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ब्रेकिंग: पर्यावरण और जलवायु संकट पर दिल्ली में जुटेगा दुनिया का न्यायिक मंच, आज PM मोदी करेंगे NGT के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

Rajasthan Chief Justice Sanjay K. Agrawal and Justice Vineet Mathur to Attend Two-Day Global Conference at Vigyan Bhawan

मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल दो दिन के दिल्ली दौरे पर, आज विज्ञान भवन में आयोजित कॉन्फ्रेंस में होंगे शामिल

नई दिल्ली/जयपुर। पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय न्याय से जुड़े वैश्विक मुद्दों पर मंथन के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स” आज से नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शुरू होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह करीब 10 बजे सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। सम्मेलन का आयोजन 19 और 20 सितंबर 2026 को किया जा रहा है।

राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल और वरिष्ठ जज जस्टिस विनीत माथुर इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार देर शाम दिल्ली पहुंच गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश आगामी दो दिनों तक आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में शामिल होंगे, साथ ही वे इस दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों से भी मुलाकात करेंगे।

17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधि होंगे शामिल

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर भारत सहित विभिन्न देशों के न्यायिक एवं विशेषज्ञ प्रतिनिधि भाग लेंगे।

सम्मेलन में 17 देशों के प्रतिष्ठित न्यायाधीशों और न्यायिक प्रतिनिधियों के साथ-साथ भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश, जिला न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ, केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

इन देशों के प्रतिनिधि रहेंगे मौजूद

सम्मेलन में अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बांग्लादेश, भूटान, ब्राजील, ब्रिटेन, चिली, डेनमार्क, फ्रांस, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, फिलीपींस, रूस, सिंगापुर, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, स्वीडन, थाईलैंड और अमेरिका सहित अनेक देशों के प्रतिनिधियों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी प्रस्तावित है।

CJI सूर्यकांत सहित न्यायिक हस्तियां होंगी मौजूद

सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के साथ वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी भी हिस्सा लेंगे।

इसके अलावा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और NGT के चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव सहित कई प्रमुख हस्तियां सम्मेलन में शामिल होंगी।

सम्मेलन में राज्य न्यायिक अकादमियों, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों, राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरणों और राज्य वेटलैंड प्राधिकरणों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे।

राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी समापन सत्र की अध्यक्षता

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन सत्र 20 सितंबर, रविवार शाम 4 बजे आयोजित होगा। इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी।

समापन सत्र में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, NGT चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित अन्य प्रमुख हस्तियां शिरकत करेंगी।

चार तकनीकी सत्र

सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चार प्रमुख तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। NGT के अनुसार इनमें जलवायु परिवर्तन और लचीलापन, चक्रीय अर्थव्यवस्था, जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं और सतत ऊर्जा समाधान जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं।

तकनीकी चर्चाओं में जलवायु न्याय, समानता और समावेशन, पर्यावरण कानून एवं शासन, वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा भविष्य के लिए वनों का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन जैसे विषयों पर भी मंथन होगा।

नीति निर्माण से लेकर खामियों पर होगा मंथन

सम्मेलन का उद्देश्य केवल पर्यावरणीय समस्याओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि पर्यावरणीय शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए न्यायिक दृष्टिकोण, वैज्ञानिक ज्ञान और विभिन्न देशों के संस्थागत अनुभवों को साझा करना भी है।

सम्मेलन के दौरान पर्यावरणीय नीतियों के निर्माण, उनके क्रियान्वयन और प्रभावी प्रवर्तन में मौजूद खामियों एवं चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही विभिन्न न्यायक्षेत्रों में अपनाए गए प्रभावी उपायों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सफल अनुभवों को साझा कर संस्थागत सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

पर्यावरणीय न्याय के लिए वैश्विक सहयोग पर जोर

NGT का यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक तंत्र की सुरक्षा और सतत विकास वैश्विक नीति एवं न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।

सम्मेलन विभिन्न देशों की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच संवाद का मंच उपलब्ध कराएगा और पर्यावरणीय न्याय को प्रभावी बनाने के लिए कानून, विज्ञान और शासन के बीच बेहतर समन्वय पर विचार-विमर्श करेगा।

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