जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर के दईजर क्षेत्र में प्रस्तावित 200 फीट चौड़ी सड़क के लिए छोड़ी गई जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।
हाईकोर्ट ने जोधपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को निर्देश दिया है कि वर्ष 2018 में स्वीकृत लेआउट में सड़क के लिए छोड़ी गई जमीन पर कोई अवैध निर्माण नहीं होने दिया जाए। यदि ऐसा निर्माण होता है तो JDA को नियमानुसार कार्रवाई कर उसे हटाना होगा।
साथ ही, हाईकोर्ट ने भविष्य में संबंधित क्षेत्र के नए लेआउट प्लान मास्टर प्लान 2021-31 के प्रावधानों के अनुरूप ही मंजूर करने के निर्देश दिए है।
यह 200 फीट सड़क दईजर फांटा से स्टेट हाईवे होते हुए नागौर नेशनल हाईवे तक प्रस्तावित है। इसी को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान के मुताबिक सड़क के लिए छोड़ी गई जमीन पर निर्माण हो रहा है, जिससे भविष्य में सड़क का रास्ता प्रभावित हो सकता है।
वहीं JDA ने कोर्ट को बताया कि मास्टर प्लान लागू होने के बाद उसने ऐसा कोई लेआउट मंजूर नहीं किया, जो 200 फीट सड़क के खिलाफ हो।
जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की बेंच ने कहा कि आगे मंजूर होने वाले सभी लेआउट 2021-31 के मुताबिक होने चाहिए। साथ ही 2018 के लेआउट में सड़क के लिए छोड़ी गई जमीन पर अवैध निर्माण नहीं होने देना होगा।
200 फीट सड़क की जमीन पर निर्माण की आपत्ति
यह PIL छोटूराम और अन्य ने दायर की थी। याचिकाकर्ताओं की आपत्ति थी कि मास्टर प्लान में 200 फीट सड़क के लिए तय जमीन पर अगर निर्माण हो गया तो भविष्य में सड़क के लिए रास्ता निकालने में परेशानी हो सकती है।
इसी वजह से उन्होंने मास्टर प्लान के मुताबिक सड़क के लिए छोड़ी गई जमीन को सुरक्षित रखने और आगे के लेआउट में भी इसका पालन कराने की मांग की।
हालांकि, कोर्ट के सामने किसी खास व्यक्ति को अवैध निर्माणकर्ता घोषित करने की बात सामने नहीं आई। मामले का मुख्य मुद्दा सड़क के लिए छोड़ी गई जमीन को सुरक्षित रखना था।
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2018 के लेआउट में पहले ही छोड़ी थी सड़क की जमीन
मामले को समझने के लिए 2018 के लेआउट को समझना जरूरी है।
लेआउट प्लान किसी बड़े भूखंड का वह नक्शा होता है, जिसमें यह तय होता है कि कहां प्लॉट होंगे, कहां सड़क होगी और कितनी जमीन सड़क या दूसरे सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए छोड़ी जाएगी।
इस मामले में संबंधित निजी पक्षों ने कोर्ट को बताया कि उनका लेआउट 2018 में मंजूर हुआ था। उस समय मास्टर प्लान 2021-31 लागू नहीं था। यानी यह मास्टर प्लान 2021-31 से पहले का था।
उन्होंने यह भी कहा कि 2018 के इसी लेआउट में 200 फीट सड़क के लिए जमीन पहले ही छोड़ दी गई थी और सड़क के लिए छोड़ी गई जमीन पर कोई निर्माण नहीं किया गया।
मास्टर प्लान में भी है 200 फीट सड़क का प्रावधान
दईजर इलाके में 200 फीट चौड़ी सड़क का प्रावधान मास्टर प्लान 2021-31 में किया गया। यह सड़क दईजर फांटा से स्टेट हाईवे होते हुए नागौर नेशनल हाईवे तक प्रस्तावित है। लेकिन इससे पहले ही, 2018 में मंजूर लेआउट में इस सड़क के लिए जमीन छोड़ी जा चुकी थी।
इसलिए मामले में सवाल यह उठा कि सड़क के लिए छोड़ी गई इस जमीन पर आगे कोई निर्माण न हो और भविष्य के लेआउट भी मास्टर प्लान के मुताबिक ही हों।
JDA ने कोर्ट को बताया कि 200 फीट सड़क मास्टर प्लान में दर्ज है और मास्टर प्लान लागू होने के बाद उसने सड़क के खिलाफ जाने वाला कोई लेआउट मंजूर नहीं किया है।
JDA ने यह भी कहा कि सिर्फ मास्टर प्लान में सड़क प्रस्तावित होने के आधार पर सरकार को सड़क बनाने या जमीन अधिग्रहण का खर्च उठाने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
यानी इस PIL में फिलहाल सड़क बनवाने का सवाल नहीं था। मुख्य मुद्दा यह था कि सड़क के लिए छोड़ी गई जमीन सुरक्षित रहे और उस पर ऐसा निर्माण न हो जिससे भविष्य में सड़क का रास्ता प्रभावित हो।
JDA ने कहा- मास्टर प्लान के खिलाफ कोई नया लेआउट नहीं
JDA ने कोर्ट को बताया कि मास्टर प्लान 2021-31 लागू होने के बाद उसने ऐसा कोई नया लेआउट मंजूर नहीं किया, जो 200 फीट सड़क के रास्ते के खिलाफ हो।
यानी मास्टर प्लान 2021-31 आने के बाद अगर दईजर में किसी ने नया लेआउट बनाकर JDA से मंजूरी मांगी, तो JDA ने ऐसा कोई लेआउट मंजूर नहीं किया जिसमें 200 फीट सड़क के लिए तय रास्ते को कम किया गया हो, हटाया गया हो या उस पर प्लॉटिंग की गई हो।
हाईकोर्ट ने JDA के इस जवाब को रिकॉर्ड पर लिया। साथ ही साफ किया कि आगे दईजर इलाके में मंजूर होने वाले लेआउट मास्टर प्लान 2021-31 के मुताबिक ही होने चाहिए।
यानी आगे किसी नए लेआउट में 200 फीट सड़क के लिए तय जमीन को हटाया या उस पर निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकेगी।
सड़क की जमीन पर निर्माण हुआ तो JDA करे कार्रवाई
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि 2018 के लेआउट में 200 फीट सड़क के लिए जो जमीन छोड़ी गई है, उस पर अवैध निर्माण नहीं होने दिया जाए।
अगर वहां अवैध निर्माण होता है तो JDA को कानून के मुताबिक कार्रवाई कर उसे हटाना होगा।
इस तरह हाईकोर्ट ने JDA की जिम्मेदारी साफ कर दी। 200 फीट सड़क के लिए जो जमीन पहले से छोड़ी गई है, उस पर अवैध निर्माण नहीं होने देना होगा। साथ ही आगे जो भी नए लेआउट मंजूर होंगे, वे मास्टर प्लान 2021-31 के मुताबिक ही होने चाहिए।
हाईकोर्ट ने सड़क बनाने का आदेश नहीं दिया
इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने अभी 200 फीट सड़क बनाने या इसके लिए जमीन अधिग्रहण करने को कहा है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल यह सुनिश्चित किया है कि सड़क के लिए जो जमीन पहले से छोड़ी गई है, उस पर अवैध निर्माण न हो और आगे के लेआउट मास्टर प्लान 2021-31 के मुताबिक ही मंजूर किए जाएं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने भी कहा कि अगर JDA सड़क के लिए छोड़ी गई जमीन पर अवैध निर्माण रोकता है और आगे के लेआउट मास्टर प्लान के मुताबिक मंजूर करता है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।