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समय-सीमा के बाद नहीं बदली जा सकती रिजर्वेशन कैटेगरी, CLAT कैंडिडेट को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट में याचिका खारिज

CLAT-2026 Reservation Category Change Plea Rejected by Rajasthan High Court After Deadline

जयपुर। CLAT-2026 का रिजल्ट आने के बाद रिजर्वेशन कैटेगरी बदलने की मांग करने वाली छात्रा को राजस्थान हाईकोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट ने Common Law Admission Test यानी CLAT कैंडिडेट की रिजर्वेशन कैटेगरी बदलने की याचिका खारिज कर दी।

दरअसल CLAT-2026 का रिजल्ट आने के बाद एक कैंडिडेट दर्शिता गुप्ता ने अपनी रिजर्वेशन कैटेगरी बदलने की मांग की थी। उसने फार्म भरते वक्त गलती से ये कैटेगरी चुन लेने का हवाला दिया, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे राहत देने इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा कि आवेदन की आखिरी तारीख निकलने और प्रोविजनल लिस्ट जारी होने के बाद कैटेगरी बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर तब, जब रिजल्ट जारी हो चुका हो और काउंसलिंग शुरू हो गई हो। क्योंकि इससे पूरी एडमिशन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

जस्टिस मनीष शर्मा की बेंच ने कहा कि प्रतियोगी प्रवेश प्रक्रिया में उम्मीदवार की कैटेगरी शुरुआत से तय रहती है। बाद के चरण में उसमें बदलाव की अनुमति देने से पूरी मेरिट और सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने कैंडिडेट क रिज़र्वेशन कैटेगरी बदलने की मांग ठुकराते हुए याचिका खारिज कर दी।

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फॉर्म में चुनी कैटेगरी बाद में बदलना चाहती थी कैंडिडेट

मामला CLAT-2026 से जुड़ा है। जयपुर निवासी दर्शिता गुप्ता ने CLAT-2026 के लिए आवेदन करते समय ‘अनरिजर्व्ड जनरल-महिला’ कैटेगरी चुनी थी। और महिला कैटेगरी का लाभ मांगा था। लेकिन उसने राजस्थान डोमिसाइल यानी GC-RJ कैटेगरी के लिए आवेदन में दावा नहीं किया था।

CLAT का रिजल्ट आने के बाद छात्रा को 94.25 अंक मिले और उसकी ऑल इंडिया रैंक 649 रही। इसके बाद वह काउंसलिंग में शामिल हुई। जब पहली प्रोविजनल लिस्ट जारी हुई, तब उसे अपनी गलती का एहसास चला।

दर्शिता गुप्ता ने इसके बाद CLAT कंसोर्टियम को ईमेल भेजकर अपनी कैटेगरी बदलने और ‘जनरल-राजस्थान डोमिसाइल’ करने का अनुरोध किया।

उसने इसे अनजाने में हुई गलती या तकनीकी समस्या बताया। साथ ही डोमिसाइल सर्टिफिकेट लगाकर GC-RJ कैटेगरी के तहत अपने आवेदन पर विचार करने की मांग की।

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समय-सीमा खत्म होने के कारण कंसोर्टियम ने मांग ठुकराई

CLAT-कंसोर्टियम ने कैंडिडेट दर्शिता गुप्ता की मांग नहीं मानी। उसका कहना था कि आवेदन में बदलाव की तय समयसीमा पहले ही खत्म हो चुकी थी। इसके बाद कैंडिडेट ने हाईकोर्ट का रुख किया।

वहीं संबंधित पक्षों ने कहा कि कैटेगरी बदलने के नियम सभी कैंडिडेट्स के लिए एक जैसे हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद किसी एक कैंडिडेट को कैटेगरी बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

9 नवंबर 2025 थी कैटेगरी बदलने की आखिरी तारीख

हाईकोर्ट ने भी रिकॉर्ड देखा तो पाया कि CLAT-2026 के आवेदन की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2025 थी। इसके बाद कैंडिडेट्स को अपने फॉर्म में सुधार करने के लिए 9 नवंबर 2025 तक का समय दिया गया था।

नियमों में साफ लिखा था कि इस समय-सीमा के बाद आवेदन में दर्ज जानकारी को नहीं बदला जा सकेगा। लेकिन कैंडिडेट ने भी तय तारीख तक GC-RJ कैटेगरी नहीं जोड़ी थी। बाद में रिजल्ट और पहली प्रोविजनल लिस्ट जारी होने के बाद उसने कैटेगरी बदलने की मांग की।

यही वजह थी कि CLAT कंसोर्टियम ने उसके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।

हाईकोर्ट ने कैटेगरी बदलने की मांग क्यों नहीं मानी?

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘जम्मू-कश्मीर पब्लिक सर्विस कमीशन बनाम इसरार अहमद’ फैसले का भी हवाला दिया। इसमें प्रतियोगी चयन प्रक्रिया के दौरान कैंडिडेट की कैटेगरी में बदलाव को लेकर तय नियमों की बात कही गई थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि कैटेगरी बदलने की आखिरी तारीख निकलने के करीब दो महीने बाद कैंडिडेट ने यह मांग की। कोर्ट ने इसे बाद में किया गया दावा माना और कैटेगरी बदलने की अनुमति नहीं दी।

पहले रिजर्वेशन का दावा नहीं किया तो बाद में फायदा नहीं मिलेगा

हाईकोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर और अन्य बनाम नीतू हर्ष मामले का भी हवाला दिया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर कोई उम्मीदवार शुरुआत में रिजर्वेशन का दावा नहीं करता, जरूरी सर्टिफिकेट नहीं देता और जनरल कैटेगरी के तहत आवेदन करता है, तो चयन के बाद उसे रिजर्व्ड कैटेगरी का लाभ नहीं दिया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि आवेदन में छोटी-मोटी गलती सुधारना और पूरी रिजर्वेशन कैटेगरी बदलना, दोनों अलग बातें हैं। इसलिए दोनों को एक ही तरह से नहीं देखा जा सकता।

CLAT कैंडिडेट की याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्टेज पर कैटेगरी बदलने का सीधा असर मेरिट लिस्ट, दूसरे उम्मीदवारों के चयन और सीट अलॉटमेंट पर पड़ सकता है। इसलिए रिजल्ट आने के बाद ऐसा बदलाव करने की अनुमति देना प्रवेश प्रक्रिया को प्रभावित करेगा।

इन्हीं आधारों पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कैंडिडेट की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि तय समय-सीमा के बाद रिजर्वेशन कैटेगरी बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती

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