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RAT चेयरमैन की नियुक्ति करने का सरकार को अल्टीमेटम, हाईकोर्ट ने दिया 3 हफ्ते का समय, वरना कार्मिक विभाग के सचिव को होंगे तलब

CLAT-2026 Reservation Category Change Plea Rejected by Rajasthan High Court After Deadline

जयपुर। राज्य सरकार को 3 हफ्ते में राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (RAT) में स्थायी चेयरमैन की नियुक्ति करनी होगी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने RAT में चेयरमैन की कुर्सी लंबे समय से खाली रहने पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को 3 हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि 3 सप्ताह के भीतर अधिकरण में स्थायी चेयरमैन की नियुक्ति की जाए। अगर तय समय में नियुक्ति नहीं हुई तो कार्मिक विभाग (DoP) के सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में पेश होकर जवाब देना होगा।

जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की बेंच ने राजस्थान हाईकोर्ट के 11 अधिवक्ताओं की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। याचिका में RAT में स्थायी चेयरमैन समेत अन्य पद खाली होने और इससे अधिकरण का कामकाज प्रभावित होने का मुद्दा उठाया गया था।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया है।

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कार्यवाहक चेयरमैन से चल रहा है ट्रीब्यूनल का काम

दरअसल राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण यानी RAT में स्थायी चेयरमैन का पद मार्च 2026 से खाली है। फिलहाल यहां प्रकाश चंद्र शर्मा को चेयरमैन का अतिरिक्त यानी कार्यवाहक प्रभार दिया गया है।

इसी के चलते हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है और RAT के कामकाज पर पड़ रहे असर का मुद्दा उठया गया है। याचिका में कहा गया कि चेयरमैन के स्थाई पद के साथ-साथ दूसरी खाली पदों और पेंडिंग मामलों का भी असर ट्रीब्यूनल के काम पर पड़ रहा है।

RAT में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े सर्विस मैटर की सुनवाई होती है। ऐसे में नियमित चेयरमैन का पद खाली होने का असर यहां चल रहे नौकरी से जुड़े विवादों पर भी पड़ता है। इनमें बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी अपने सर्विस से जुड़े मामलों को लेकर RAT पहुंचे हैं।

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11 वकीलों ने PIL के जरिए उठाया RAT का मुद्दा

यह दायर जनहित याचिका राजस्थान हाईकोर्ट के 11 अधिवक्ताओं ने दाखिल की है। याचिका में RAT में स्थाई चेयरमैन की नियुक्ति के साथ-साथ ट्रिब्यूनल की व्यवस्था और कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियमित चेयरमैन नहीं होने से ट्रिब्यूनल के कामकाज पर असर पड़ रहा है। इसी के साथ RAT में दूसरे खाली पदों और पेंडिंग मामलों का मुद्दा भी उठाया गया है।

PIL दाखिल करने वाले अधिवक्ताओं में संदीप कलवानिया, गिरिराज राजोरिया, कपिल खंडेलवाल, दिलीप सिंह कुर्का, सलीम खान, सुरेंद्र सिंह, उम्मेद सिंह, धीरज गुप्ता और अशोक बंसल समेत अन्य शामिल हैं।

अब सरकार के सामने 3 हफ्ते की डेडलाइन

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार को नियमित चेयरमैन की नियुक्ति के लिए 3 हफ्ते का समय दिया है। यानी हाईकोर्ट के इस अल्टीमेटम के बाद अब सरकार के पास स्थायी चेयरमैन की नियुक्ति के लिए सिर्फ 3 हफ्ते हैं।

अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद होगी। उस दौरान सरकार को नियुक्ति की कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट भी हाईकोर्ट में देनी होगी।

समय पर नियुक्ति नहीं हुई तो सचिव होंगे पेश

हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि तय समय में नियुक्ति नहीं हुई तो कार्मिक विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेशी के लिए कोर्ट में आना होगा। उन्हें कोर्ट में आकर यह बताना होगा कि आदेश के बावजूद नियुक्ति क्यों नहीं की गई।

यानी अब RAT में चेयरमैन की नियुक्ति का मामला सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा। हाईकोर्ट ने इसके लिए बाकायदा डेडलाइन तय कर दी है और अगली सुनवाई में सरकार को इसका जवाब भी देना होगा।

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