अधिवक्ता के वीडियो के बाद बढ़ी चिंता, राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने परिसर के सभी पेयजल स्रोतों की जांच कराने और एन्क्लेव वॉटर मशीनें लगाने की मांग की
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ परिसर में पेयजल की गुणवत्ता और पानी में कथित रूप से अधिक टीडीएस (Total Dissolved Solids) पाए जाने को लेकर उठे सवालों के बीच अब राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने औपचारिक रूप से रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव दीपेश शर्मा की ओर से रजिस्ट्रार जनरल को लिखा गया पत्र हाईकोर्ट की प्रशासनिक रजिस्ट्रार को सौंपा गया।
पत्र में हाईकोर्ट परिसर के सभी पेयजल स्रोतों की तत्काल जांच, पानी की गुणवत्ता और टीडीएस की जांच तथा सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक तकनीकी एवं सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की गई है।

अधिवक्ता के वीडियो के बाद मामला आया चर्चा में
हाईकोर्ट परिसर के पेयजल को लेकर यह मामला उस समय चर्चा में आया, जब एक अधिवक्ता द्वारा बुधवार को वीडियो साझा कर परिसर में उपलब्ध पेयजल में टीडीएस का स्तर अधिक होने का दावा किया था।
इसके बाद अधिवक्ताओं के बीच पानी की गुणवत्ता और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को लेकर चर्चा शुरू हुई।
अब बार एसोसिएशन ने इस मामले को औपचारिक रूप से हाईकोर्ट प्रशासन के समक्ष उठाया है और परिसर में उपलब्ध पेयजल की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है।
‘पानी की गुणवत्ता और टीडीएस की जांच कराई जाए’
बार एसोसिएशन ने अपने पत्र में हाईकोर्ट परिसर के सभी पेयजल स्रोतों की तत्काल जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही सभी पानी की टंकियों के पानी की गुणवत्ता और टीडीएस की जांच कराने का भी अनुरोध किया गया है।
बार एसोसिएशन का कहना है कि परिसर में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, कर्मचारी और अन्य लोग नियमित रूप से मौजूद रहते हैं, इसलिए पेयजल की गुणवत्ता को लेकर किसी भी प्रकार की आशंका को जांच के माध्यम से स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
सिर्फ टीडीएस नहीं, सुरक्षित पेयजल व्यवस्था की भी मांग
बार एसोसिएशन ने पत्र में केवल पानी की जांच तक सीमित न रहते हुए परिसर में शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक तकनीकी एवं सुधारात्मक कार्रवाई करने का भी अनुरोध किया है।
पत्र में हाईकोर्ट परिसर में Encline Water मशीनें उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि परिसर में आने वाले अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके।
शीतल एवं स्वच्छ पेयजल व्यवस्था को लेकर भी जोर
बार एसोसिएशन ने परिसर में पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ पानी की नियमित जांच एवं रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
पत्र में पेयजल व्यवस्था की निगरानी और उसके नियमित निरीक्षण पर भी जोर दिया गया है।
एसोसिएशन ने कहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि हाईकोर्ट परिसर में सभी के लिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित हो सके।
हाईकोर्ट प्रशासन ने करवाई पानी की जांच
दूसरी तरफ वीडियो वायरल होने के बाद बुधवार देर रात ही हाईकोर्ट बिल्डिंग कमेटी ने मामले में प्रसंज्ञान लेते हुए रजिस्ट्री को पानी की जांच का आदेश दिया।
जिसके बाद आनन-फानन में गुरुवार सुबह ही रजिस्ट्री के अधिकारियों ने हाईकोर्ट परिसर में पानी की जांच करवाई।
जांच में हाईकोर्ट परिसर में अधिकांश जगहों पर पानी गुणवत्ता के अनुसार पाया गया।