इसका अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए।
एएजी गिल ने बताया भाषा का महत्व
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता अतिरिक्त महाधिवक्ता गुलचरण सिंह गिल रहे। उन्होंने अपने अनुभवों और कई उदाहरणों के माध्यम से न्यायिक क्षेत्र में भाषा के महत्व को सभी के सामने रखा।
उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आम व्यक्ति को न्याय व्यवस्था से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
भारतीय भाषा अभियान के राजस्थान क्षेत्र सहसंयोजक अधिवक्ता नितिन कुमार जैन ने विषय की प्रस्तावना रखते हुए भारतीय भाषा अभियान की ओर से पूरे देश में न्यायिक प्रक्रिया में मातृभाषा के उपयोग को लेकर चलाए जा रहे जनजागरण अभियान की जानकारी दी।
हिंदी में विधिक कार्य करने वाले 11 अधिवक्ताओं का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा में विधिक कार्य को बढ़ावा देने वाले 11 चयनित अधिवक्ताओं का सम्मान किया गया।
इन अधिवक्ताओं ने वर्ष 2024, 2025 और 2026 में 20 से अधिक मामले हिंदी भाषा में दायर किए थे।
इस अवसर पर राजस्थान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव दीपेश शर्मा ने मंचासीन सभी अतिथियों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि भाषा संवाद का विषय है और संवाद स्पष्ट एवं सरल होना चाहिए, ताकि आम जनता तक उसकी पहुंच हो सके।
उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में भाषा ऐसी होनी चाहिए जिसे आम व्यक्ति आसानी से समझ सके। इसलिए हमें अपनी मातृभाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन बार एसोसिएशन के महासचिव दीपेश शर्मा ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और उपस्थित अधिवक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।