अलवर से जयपुर नहीं जाएगा वैवाहिक मुकदमा, राजस्थान हाईकोर्ट ने पत्नी की ट्रांसफर याचिका खारिज, पति का आरोप-पत्नी दूसरे व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ आर्थिक परेशानी को आधार बनाकर वैवाहिक मुकदमे को एक अदालत से दूसरी अदालत में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रांसफर की मांग पर विचार करते समय परिस्थितियों और मामले के समग्र तथ्यों को देखा जाना आवश्यक है।
मामले में पत्नी की ओर से खुद को जयपुर निवासी बताते हुए वैवाहिक मुकदमे को जयपुर ट्रांसफर करने की मांग की गई थी।
पत्नी ने अपनी आर्थिक परेशानी सहित अन्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए मुकदमे को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने का आग्रह किया।
वहीं, पति की ओर से ट्रांसफर याचिका का विरोध करते हुए आरोप लगाया गया कि पत्नी वर्तमान में किसी अन्य व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही है।
पति की ओर से यह भी कहा गया कि मामले को ट्रांसफर करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है।
जस्टिस चन्द्रप्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने वैवाहिक विवाद से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में पत्नी की ओर से दायर ट्रांसफर याचिका को खारिज करने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता पत्नी की दलील
याचिकाकर्ता पत्नी की ओर से दायर की गई याचिका में दलील दी कि याचिकाकर्ता जयपुर में निवास कर रही है और उसके पास आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं है।
ऐसे में जयपुर से अलवर स्थित पारिवारिक न्यायालय में प्रत्येक तारीख पर पेश होने के लिए लंबी दूरी तय करना उसके लिए आर्थिक और व्यावहारिक रूप से कठिन है।
याचिकाकर्ता पत्नी की ओर से यह भी कहा गया कि दोनों पक्षों का विवाह 29 अप्रैल 2023 को अलवर में हुआ था, लेकिन वर्तमान में याचिकाकर्ता जयपुर में रह रही है।
इसलिए अलवर में लंबित वैवाहिक मुकदमे को पारिवारिक न्यायालय, सांगानेर, जयपुर में ट्रांसफर किया जाना उसके लिए सुविधाजनक होगा।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अपनी दलीलों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के N.C.V. Aishwarya Vs. A.S. Saravana Karthik Sha (2022) तथा Smt. Ekta Dhadich Vs. Rajendra Prasad Sharma (2021) सहित अन्य न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया।
पति की दलील-लिव-इन में पत्नी
वहीं मामले में प्रतिवादी पति की ओर से अधिवक्ता प्रियांशा गुप्ता ने ट्रांसफर याचिका का विरोध करते हुए याचिकाकर्ता पत्नी के जयपुर में निवास करने के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता धौलपुर में निवास करती है।
पति की ओर से सुनवाई के दौरान धौलपुर से संबंधित पुलिस रिपोर्टों और दूसरे अन्य साक्ष्यों का हवाला दिया गया।
इसके अलावा पति की ओर से यह आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता पत्नी एक अन्य युवक के साथ जयपुर में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही है।
इस संबंध में पति की ओर से जवाब के साथ कुछ फोटो भी रिकॉर्ड पर पेश किए गए।
पति की ओर से यह भी कहा गया कि यदि याचिकाकर्ता की वास्तविक परेशानी मुकदमे की सुनवाई के लिए अलवर आने-जाने के खर्च को लेकर है, तो पति उसके यात्रा एवं आवश्यक खर्च को वहन करने के लिए तैयार है।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर क्या कहा?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रांसफर याचिका पर निर्णय लेते समय संबंधित परिस्थितियों और दोनों पक्षों की सुविधा-असुविधा को देखा जाना आवश्यक है।
कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता की ओर से आर्थिक कठिनाई का आधार लिया गया है, लेकिन प्रतिवादी पति यात्रा खर्च वहन करने के लिए तैयार है।
ऐसी स्थिति में केवल आर्थिक कमजोरी के आधार पर वैवाहिक मुकदमे को अलवर से जयपुर ट्रांसफर करना उचित आधार नहीं बनता।
निर्णायक आधार नहीं
अदालत ने माना कि महज आर्थिक परेशानी अपने आप में वैवाहिक मुकदमे के ट्रांसफर का निर्णायक आधार नहीं हो सकती।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी वैवाहिक मुकदमे के स्थानांतरण के लिए केवल एक सामान्य आधार पर्याप्त नहीं है, बल्कि अदालत को यह देखना होता है कि मुकदमे के निष्पक्ष और सुविधाजनक निस्तारण के लिए ट्रांसफर वास्तव में आवश्यक है या नहीं।
कोर्ट ने पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि आवश्यक होने पर पत्नी के यात्रा एवं अन्य खर्च का भार पति पर डाला जा सकता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता आवश्यकता पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अलवर स्थित न्यायालय में उपस्थित हो सकती है।
इसके अलावा वह आवश्यक कार्यवाही के लिए अपने अधिवक्ता के माध्यम से भी पेश हो सकती है।
इसके बाद हाईकोर्ट ने माना कि उपलब्ध परिस्थितियों में अलवर के पारिवारिक न्यायालय संख्या-1 में लंबित वैवाहिक प्रकरण को जयपुर ट्रांसफर करने का कोई न्यायोचित आधार नहीं है और धारा 24 सीपीसी के तहत दायर ट्रांसफर याचिका खारिज कर दी।
पति-पत्नी के आरोपों पर हाईकोर्ट ने क्या कहा…
मामले में पति की ओर से पत्नी के दूसरे व्यक्ति के साथ कथित लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का आरोप लगाया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के आरोपों का अंतिम निर्धारण संबंधित वैवाहिक मुकदमे में साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाना है।
हाईकोर्ट ने उनके सामने मुख्य प्रश्न वैवाहिक मुकदमे के ट्रांसफर की मांग से संबंधित हैं।
जिसके बाद हाईकोर्ट ने आर्थिक परेशानी को अकेले पर्याप्त आधार मानने से इनकार किया।
कोर्ट की यह टिप्पणी वैवाहिक मुकदमों के ट्रांसफर से जुड़ी याचिकाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें स्पष्ट किया गया है कि ट्रांसफर के लिए परिस्थितियों का समग्र मूल्यांकन जरूरी है।
Case Deteils
HIGH COURT OF JUDICATURE FOR RAJASTHAN
BENCH AT JAIPUR
S.B. Civil Transfer Petition No. 234/2026
CNR: RJHC020558912026| URN: CTA / 379U / 2026
HON’BLE MR. JUSTICE CHANDRA PRAKASH SHRIMALI
09/09/2026